अल-क़लम · 34/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़लम
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتِ النَّعِيمِ ۝٣٤
Inna lilmuttaqeena `inda rabbihim jannaatin na`eem
📖 हिंदी अर्थ
बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِلْمُتَّقِينَ – उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी अवज्ञा से बचते हैं।
  • جَنَّاتِ النَّعِيمِ – ऐसे बाग़ जिनमें हर प्रकार की नेमतें और सुख-सुविधाएँ भरपूर हों, जो कभी समाप्त न हों।

तफ़सीर:

यह आयत मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए खुशख़बरी लेकर आई है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने उसके अहकाम (आदेशों) का पालन किया, उसकी मनाही से बचे, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (खुशी) के मुताबिक़ ढाला — उनके लिए उनके रब के पास ऐसे बाग़ हैं जो हर तरह की नेमतों से भरे हुए हैं। यह नेमतें सिर्फ़ खाने-पीने तक सीमित नहीं, बल्कि वहाँ का सुख, शांति, और आराम ऐसा है जिसकी कोई कमी नहीं, न कभी ख़त्म होने वाला है। यह अल्लाह की ओर से उनका इनाम है, जो उसके वादे के मुताबिक़ उन्हें मिलेगा।

यहाँ अल्लाह ने "عِندَ رَبِّهِمْ" (अपने रब के पास) कहकर यह बताया कि यह नेमतें सिर्फ़ दुनिया में किए गए अच्छे कामों का बदला नहीं, बल्कि अल्लाह की ख़ास रहमत और करम का नतीजा हैं। मुत्तक़ी का दर्जा अल्लाह के यहाँ इतना बुलंद है कि वह उसे अपनी जन्नत में जगह देगा, जहाँ हर दर्द, हर ग़म, और हर तकलीफ़ से पाक (शुद्ध) ज़िंदगी होगी।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि दुनिया की चंद रोज़ की ख़्वाहिशों के पीछे भागने के बजाय, अगर हम अल्लाह की राह पर चलें, उसके बताए रास्ते पर अमल करें, और गुनाहों से बचें, तो हमारा अंजाम इस दुनिया में भी अच्छा होगा और आख़िरत में भी। अल्लाह का वादा सच्चा है — जो लोग उससे डरते हैं और उसकी रज़ा के तालिब (चाहने वाले) होते हैं, उनके लिए ऐसी जगह है जहाँ की नेमतें कभी ख़त्म नहीं होंगी, और वहाँ की ख़ुशी का कोई अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए यह खुशख़बरी है। यही कामयाबी है, और यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 32-36 — सूरा अल-क़लम

32عَسَىٰ رَبُّنَا أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًا مِّنْهَا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا رَاغِبُونَ
उम्मीद है कि हमारा परवरदिगार हमें इससे बेहतर बाग़ इनायत फ़रमाए हम अपने परवरदिगार की तरफ रूजू करते हैं
33كَذَٰلِكَ الْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
(देखो) यूँ अज़ाब होता है और आख़ेरत का अज़ाब तो इससे कहीं बढ़ कर है अगर ये लोग समझते हों
34إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتِ النَّعِيمِ
बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के बाग़ों में होंगे
35أَفَنَجْعَلُ الْمُسْلِمِينَ كَالْمُجْرِمِينَ
तो क्या हम फरमाबरदारों को नाफ़रमानो के बराबर कर देंगे
36مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(हरगिज़ नहीं) तुम्हें क्या हो गया है तुम तुम कैसा हुक्म लगाते हो
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — अल-क़लम 34

सूरा अल-क़लम आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक परहेज़गार लोग अपने परवरदिगार के यहाँ ऐशो आराम के…

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Thursday, October 1, 2026

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