तब जिन लोगों को (अपनी दौलत दुनिया पर) घमन्ड था कहने लगे हम तो जिस पर तुम ईमान लाए हो उसे नहीं मानते
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
اسْتَكْبَرُوا: अभिमान किया, घमंड किया, बड़प्पन का दावा किया।
كَافِرُونَ: इनकार करने वाले, अस्वीकार करने वाले, झुठलाने वाले।
व्याख्या:
जब नबी सालिह अलैहिस्सलाम की ऊँटनी को काट दिया गया और उनकी क़ौम के कमज़ोर और नेक लोग उन पर ईमान ला चुके थे, तो उनके अभिमानी और सरकश सरदारों ने उन ईमानवालों से कहा: "हम उस चीज़ को नहीं मानते जिसे तुम मानते हो, और जिस नबी की नबूवत पर तुमने विश्वास किया है, हम उसे झुठलाते हैं और उसका इनकार करते हैं।" यानी उन्होंने साफ़ तौर पर ईमान और हक़ को ठुकरा दिया और अपने घमंड और अकड़ की वजह से सच्चाई को कबूल करने से इनकार कर दिया। उनका यह कहना सिर्फ़ ज़बानी इनकार नहीं था, बल्कि वे इस पर अड़े रहे और नबी सालिह अलैहिस्सलाम की शरीअत और पैग़ाम को मानने से पूरी तरह मुकर गए। उन्होंने ईमानवालों का मज़ाक़ उड़ाते हुए अपने कुफ़्र का ऐलान किया, जैसे कि वे कह रहे हों: "तुम जिस पर ईमान लाए हो, हम उसके साथ कुफ़्र करते हैं और उसे रद्द करते हैं।"
फ़ायदे और सबक़:
अभिमान (घमंड) इंसान को हक़ कबूल करने से रोकता है। यह वह बीमारी है जो इब्लीस और फ़िरऔन जैसी हस्तियों को भी ईमान से महरूम कर गई।
सच्चे ईमानवालों को अभिमानियों की बातों से विचलित नहीं होना चाहिए। उनका इनकार और मज़ाक़ उनके ईमान को कमज़ोर नहीं कर सकता।
कुफ़्र और इनकार का ऐलान करना अभिमानियों की आदत है, लेकिन अल्लाह का फ़ैसला उनके मुक़ाबले में ईमानवालों के पक्ष में होता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ की राह पर चलने वालों को दुश्मनों की धमकियों और इनकार से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है।
अभिमानी लोग अपनी सरकशी की वजह से अल्लाह की रहमत से दूर हो जाते हैं और अंजाम में उसी अज़ाब के शिकार होते हैं जिससे उन्होंने इनकार किया था।
और वह वक्त याद करो जब उसने तुमको क़ौम आद के बाद (ज़मीन में) ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हें ज़मीन में इस तरह बसाया कि तुम हमवार व नरम ज़मीन में (बड़े-बड़े) महल उठाते हो और पहाड़ों को तराश के घर बनाते हो तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो और रूए ज़मीन में फसाद न करते फिरो
तो उसकी क़ौम के बड़े बड़े लोगों ने बेचारें ग़रीबों से उनमें से जो ईमान लाए थे कहा क्या तुम्हें मालूम है कि सालेह (हक़ीकतन) अपने परवरदिगार के सच्चे रसूल हैं - उन बेचारों ने जवाब दिया कि जिन बातों का वह पैग़ाम लाए हैं हमारा तो उस पर ईमान है
ग़रज़ उन लोगों ने ऊँटनी के कूचें और पैर काट डाले और अपने परवरदिगार के हुक्म से सरताबी की और (बेबाकी से) कहने लगे अगर तुम सच्चे रसूल हो तो जिस (अज़ाब) से हम लोगों को डराते थे अब लाओ
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