नूह · 15/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
أَلَمْ تَرَوْا كَيْفَ خَلَقَ اللَّهُ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ طِبَاقًا ۝١٥
Alam taraw kaifa khalaqal laahu sab`a samaawaatin tibaaqaa
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • सब' समावातिन – सात आकाश
  • तिबाक़न – परत दर परत, एक के ऊपर एक, तहों के रूप में

तफ़सीर:

ऐ लोगों! क्या तुमने कभी ग़ौर नहीं किया कि अल्लाह ने सात आकाश कैसे बनाए? वे सातों आकाश एक-दूसरे के ऊपर इस प्रकार हैं जैसे परतें हों—हर आकाश दूसरे के ऊपर तह बना हुआ है, बिल्कुल व्यवस्थित और सुदृढ़। यह कोई साधारण रचना नहीं है, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत का अद्भुत नमूना है।

इस आयत में अल्लाह तआला इंसान को उसकी अपनी आँखों से देखी जाने वाली चीज़ों की ओर ध्यान दिला रहे हैं। जब तुम आसमान की ओर देखते हो, तो क्या तुम्हें यह नहीं दिखता कि यह कितनी ऊँची, कितनी विशाल और कितनी सुंदर रचना है? यह सात आकाश, जो एक-दूसरे के ऊपर तहों की तरह हैं, बिना किसी खंभे के खड़े हैं, बिना किसी सहारे के टिके हुए हैं। यही अल्लाह की महानता का प्रमाण है।

अगर इंसान इन आकाशों की ओर ग़ौर से देखे, तो उसे यक़ीन हो जाएगा कि इन्हें बनाने वाला कोई और नहीं, बल्कि वही अल्लाह है जो सब कुछ पैदा करने वाला है। यही वह अल्लाह है जिसने चाँद को रोशनी और सूरज को चमकता हुआ दीपक बनाया, ताकि इंसान उनसे फ़ायदा उठाए और अपनी ज़िंदगी के कामों में उन्हें इस्तेमाल करे।

इस आयत से हमें सबक़ लेना चाहिए कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी और अद्भुत रचना की है, क्या वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता? क्या वह हमारी दुआएँ सुनकर हमें रिज़्क़ नहीं दे सकता? जब हम इस पर यक़ीन कर लेंगे, तो हमारा दिल अल्लाह की तरफ़ झुकेगा, हम उसकी इबादत करेंगे, उससे माफ़ी माँगेंगे और उसकी रहमत के भूखे रहेंगे।

याद रखिए, यह क़ुरआन हमें सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं दिया गया, बल्कि इस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने के लिए दिया गया है। जब हम आसमान की ओर देखें, तो अल्लाह की अज़मत को याद करें, और जब हम अपने आस-पास की चीज़ों को देखें, तो अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान लाएँ। यही ईमान हमें सच्ची राह दिखाएगा और हमें अल्लाह की रहमत के क़रीब ले जाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — नूह

13مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًا
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते
14وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا
हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया
15أَلَمْ تَرَوْا كَيْفَ خَلَقَ اللَّهُ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ طِبَاقًا
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
16وَجَعَلَ الْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ الشَّمْسَ سِرَاجًا
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
17وَاللَّهُ أَنبَتَكُم مِّنَ الْأَرْضِ نَبَاتًا
और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया
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अनुवाद — नूह 15

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सूरा आयत 15/28 — नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: नूह सुनें, नूह अनुवाद, नूह mp3, नूह pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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