अल-मुद्दस्सिर · 37/56
अनुवाद उच्चारण — अल-मुद्दस्सिर
لِمَن شَاءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ ۝٣٧
Liman shaaa`a minkum any yataqaddama aw yata akhkhar
📖 हिंदी अर्थ
(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِمَن شَاءَ: उस व्यक्ति के लिए जो चाहे।
  • أَن يَتَقَدَّمَ: आगे बढ़े (यानी ईमान और नेक कर्मों की ओर)।
  • أَوْ يَتَأَخَّرَ: या पीछे हटे (यानी कुफ्र और गुनाहों की ओर)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में इंसान को पूरी आज़ादी दी है कि वह अपने रब की राह पर आगे बढ़े या उससे पीछे हट जाए। यह एक बड़ी चेतावनी और अज़ाब का एलान है। अल्लाह ने क़ुरआन में कई क़समें खाकर यह बात साफ़ कर दी है कि जहन्नुम की आग बहुत भयानक है, और उसे उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो हक़ को झुठलाते हैं और गुनाहों में डूबे रहते हैं।

यह आयत हर इंसान को खुला पैग़ाम देती है कि उसके सामने दो रास्ते हैं: एक रास्ता ईमान, नेकी, तक़वा और अल्लाह की इबादत का है — जो उसे जन्नत की तरफ ले जाता है; और दूसरा रास्ता कुफ्र, गुनाह, ज़ुल्म और अल्लाह की नाफ़रमानी का है — जो उसे जहन्नम की आग में डाल देता है। अल्लाह ने किसी को मजबूर नहीं किया, बल्कि हर इंसान को अक़्ल, समझ और इख़्तियार (पसंद की आज़ादी) दी है ताकि वह खुद अपना रास्ता चुने।

अब सवाल यह है कि हम क्या चुनते हैं? क्या हम उन लोगों में से होंगे जो आगे बढ़कर अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनेंगे, या उन लोगों में से जो पीछे हटकर अज़ाब और जहन्नम को अपना ठिकाना बनाएँगे? अल्लाह ने कुरआन में यह बात साफ़ कर दी है कि यह फैसला हमारे अपने हाथ में है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को किस तरह गुज़ार रहे हैं। क्या हम अपने रब की इबादत, नेक कामों और भलाई में आगे बढ़ रहे हैं, या शैतान के पीछे चलकर गुनाहों में पीछे हट रहे हैं? याद रखिए, यह दुनिया इम्तिहान की जगह है, और क़यामत के दिन हमें अपने किए का हिसाब देना होगा।

अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमें कुरआन जैसी हिदायत दी है, और रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़रिए सही रास्ता दिखाया है। अब हम पर यह फर्ज़ है कि हम उस रास्ते पर चलें जो हमें अल्लाह की मोहब्बत, मग़फिरत और जन्नत तक पहुँचाए। अल्लाह हम सबको तौफ़ीक़ दे कि हम उन लोगों में से हों जो आगे बढ़ते हैं, न कि पीछे हटने वालों में। आमीन।



📜 आयत 35-39 — अल-मुद्दस्सिर

35إِنَّهَا لَإِحْدَى الْكُبَرِ
कि वह (जहन्नुम) भी एक बहुत बड़ी (आफ़त) है
36نَذِيرًا لِّلْبَشَرِ
(और) लोगों के डराने वाली है
37لِمَن شَاءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ
(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना
38كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ
और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल के बदले गिर्द है
39إِلَّا أَصْحَابَ الْيَمِينِ
मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीRevelation
37आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 37

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Tuesday, August 18, 2026

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