अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَا يَفْتِنَنَّكُم – वह तुम्हें बहका न दे, धोखे में न डाल दे।
- يَنزِعُ – उतारता है, खींचकर अलग करता है।
- سَوْآتِهِمَا – उनके शर्मगाह (गोपनीय अंग)।
- قَبِيلُهُ – उसकी जाति, उसके साथी और अनुयायी।
- أَوْلِيَاء – मित्र, सहायक, संरक्षक।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ आदम की संतानो! शैतान तुम्हें कभी धोखा न दे और न ही वह तुम्हें बहकाकर गुनाह की तरफ खींचे, जैसा उसने तुम्हारे माता-पिता (आदम और हव्वा) के साथ किया। उसने उन्हें वर्जित वृक्ष का फल खाने का लालच देकर जन्नत से निकलवा दिया, और उनका वह लिबास उतरवा दिया जो अल्लाह ने उन्हें पहनाया था ताकि उनके शर्मगाह खुल जाएँ और उन्हें अपनी बेबसी और शर्मिंदगी का एहसास हो। यह शैतान की पुरानी चाल है—वह इंसान को बड़े नेक काम के बहाने गुनाह की तरफ ले जाता है, और जब इंसान उसके जाल में फँसता है, तो उसकी इज़्ज़त और पर्दा छीन लिया जाता है।
अल्लाह तआला हमें आगाह कर रहे हैं कि शैतान और उसकी पूरी जाति तुम्हें देखती है, जबकि तुम उन्हें नहीं देख सकते। यह कितना खतरनाक है! दुश्मन तुम्हें देख रहा है, तुम्हारी कमज़ोरियों को जानता है, तुम्हारे कदमों पर नज़र रखता है, और तुम उसे देख भी नहीं सकते। इसलिए उससे बचने का एक ही रास्ता है—अल्लाह की हिदायत को थाम लो, उसके हुक्मों पर चलो, और शैतान के वसवसों (फुसफुसाहटों) से दूर रहो।
फिर अल्लाह फरमाता है कि हमने शैतानों को उन लोगों का साथी और मददगार बना दिया है जो ईमान नहीं लाते। यानी जो लोग अल्लाह पर ईमान नहीं रखते, उनके रसूलों को नहीं मानते, और अल्लाह की हिदायत पर चलना नहीं चाहते, वे खुद शैतान को अपना दोस्त बना लेते हैं। शैतान उन्हें गुमराही में और धकेलता है, और वे उसके पीछे-पीछे चलते रहते हैं। मगर जो लोग ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं, उन पर शैतान का कोई ज़ोर नहीं चलता, क्योंकि उन्होंने अल्लाह की पनाह ले ली है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बताती है कि शैतान हमारा खुला दुश्मन है, और उसकी कोशिश यही है कि हमें जन्नत से दूर करे। जिस तरह उसने आदम और हव्वा को जन्नत से निकलवाया, उसी तरह वह हमें भी अल्लाह की रहमत और जन्नत से दूर करना चाहता है। लेकिन अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है और बचाव का रास्ता भी बता दिया है—वह है ईमान, तक़वा और अल्लाह की याद। जब हम अल्लाह के करीब होते हैं, तो शैतान हमसे दूर भागता है। याद रखिए, शैतान की ताकत सिर्फ उन्हीं पर चलती है जो अल्लाह से दूर होते हैं। इसलिए अपने ईमान को मज़बूत कीजिए, नमाज़ की पाबंदी कीजिए, कुरान की तिलावत कीजिए, और अल्लाह से दुआ माँगते रहिए कि वह हमें शैतान के वसवसों से बचाए। अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, और वह चाहता है कि हम जन्नत की राह पर चलें, न कि शैतान की पैरवी करके जहन्नम की तरफ जाएँ।
📜 आयत 25-29 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 27
सूरा अल-आराफ आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि लोग नसीहत व इबरत हासिल करें ऐ औलादे आदम…सूरा आयत 27/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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