अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- लिबासन – वस्त्र, पहनावा
- युवारी – ढकने वाला, छिपाने वाला
- सौआत – शर्मगाहें, वे अंग जिन्हें छिपाना आवश्यक है
- रीशन – सुंदरता और सजावट का वस्त्र, पक्षियों के पंखों की तरह जो उनकी शोभा बढ़ाते हैं
- लिबासुत-तक़्वा – परहेज़गारी और अल्लाह के डर का वस्त्र
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ आदम की संतान! अल्लाह तआला ने अपनी असीम कृपा और दया से तुम्हें दो प्रकार के वस्त्र प्रदान किए हैं। पहला वह वस्त्र जो तुम्हारी शर्मगाहों को ढकता है – यह तुम्हारी बुनियादी आवश्यकता है, जिसके बिना मानव जीवन अधूरा और लज्जाजनक होता। यह वस्त्र तुम्हारी गरिमा और सम्मान की रक्षा करता है। दूसरा वह वस्त्र है जो तुम्हारी सुंदरता और शोभा को बढ़ाता है – जैसे पक्षियों के पंख उनकी सुंदरता का कारण होते हैं, उसी प्रकार यह वस्त्र तुम्हें समाज में गरिमा और आकर्षण प्रदान करता है।
किंतु इन दोनों से भी बढ़कर और उत्तम वस्त्र है – तक़्वा का वस्त्र। यह वह आंतरिक गुण है जो अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसकी मनाही से बचने से प्राप्त होता है। यह वस्त्र आत्मा की पवित्रता, हृदय की शुद्धता और चरित्र की ऊँचाई का प्रतीक है। जबकि शारीरिक वस्त्र केवल बाहरी अंगों को ढकता है, तक़्वा का वस्त्र आंतरिक कमजोरियों, बुराइयों और पापों से मनुष्य की रक्षा करता है। यही वह वस्त्र है जो मनुष्य को अल्लाह के समक्ष सर्वोच्च सम्मान प्रदान करता है।
अल्लाह तआला का यह उपहार – वस्त्रों का अवतरण – उसकी रूबूबियत (प्रभुत्व), एकता और उसकी असीम दया की स्पष्ट निशानी है। यह इस बात का प्रमाण है कि अल्लाह अपने बंदों की हर आवश्यकता को जानता है और उसे पूरा करता है। वह चाहता है कि तुम इन नेमतों को पहचानो, उन पर विचार करो और उसका शुक्र अदा करो।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि जिस प्रकार हम अपने शरीर को ढकने के लिए वस्त्र पहनते हैं, उसी प्रकार हमें अपनी आत्मा को भी तक़्वा के वस्त्र से सजाना चाहिए। जिस प्रकार बिना वस्त्र के मनुष्य लज्जित और अपमानित होता है, उसी प्रकार बिना तक़्वा के आत्मा नग्न और कमज़ोर होती है। अल्लाह ने हमें दोनों प्रकार के वस्त्र दिए हैं – एक शारीरिक आवश्यकता के लिए और एक आध्यात्मिक उन्नति के लिए। यह अल्लाह की महान दया है कि उसने हमें न केवल शारीरिक सुरक्षा प्रदान की, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग भी दिखाया। आइए, हम अल्लाह की इन नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें और तक़्वा के वस्त्र को धारण करके अपने जीवन को सफल बनाएं। याद रखें, सच्ची शोभा और सम्मान उसी को प्राप्त है जो अल्लाह के डर और परहेज़गारी को अपना सबसे सुंदर वस्त्र बनाता है।
📜 आयत 24-28 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 26
सूरा अल-आराफ आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसी में से (और) उसी में से फिर दोबारा…सूरा आयत 26/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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