नूह · 16/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
وَجَعَلَ الْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ الشَّمْسَ سِرَاجًا ۝١٦
Wa ja`alal qamara feehinna nooranw wa ja`alash shamsa siraajaa
📖 हिंदी अर्थ
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नूरन: रोशनी, चमक
  • सिराजन: दीपक, चिराग़, प्रकाश देने वाला

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी महान शक्ति और बेमिसाल कुदरत का ज़िक्र करते हुए बताया कि उसने सात आसमान बनाए, जो एक के ऊपर एक हैं। फिर उन्हीं आसमानों में चाँद को रोशनी के रूप में पैदा किया, ताकि रात के अंधेरे में लोगों को हल्की रोशनी मिले और वे उससे लाभ उठा सकें। चाँद की रोशनी सूरज की तरह तेज़ और चकाचौंध करने वाली नहीं, बल्कि नर्म और सुकून देने वाली है, जो रात की रौनक़ बढ़ाती है।

और सूरज को उसने एक चमकता हुआ दीपक बनाया, जो दिन में पूरी दुनिया को रोशन करता है। जिस तरह एक दीपक घर को रोशन करता है और उसमें रहने वालों के लिए ज़रूरी चीज़ें देखना आसान करता है, उसी तरह सूरज इस पूरी कायनात के लिए रोशनी का सबसे बड़ा ज़रिया है। इसकी गर्मी और रोशनी से पेड़-पौधे उगते हैं, फल पकते हैं, मौसम बदलते हैं और जीवन का पूरा सिलसिला चलता रहता है।

इस आयत में अल्लाह तआला ने इंसान को अपनी कुदरत पर ग़ौर करने की दावत दी है। जब इंसान चाँद और सूरज की इस निज़ामी रोशनी को देखता है, तो उसे समझना चाहिए कि यह सब कुछ अपने आप नहीं बना, बल्कि एक क़ादिर-ए-मुत्लक़ (सर्वशक्तिमान) अल्लाह ने इसे बनाया है। यही वह अल्लाह है जो हमें रिज़्क़ देता है, हमारी परवरिश करता है और हमें अपनी रहमत से नवाज़ता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! जब हम रात को चाँद की रौशनी देखते हैं और दिन को सूरज की चमक, तो हमें अपने रब का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए। यह कुदरत का नज़ारा हमें याद दिलाता है कि जिस अल्लाह ने इतनी बड़ी कायनात को इतने खूबसूरत तरीक़े से बनाया है, वह हमारी दुआओं को सुनने और हमारी ज़रूरतें पूरी करने से कहीं ज़्यादा क़ाबिल है। हमें चाहिए कि हम अपने गुनाहों से तौबा करें, अल्लाह से माफ़ी माँगें और उसकी रहमत के दरवाज़े पर दस्तक देते रहें। अल्लाह तआला हम सबको अपनी कुदरत पर ग़ौर करने और अपनी इबादत में मशग़ूल रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा नूह

14وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا
हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया
15أَلَمْ تَرَوْا كَيْفَ خَلَقَ اللَّهُ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ طِبَاقًا
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
16وَجَعَلَ الْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ الشَّمْسَ سِرَاجًا
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
17وَاللَّهُ أَنبَتَكُم مِّنَ الْأَرْضِ نَبَاتًا
और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया
18ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًا
फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा
नूहकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — नूह 16

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Thursday, October 1, 2026

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