नूह · 4/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ اللَّهِ إِذَا جَاءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ ۝٤
Yaghfir lakum min zunoobikum wa yu`akhkhirkum ilaaa ajalim musammaa; innaa ajalal laahi izaa jaaa`a laa yu`akhkhar; law kuntum ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ: वह तुम्हारे गुनाहों को माफ कर देगा।
  • وَيُؤَخِّرْكُمْ: और वह तुम्हें टाल देगा (यानी तुम्हारी उम्र बढ़ा देगा)।
  • إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى: एक निश्चित समय तक (जो अल्लाह के इल्म में मुक़र्रर है)।
  • أَجَلُ اللَّهِ: अल्लाह का फैसला (यानी अज़ाब या मौत का वक़्त)।
  • لَا يُؤَخَّرُ: उसे टाला नहीं जा सकता।

तफ़सीर (व्याख्या):

नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को दावत दी और उन्हें साफ़-साफ़ बता दिया कि अगर वे अल्लाह की इबादत करें, उसका क़हर डरें और नबी की इताअत करें, तो अल्लाह उनके गुनाह माफ कर देगा। यहाँ "मिन ज़ुनूबिकुम" का मतलब है कि अल्लाह उन गुनाहों को माफ करेगा जो उसके हुकूक (अधिकारों) से जुड़े हैं, जबकि बंदों के हुकूक अलग मामला है। साथ ही, वह उन्हें एक मुक़र्रर वक़्त तक ज़िंदगी में मोहलत देगा, यानी उनकी उम्र बढ़ाएगा और उन्हें अज़ाब से महफूज़ रखेगा, बशर्ते वे ईमान और तौबा पर क़ायम रहें।

फिर अल्लाह तआला ने एक अहम हक़ीक़त बयान की: जब अल्लाह का फैसला आ जाता है—चाहे वह मौत हो या अज़ाब—तो उसे कोई टाल नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि जब तक मोहलत मिली है, उसका फायदा उठाए और ईमान व अच्छे आमाल की तरफ दौड़े। अगर उन्हें यह इल्म होता कि अल्लाह का अज़ाब आने के बाद कोई मौका नहीं मिलता, तो वे ज़रूर ईमान ले आते और अपनी गलतियों से तौबा कर लेते।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह रहीम और करीम है—वह अपने बंदों को माफी का दरवाजा खुला रखता है और उन्हें मोहलत देता है ताकि वे सुधर जाएँ। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें ज़िंदगी दी है, और हर सुबह-शाम हमारे पास तौबा का मौका है। हमें चाहिए कि इस मोहलत को ग़नीमत समझें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की इताअत को अपनी ज़िंदगी का निज़ाम बनाएँ। याद रखें, मौत का वक़्त तय है और उसे टाला नहीं जा सकता—इसलिए आज ही लौट आएँ, क्योंकि कल का भरोसा नहीं। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ दौड़ते हैं, और वह कभी निराश नहीं करता।



📜 आयत 2-6 — नूह

2قَالَ يَا قَوْمِ إِنِّي لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ
3أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاتَّقُوهُ وَأَطِيعُونِ
कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो
4يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُؤَخِّرْكُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۚ إِنَّ أَجَلَ اللَّهِ إِذَا جَاءَ لَا يُؤَخَّرُ ۖ لَوْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते
5قَالَ رَبِّ إِنِّي دَعَوْتُ قَوْمِي لَيْلًا وَنَهَارًا
(जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा
6فَلَمْ يَزِدْهُمْ دُعَائِي إِلَّا فِرَارًا
लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे
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अनुवाद — नूह 4

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सूरा आयत 4/28 — नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: नूह सुनें, नूह अनुवाद, नूह mp3, नूह pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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