Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُسْتَضْعَفُونَ: कमज़ोर समझे जाने वाले, जिन्हें दबाया जाता हो।
- يَتَخَطَّفَكُمُ: अचानक पकड़ लेना, छीन लेना।
- آوَاكُمْ: तुम्हें शरण दी, आश्रय दिया।
- أَيَّدَكُم: तुम्हें शक्ति प्रदान की, मज़बूत किया।
- الطَّيِّبَاتِ: पवित्र और अच्छी चीज़ें (जिनमें ग़नीमत का माल भी शामिल है)।
तफ़सीर:
ऐ ईमानवालों! अल्लाह की उस महान कृपा को याद करो, जब तुम मक्का में बहुत कम संख्या में थे, कमज़ोर और दबे हुए थे। लोग तुम्हें तुच्छ समझते थे और तुम्हें डर रहता था कि कहीं दुश्मन तुम्हें अचानक न पकड़ लें या तुम्हारा सफ़ाया न कर दें। तुम्हारा कोई सहारा नहीं था, न कोई पनाहगाह। उस वक़्त अल्लाह ने अपनी रहमत से तुम्हें मदीना की ओर हिजरत करने का रास्ता दिखाया और वहाँ तुम्हें शरण दी। उसने तुम्हें अंसारों (मदीना के मुसलमानों) की मदद से शक्ति प्रदान की और बद्र के मैदान में फ़रिश्तों के ज़रिए तुम्हारी मदद करके तुम्हें दुश्मनों पर विजय दिलाई। साथ ही, उसने तुम्हें पवित्र और अच्छी चीज़ें खाने को दीं, जिनमें ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाला धन) भी शामिल है, जो तुमसे पहले किसी उम्मत के लिए हलाल नहीं हुई थीं। यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि तुम अल्लाह के इन एहसानों का शुक्र अदा करो, उसकी नेमतों को पहचानो और उसकी इबादत में जुटे रहो। अगर तुम शुक्र करोगे तो अल्लाह तुम्हें और नेमतें देगा, और अगर कृतघ्नता दिखाओगे तो यह नेमतें छीन ली जाएँगी।
फ़ायदे:
- अल्लाह की नेमतों को याद करना ईमान की निशानी है और इससे अल्लाह के प्रति मोहब्बत बढ़ती है।
- मुसीबत और कमज़ोरी के वक़्त में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही हालात बदलने की ताक़त रखता है।
- अल्लाह अपने बंदों को उनकी कमज़ोरी के बावजूद शक्ति और विजय दे सकता है, बशर्ते वे उस पर ईमान रखें और सब्र करें।
- हिजरत (अल्लाह की राह में घर छोड़ना) और कुर्बानी का अंजाम हमेशा बेहतर होता है — अल्लाह उसका बदला दुनिया में भी देता है और आख़िरत में भी।
- शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं और नाशुक्री से नेमतें जाती रहती हैं — यह अल्लाह का सुन्नत (क़ानून) है।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अतीत की मुश्किलों को याद करके अल्लाह का शुक्र करें और उसकी मदद पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह कभी अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता।
📜 आयत 24-28 — सूरा अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 26
सूरा अल-अनफाल आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के)…सूरा आयत 26/75 — सूरा अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनफाल सुनें, सूरा अल-अनफाल अनुवाद, सूरा अल-अनफाल mp3, सूरा अल-अनफाल pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अनफाल
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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