अल-इंसान · 3/31
अनुवाद उच्चारण — अल-इंसान
إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا ۝٣
Innaa hadainaahus sabeela immaa shaakiranw wa immaa kafoora
📖 हिंदी अर्थ
और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ: हमने उसे रास्ता दिखा दिया, यानी हमने उसे सत्य और असत्य, भलाई और बुराई का ज्ञान दे दिया।
  • شَاكِرًا: शुक्रगुज़ार, कृतज्ञ, यानी ईमान लाने वाला और अल्लाह की नेमतों का एहसान मानने वाला।
  • كَفُورًا: कृतघ्न, इन्कार करने वाला, यानी अल्लाह की नेमतों को न मानने वाला और कुफ्र करने वाला।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने इंसान को नुत्फ़ा (मिश्रित बूँद) से पैदा किया, जो मर्द और औरत के पानी का मिलाजुला रूप है, और उसे सुनने और देखने की शक्तियाँ दीं, ताकि वह हमारी आयतों को सुने और हमारी निशानियों को देखे। फिर हमने उसे रास्ता दिखा दिया—यानी हमने उसके सामने हिदायत और गुमराही, नेकी और बदी, ईमान और कुफ्र का रास्ता स्पष्ट कर दिया। यह हिदायत अल्लाह के रसूलों और उनकी लाई हुई किताबों के ज़रिए पूरी हो गई, ताकि इंसान के पास कोई बहाना न बचे।

अब इसके बाद इंसान के लिए दो ही रास्ते हैं: या तो वह शुक्रगुज़ार बने—यानी अपने रब की नेमतों को पहचाने, उस पर ईमान लाए, उसकी इबादत करे और उसके हुक्मों पर अमल करे—तो यही उसकी कामयाबी है। या फिर वह कृतघ्न और इन्कारी बने—यानी अल्लाह की नेमतों से मुँह मोड़े, उसकी आयतों को झुठलाए और कुफ्र का रास्ता इख्तियार करे—तो यह उसकी बदबख्ती और तबाही है।

यह आयत इंसान को सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह ने उसे आज़ाद मर्ज़ी दी है और सही रास्ता दिखा दिया है। अब उसे चुनना है—अपनी भलाई के लिए शुक्र का रास्ता या अपनी बरबादी के लिए कुफ्र का रास्ता। अल्लाह ने किसी पर ज़बरदस्ती नहीं की, बल्कि हिदायत का ज़रिया मुकम्मल कर दिया और इंसान को अख़्तियार दिया।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है कि उसने हमें सही रास्ता दिखाया। अब हमें चाहिए कि हम अपने रब का शुक्र अदा करें, उसकी नेमतों को पहचानें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्मों के मुताबिक ढालें। शुक्र का मतलब सिर्फ ज़बान से "शुक्र" कहना नहीं है, बल्कि अल्लाह की इबादत करना, उसके हुक्मों पर अमल करना और उसकी नेमतों को उसी की राह में खर्च करना है। याद रखिए, जो शुक्रगुज़ार बनता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है, और जो कृतघ्न बनता है, वह अपने हाथों अपनी भलाई खो देता है। अल्लाह हम सबको शुक्रगुज़ार बंदे बनाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अल-इंसान

1هَلْ أَتَىٰ عَلَى الْإِنسَانِ حِينٌ مِّنَ الدَّهْرِ لَمْ يَكُن شَيْئًا مَّذْكُورًا
बेशक इन्सान पर एक ऐसा वक्त अा चुका है कि वह कोई चीज़ क़ाबिले ज़िक्र न था
2إِنَّا خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن نُّطْفَةٍ أَمْشَاجٍ نَّبْتَلِيهِ فَجَعَلْنَاهُ سَمِيعًا بَصِيرًا
हमने इन्सान को मख़लूत नुत्फे से पैदा किया कि उसे आज़माये तो हमने उसे सुनता देखता बनाया
3إِنَّا هَدَيْنَاهُ السَّبِيلَ إِمَّا شَاكِرًا وَإِمَّا كَفُورًا
और उसको रास्ता भी दिखा दिया (अब वह) ख्वाह शुक्र गुज़ार हो ख्वाह नाशुक्रा
4إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ سَلَاسِلَ وَأَغْلَالًا وَسَعِيرًا
हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है
5إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا
बेशक नेकोकार लोग शराब के वह सागर पियेंगे जिसमें काफूर की आमेज़िश होगी ये एक चश्मा है जिसमें से ख़ुदा के (ख़ास) बन्दे पियेंगे
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
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अनुवाद — अल-इंसान 3

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Tuesday, August 18, 2026

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