अल-इंसान · 4/31
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इंसान
إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ سَلَاسِلَ وَأَغْلَالًا وَسَعِيرًا ۝٤
Innaaa a`tadnaa lilkaa fireena salaasila wa aghlaalanw wa sa`eeraa
📖 हिंदी अर्थ
हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَعْتَدْنَا: हमने तैयार कर रखा है।
  • سَلَاسِلَ: जंजीरें (लोहे की बेड़ियाँ)।
  • أَغْلَالًا: तौक़ (गले में डाली जाने वाली बेड़ियाँ, जिनमें हाथ भी बंध जाते हैं)।
  • سَعِيرًا: भड़कती हुई आग।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने इन्कार करने वाले बंदों के लिए उस अंजाम का ज़िक्र कर रहा है जो उसने उनके लिए तैयार कर रखा है। वह फ़रमाता है कि हमने काफ़िरों के लिए लोहे की जंजीरें तैयार कर रखी हैं, जिनसे उनके पाँव बाँधे जाएँगे, और तौक़ (गले की बेड़ियाँ) जिनमें उनके हाथ उनकी गर्दनों से जकड़ दिए जाएँगे, और भड़कती हुई आग जिसमें उन्हें झोंका जाएगा और वे उसकी लपटों में जलेंगे। ये सज़ाएँ उनके उस कुफ़्र और इन्कार का नतीजा हैं जो उन्होंने दुनिया में किया — उन्होंने अल्लाह की नेमतों का इन्कार किया, उसके रसूलों को झुठलाया और उसकी आयतों से मुँह मोड़ा।

यह आयत हम मुसलमानों के लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। जिस रब ने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, हमें इस्लाम जैसी नेमत अता की — उसकी नाफ़रमानी का अंजाम कितना भयानक है! लेकिन साथ ही, यह हमारे लिए रहमत का पैग़ाम भी है कि अल्लाह ने हमें आगाह कर दिया है, ताकि हम उस रास्ते पर चलें जो हमें जहन्नम की जंजीरों से बचाकर जन्नत की राहत तक पहुँचाए। अल्लाह का डर हमारे दिलों में हो, और हम अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ — क्योंकि वही हमारा मालिक है, और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-इंसान

2إِنَّا خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَاهُ سَمِيعًا بَصِيرًا
हमने इन्सान को मख़लूत नुत्फे से पैदा किया कि उसे आज़माये तो हमने उसे सुनता देखता बनाया
3إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا
और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा
4إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ سَلَاسِلَ وَأَغْلَالًا وَسَعِيرًا
हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है
5إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا
बेशक नेकोकार लोग शराब के वह सागर पियेंगे जिसमें काफूर की आमेज़िश होगी ये एक चश्मा है जिसमें से ख़ुदा के (ख़ास) बन्दे पियेंगे
6عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ اللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا
और जहाँ चाहेंगे बहा ले जाएँगे
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-इंसान 4

सूरा अल-इंसान आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार…

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Tuesday, September 29, 2026

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