नूह · 14/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا ۝١٤
Wa qad khalaqakum at waaraa
📖 हिंदी अर्थ
हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَطْوَارًا: कई चरणों में, एक अवस्था से दूसरी अवस्था की ओर बढ़ते हुए, क्रमिक रूप से।

तफ़सीर (व्याख्या):

और अल्लाह ने तुम्हें क्रमिक अवस्थाओं में पैदा किया—पहले नुत्फ़ा (बूंद), फिर 'अलक़ा (जमा हुआ खून), फिर मुज़्ग़ा (गोश्त का टुकड़ा), फिर हड्डियाँ, फिर मांस, और इस तरह तुम्हें पूरा इंसान बनाया। यह अल्लाह की कुदरत की सबसे बड़ी निशानी है कि उसने तुम्हें एक बूंद से शुरू करके धीरे-धीरे हर चरण से गुज़ारते हुए एक सुंदर और पूर्ण इंसान का रूप दिया। क्या तुमने कभी इस पर ग़ौर किया कि यह सिलसिला कितना अद्भुत है? हर चरण में अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) और कुदरत (शक्ति) झलकती है।

यह आयत उन लोगों को याद दिलाती है जो अल्लाह की अज़मत (महानता) से डरते नहीं और उसकी नेमतों का शुक्र नहीं करते। अगर तुम अपनी पैदाइश के इन मरहलों पर ग़ौर करो, तो तुम्हें यक़ीन हो जाएगा कि जिस अल्लाह ने तुम्हें इस तरह बनाया है, वही तुम्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।

यही वह अल्लाह है जो तुम पर रहमतें बरसाता है, तुम्हारी गुनाहों की माफ़ी के बदले तुम्हें खूब बारिश देता है, तुम्हारे माल और औलाद में बरकत डालता है, और तुम्हारे लिए बाग़ और नहरें पैदा करता है। तो क्यों न तुम उसकी इबादत करो, उससे डरो और उसकी तरफ़ रुजू करो? यही तुम्हारी कामयाबी और खुशहाली की कुंजी है।

अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करना इंसान को उसकी अज़मत का एहसास दिलाता है और उसे अपने रब की तरफ़ झुकाता है। जब इंसान यह समझ लेता है कि उसकी पैदाइश का हर मरहला अल्लाह की मेहरबानी और हिकमत से तय हुआ है, तो उसका दिल इबादत में लीन हो जाता है और वह अपने रब का शुक्रगुज़ार बन जाता है। यही वह रास्ता है जो उसे दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 12-16 — सूरा नूह

12وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَالٍ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّاتٍ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَارًا
और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा
13مَّا لَكُمْ لَا تَرْجُونَ لِلَّهِ وَقَارًا
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते
14وَقَدْ خَلَقَكُمْ أَطْوَارًا
हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया
15أَلَمْ تَرَوْا كَيْفَ خَلَقَ اللَّهُ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ طِبَاقًا
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
16وَجَعَلَ الْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ الشَّمْسَ سِرَاجًا
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
नूहकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — नूह 14

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Friday, October 2, 2026

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