Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْمَلَأُ – समाज के प्रतिष्ठित नेता और बड़े लोग।
- اسْتَكْبَرُوا – जिन्होंने घमंड किया, सत्य को मानने से इनकार किया।
- اسْتُضْعِفُوا – जिन्हें कमज़ोर समझा गया, साधारण लोग।
- مُرْسَلٌ – भेजा गया (अल्लाह का पैगंबर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब पैगंबर सालिह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सच्चाई की दावत दी और अल्लाह के आदेशों का संदेश पहुँचाया, तो उनकी क़ौम के घमंडी और अभिमानी सरदार, जो अपनी ऊँची सामाजिक हैसियत और धन-दौलत पर इतराते थे, उन्होंने उन कमज़ोर और साधारण लोगों से, जो सालिह (अलैहिस्सलाम) पर ईमान ला चुके थे, मज़ाक़िया और तंज़ भरे अंदाज़ में पूछा: "क्या तुम सचमुच जानते हो कि सालिह अपने रब की ओर से भेजे गए हैं?" उनका यह सवाल वास्तव में ईमानवालों को नीचा दिखाने और उनके विश्वास को कमज़ोर करने की कोशिश थी। वे सोचते थे कि ये ग़रीब और कमज़ोर लोग क्या समझते हैं? सच्चाई तो हम जैसे बड़े लोग ही जानते हैं।
लेकिन अल्लाह के सच्चे बंदों का जवाब बड़ा ही दृढ़ और स्पष्ट था। उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा: "हमें पूरा यक़ीन है कि जो कुछ (संदेश और आदेश) लेकर सालिह भेजे गए हैं, हम उस पर ईमान रखते हैं।" उन्होंने अपने ईमान की गवाही दी और किसी भी संदेह या झिझक को अपने दिल में जगह नहीं दी। यह जवाब उनके सच्चे विश्वास, अल्लाह पर पूर्ण भरोसे और पैगंबर की सच्चाई पर अटल यक़ीन का प्रमाण था।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई का मापदंड सामाजिक हैसियत, धन-दौलत या बड़प्पन नहीं है, बल्कि सच्चाई तो वही है जो अल्लाह की ओर से आए। घमंड और अभिमान इंसान को सत्य से दूर कर देता है, जबकि नम्रता और सच्चे दिल से अल्लाह की ओर झुकना ही सफलता की कुंजी है। इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि जब हम सत्य पर हों, तो हमें किसी की परवाह किए बिना अपने ईमान का एलान करना चाहिए, चाहे दुनिया के बड़े-बड़े लोग हमारा मज़ाक उड़ाएँ। अल्लाह के वादे पर भरोसा रखें, क्योंकि अंतिम जीत सच्चे ईमानवालों की ही होती है। याद रखें, जन्नत की ऊँचाइयाँ उन्हीं के लिए हैं जो दुनिया के घमंड से बचकर अल्लाह के आगे सिर झुकाते हैं।
📜 आयत 73-77 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 75
सूरा अल-आराफ आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उसकी क़ौम के बड़े बड़े लोगों ने बेचारें ग़रीबों…सूरा आयत 75/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 18, 2026
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