अल-मुद्दस्सिर · 5/56
अनुवाद उच्चारण — अल-मुद्दस्सिर
وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ ۝٥
Warrujza fahjur
📖 हिंदी अर्थ
और गन्दगी से अलग रहो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الرُجز (अर-रुज्ज़): इसका अर्थ है गंदगी, अपवित्रता, और यहाँ इसका प्रयोग मूर्तियों (बुतों) और शिर्क (ईश्वर के साथ साझीदार ठहराने) के लिए हुआ है। कुछ व्याख्याओं में इसे अज़ाब (यातना) के अर्थ में भी लिया गया है, लेकिन प्रमुख अर्थ मूर्तिपूजा और शिर्क से दूर रहना है।
  • فَاهْجُر (फ़हजुर): इसका अर्थ है "त्याग करो", "छोड़ दो", "पूरी तरह से अलग हो जाओ"।

व्याख्या:

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके माध्यम से पूरी उम्मत को एक स्पष्ट और दृढ़ आदेश दे रहा है—"और गंदगी (मूर्तियों और शिर्क) को पूरी तरह त्याग दो।" यह केवल एक साधारण परहेज़ नहीं है, बल्कि इसका अर्थ है कि मूर्तियों से, उनकी पूजा से, और हर उस चीज़ से जो अल्लाह के साथ साझीदार ठहराने की ओर ले जाए, पूर्ण रूप से किनारा कर लिया जाए। यह आदेश उस समय दिया गया जब मक्का में मूर्तिपूजा आम थी, और यह सिखाता है कि ईमान की पहली शर्त यह है कि इंसान अपने दिल और अपने जीवन से हर प्रकार की मूर्तिपूजा, अंधविश्वास और शिर्क को साफ़ कर दे।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) का दामन थामने के लिए शिर्क की हर रूप से निंदा और त्याग आवश्यक है। जिस प्रकार कपड़ों को पवित्र रखा जाता है, उसी प्रकार दिल को भी शिर्क की गंदगी से पवित्र रखना चाहिए। यह आदेश केवल नबी ﷺ के लिए नहीं था, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह की ओर रुजू करता है—उसे अपने जीवन से हर झूठे माबूद (पूज्य) को निकालकर केवल अल्लाह की इबादत करनी चाहिए।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक रौशनी है कि इस्लाम पूर्ण शुद्धि का धर्म है। यह हमें बताती है कि जब इंसान अल्लाह की ओर मुड़ता है, तो उसे अपने अतीत की हर बुराई, हर झूठी मान्यता और हर गलत रस्म को त्यागना होता है। यह त्याग कोई कठिन काम नहीं, बल्कि आज़ादी है—आज़ादी उन बंधनों से जो इंसान को अल्लाह से दूर रखते हैं। जो व्यक्ति इन बुतों (चाहे वे पत्थर की मूर्तियाँ हों, या धन, लोभ, या सांसारिक इच्छाएँ) को त्याग देता है, वह सच्ची शांति और सफलता पाता है। अल्लाह तआला हम सबको इस आयत पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे, और हमारे दिलों को शिर्क और हर प्रकार की गंदगी से पाक करे। आमीन।



📜 आयत 3-7 — अल-मुद्दस्सिर

3وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ
और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो
4وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ
और अपने कपड़े पाक रखो
5وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ
और गन्दगी से अलग रहो
6وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ
और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो
7وَلِرَبِّكَ فَاصْبِرْ
और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीRevelation
5आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 5

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 5 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और गन्दगी से अलग रहो

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Tuesday, August 18, 2026

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