अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तम्नुन (तुम एहसान जताओ) — इसका अर्थ है किसी पर उपकार करके उसे जताना या उसे बड़ा बताना।
- तस्तक्सिर (अधिक चाहना) — इसका अर्थ है किसी चीज़ को बहुत समझना या उसके बदले में और अधिक की आशा रखना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को नसीहत कर रहे हैं कि ऐ नबी! तुम किसी को कुछ दो तो उस पर एहसान न जताओ, और न ही इस नियत से दो कि बदले में उससे ज़्यादा मिलेगा। यानी तुम्हारा देना ख़ालिस अल्लाह की रज़ा के लिए हो, न कि किसी दुनियावी मुआवज़े या बदले की चाहत के लिए। यह आदेश नबी ﷺ को दिया गया, और यही आदेश उनकी उम्मत के लिए भी है कि नेकी करते समय उसे बड़ा न समझें, न उसका एहसान जताएँ, और न ही उसके बदले में दुनियावी फ़ायदा चाहें। असल में इंसान का अमल चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अल्लाह की रहमत और उसके फज़ल के सामने बहुत छोटा है। इसलिए अमल करते समय अल्लाह की रज़ा का लिहाज़ रखें और अपने अमल को बड़ा न समझें।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि नेकी और भलाई का असली मक़सद अल्लाह की ख़ुशी होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ़ या दुनियावी फ़ायदा। जब हम किसी की मदद करें, तो उसे जताना और उस पर एहसान रखना इस्लाही अख़्लाक़ के खिलाफ़ है। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो ख़ामोशी से नेकी करते हैं और उसे बड़ा नहीं समझते। याद रखिए, अल्लाह के पास हमारे छोटे-से-छोटे अमल की क़द्र है, बशर्ते वह ख़ालिस उसी की रज़ा के लिए हो। आइए हम अपनी नेकियों को बड़ा समझने और उनका एहसान जताने से बचें, और अपने दिल को अल्लाह की रज़ा की तरफ़ मोड़ें — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 4-8 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 6
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार…सूरा आयत 6/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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