Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ: हमने उसे रास्ता दिखा दिया, यानी हमने उसे सत्य और असत्य, भलाई और बुराई का ज्ञान दे दिया।
- شَاكِرًا: शुक्रगुज़ार, कृतज्ञ, यानी ईमान लाने वाला और अल्लाह की नेमतों का एहसान मानने वाला।
- كَفُورًا: कृतघ्न, इन्कार करने वाला, यानी अल्लाह की नेमतों को न मानने वाला और कुफ्र करने वाला।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने इंसान को नुत्फ़ा (मिश्रित बूँद) से पैदा किया, जो मर्द और औरत के पानी का मिलाजुला रूप है, और उसे सुनने और देखने की शक्तियाँ दीं, ताकि वह हमारी आयतों को सुने और हमारी निशानियों को देखे। फिर हमने उसे रास्ता दिखा दिया—यानी हमने उसके सामने हिदायत और गुमराही, नेकी और बदी, ईमान और कुफ्र का रास्ता स्पष्ट कर दिया। यह हिदायत अल्लाह के रसूलों और उनकी लाई हुई किताबों के ज़रिए पूरी हो गई, ताकि इंसान के पास कोई बहाना न बचे।
अब इसके बाद इंसान के लिए दो ही रास्ते हैं: या तो वह शुक्रगुज़ार बने—यानी अपने रब की नेमतों को पहचाने, उस पर ईमान लाए, उसकी इबादत करे और उसके हुक्मों पर अमल करे—तो यही उसकी कामयाबी है। या फिर वह कृतघ्न और इन्कारी बने—यानी अल्लाह की नेमतों से मुँह मोड़े, उसकी आयतों को झुठलाए और कुफ्र का रास्ता इख्तियार करे—तो यह उसकी बदबख्ती और तबाही है।
यह आयत इंसान को सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह ने उसे आज़ाद मर्ज़ी दी है और सही रास्ता दिखा दिया है। अब उसे चुनना है—अपनी भलाई के लिए शुक्र का रास्ता या अपनी बरबादी के लिए कुफ्र का रास्ता। अल्लाह ने किसी पर ज़बरदस्ती नहीं की, बल्कि हिदायत का ज़रिया मुकम्मल कर दिया और इंसान को अख़्तियार दिया।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें सही रास्ता दिखाया। अब हमें चाहिए कि हम अपने रब का शुक्र अदा करें, उसकी नेमतों को पहचानें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्मों के मुताबिक ढालें। शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं है, बल्कि अल्लाह की इबादत करना, उसके हुक्मों पर अमल करना और उसकी नेमतों को उसी की राह में खर्च करना है। याद रखिए, जो शुक्रगुज़ार बनता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है, और जो कृतघ्न बनता है, वह अपने हाथों अपनी भलाई खो देता है। अल्लाह हम सबको शुक्रगुज़ार बंदे बनाए। आमीन।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-इंसान
अनुवाद — अल-इंसान 3
सूरा अल-इंसान आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र…सूरा आयत 3/31 — सूरा अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इंसान सुनें, सूरा अल-इंसान अनुवाद, सूरा अल-इंसान mp3, सूरा अल-इंसान pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-इंसान
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


