अल-अनआम · 131/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
ذَٰلِكَ أَن لَّمْ يَكُن رَّبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا غَافِلُونَ ۝١٣١
Zaalika al lam yakkur Rabbuka muhlikal quraa bizulminw wa ahluhaa ghaafiloon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ये सब के सब काफिर थे और ये (पैग़म्बरों का भेजना सिर्फ) उस वजह से है कि तुम्हारा परवरदिगार कभी बस्तियों को ज़ुल्म ज़बरदस्ती से वहाँ के बाशिन्दों के ग़फलत की हालत में हलाक नहीं किया करता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुहलिक – विनाश करने वाला
  • क़ुरा – बस्तियाँ (बहुवचन)
  • बिज़ुल्मिन – अत्याचार के साथ
  • ग़ाफ़िलून – बेखबर, जिन्हें सचेत न किया गया हो

तफ़सीर:

यह आयत उस महान न्याय और दया की बात करती है जो अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ करता है। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त किसी बस्ती को उसके कु़फ़्र और शिर्क की वजह से विनाश में नहीं डालता, जब तक कि वहाँ के लोगों को सचेत करने के लिए रसूल न भेज दिए हों और उन्हें सच्चाई का संदेश न पहुँचा दिया गया हो। यानी अल्लाह की सुन्नत (रीति) यह है कि वह पहले हुज्जत क़ायम करता है, फिर अज़ाब भेजता है।

यह बात बताती है कि अल्लाह तआला अत्यंत न्यायकारी और दयालु है। वह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता और न ही बिना चेतावनी के किसी को सज़ा देता है। जब तक किसी इंसान या समुदाय तक दीन की दावत नहीं पहुँचती, तब तक उस पर अल्लाह की पकड़ नहीं होती। यह अल्लाह का इन्साफ़ है कि उसने इंसानों और जिन्नों दोनों के पास रसूल भेजे, किताबें उतारीं, ताकि कोई यह न कह सके कि हमें तो कुछ पता ही नहीं था।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला ने हमें कितनी बड़ी नेमत दी है — हमारे पास क़ुरआन है, हमारे पास रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत है, हमारे पास सच्चाई का पैग़ाम पहुँच चुका है। अब हमारे पास कोई बहाना नहीं बचा। यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक खुशखबरी भी। खुशखबरी इसलिए कि अल्लाह का दरवाज़ा रहमत से खुला है, और चेतावनी इसलिए कि जिसे हक़ मिल गया और वह उससे मुँह मोड़े, उसके लिए अज़ाब का डर है।

आओ हम अपने रब के इस एहसान का शुक्र अदा करें कि उसने हमें सीधा रास्ता दिखाया, और अपने आपको उन लोगों में न बनाएँ जो दुनिया में ग़ाफ़िल (बेखबर) रहे और आख़िरत में पछतावे के सिवा कुछ हाथ न आए। अल्लाह हमें हिदायत पर साबित क़दम रखे। आमीन।



📜 आयत 129-133 — अल-अनआम

129وَكَذَٰلِكَ نُوَلِّي بَعْضَ الظَّالِمِينَ بَعْضًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
और इसी तरह हम बाज़ ज़ालिमों को बाज़ का उनके करतूतों की बदौलत सरपरस्त बनाएँगे
130يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
(फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स क्या तुम्हारे पास तुम ही में के पैग़म्बर नहीं आए जो तुम तुमसे हमारी आयतें बयान करें और तुम्हें तुम्हारे उस रोज़ (क़यामत) के पेश आने से डराएँ वह सब अर्ज करेंगे (बेशक आए थे) हम ख़ुद अपने ऊपर आप अपने (ख़िलाफ) गवाही देते हैं (वाकई) उनको दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी ने उन्हें अंधेरे में डाल रखा और उन लोगों ने अपने ख़िलाफ आप गवाही दीं
131ذَٰلِكَ أَن لَّمْ يَكُن رَّبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا غَافِلُونَ
बेशक ये सब के सब काफिर थे और ये (पैग़म्बरों का भेजना सिर्फ) उस वजह से है कि तुम्हारा परवरदिगार कभी बस्तियों को ज़ुल्म ज़बरदस्ती से वहाँ के बाशिन्दों के ग़फलत की हालत में हलाक नहीं किया करता
132وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफ़िक हर एक के दरजात हैं
133وَرَبُّكَ الْغَنِيُّ ذُو الرَّحْمَةِ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَسْتَخْلِفْ مِن بَعْدِكُم مَّا يَشَاءُ كَمَا أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوْمٍ آخَرِينَ
और जो कुछ वह लोग करते हैं तुम्हारा परवरदिगार उससे बेख़बर नहीं और तुम्हारा परवरदिगार बे परवाह रहम वाला है - अगर चाहे तो तुम सबके सबको (दुनिया से उड़ा) ले लाए और तुम्हारे बाद जिसको चाहे तुम्हार जानशीन बनाए जिस तरह आख़िर तुम्हें दूसरे लोगों की औलाद से पैदा किया है
अल-अनआमकुरान सूची
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131आयत

अनुवाद — अल-अनआम 131

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सूरा आयत 131/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 129–133. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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