अल-अनफाल · 26/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
وَاذْكُرُوا إِذْ أَنتُمْ قَلِيلٌ مُّسْتَضْعَفُونَ فِي الْأَرْضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ النَّاسُ فَآوَاكُمْ وَأَيَّدَكُم بِنَصْرِهِ وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ ۝٢٦
Wazkurooo iz antum qaleelum mustad `afoona filardi takhaafoona ai yatakhat tafakumun naasu fa aawaakum wa aiyadakum binasrihee wa razaqakum minat taiyibaati la`allakum tashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
(मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُسْتَضْعَفُونَ: कमज़ोर समझे जाने वाले, जिन्हें दबाया जाता हो।
  • يَتَخَطَّفَكُمُ: अचानक पकड़ लेना, छीन लेना।
  • آوَاكُمْ: तुम्हें शरण दी, आश्रय दिया।
  • أَيَّدَكُم: तुम्हें शक्ति प्रदान की, मज़बूत किया।
  • الطَّيِّبَاتِ: पवित्र और अच्छी चीज़ें (जिनमें ग़नीमत का माल भी शामिल है)।

तफ़सीर:

ऐ ईमानवालों! अल्लाह की उस महान कृपा को याद करो, जब तुम मक्का में बहुत कम संख्या में थे, कमज़ोर और दबे हुए थे। लोग तुम्हें तुच्छ समझते थे और तुम्हें डर रहता था कि कहीं दुश्मन तुम्हें अचानक न पकड़ लें या तुम्हारा सफ़ाया न कर दें। तुम्हारा कोई सहारा नहीं था, न कोई पनाहगाह। उस वक़्त अल्लाह ने अपनी रहमत से तुम्हें मदीना की ओर हिजरत करने का रास्ता दिखाया और वहाँ तुम्हें शरण दी। उसने तुम्हें अंसारों (मदीना के मुसलमानों) की मदद से शक्ति प्रदान की और बद्र के मैदान में फ़रिश्तों के ज़रिए तुम्हारी मदद करके तुम्हें दुश्मनों पर विजय दिलाई। साथ ही, उसने तुम्हें पवित्र और अच्छी चीज़ें खाने को दीं, जिनमें ग़नीमत (युद्ध में मिलने वाला धन) भी शामिल है, जो तुमसे पहले किसी उम्मत के लिए हलाल नहीं हुई थीं। यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि तुम अल्लाह के इन एहसानों का शुक्र अदा करो, उसकी नेमतों को पहचानो और उसकी इबादत में जुटे रहो। अगर तुम शुक्र करोगे तो अल्लाह तुम्हें और नेमतें देगा, और अगर कृतघ्नता दिखाओगे तो यह नेमतें छीन ली जाएँगी।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की नेमतों को याद करना ईमान की निशानी है और इससे अल्लाह के प्रति मोहब्बत बढ़ती है।
  2. मुसीबत और कमज़ोरी के वक़्त में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही हालात बदलने की ताक़त रखता है।
  3. अल्लाह अपने बंदों को उनकी कमज़ोरी के बावजूद शक्ति और विजय दे सकता है, बशर्ते वे उस पर ईमान रखें और सब्र करें।
  4. हिजरत (अल्लाह की राह में घर छोड़ना) और कुर्बानी का अंजाम हमेशा बेहतर होता है — अल्लाह उसका बदला दुनिया में भी देता है और आख़िरत में भी।
  5. शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं और नाशुक्री से नेमतें जाती रहती हैं — यह अल्लाह का सुन्नत (क़ानून) है।
  6. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि अतीत की मुश्किलों को याद करके अल्लाह का शुक्र करें और उसकी मदद पर भरोसा रखें, क्योंकि अल्लाह कभी अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता।


📜 आयत 24-28 — सूरा अल-अनफाल

24يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ وَأَنَّهُ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
ऐ ईमानदार जब तुम को हमारा रसूल (मोहम्मद) ऐसे काम के लिए बुलाए जो तुम्हारी रूहानी ज़िन्दगी का बाइस हो तो तुम ख़ुदा और रसूल के हुक्म दिल से कुबूल कर लो और जान लो कि ख़ुदा वह क़ादिर मुतलिक़ है कि आदमी और उसके दिल (इरादे) के दरमियान इस तरह आ जाता है और ये भी समझ लो कि तुम सबके सब उसके सामने हाज़िर किये जाओगे
25وَاتَّقُوا فِتْنَةً لَّا تُصِيبَنَّ الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنكُمْ خَاصَّةً ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
26وَاذْكُرُوا إِذْ أَنتُمْ قَلِيلٌ مُّسْتَضْعَفُونَ فِي الْأَرْضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ النَّاسُ فَآوَاكُمْ وَأَيَّدَكُم بِنَصْرِهِ وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो
27يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَخُونُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ وَتَخُونُوا أَمَانَاتِكُمْ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
ऐ ईमानदारों न तो ख़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख्यानत करो हालॉकि समझते बूझते हो
28وَاعْلَمُوا أَنَّمَا أَمْوَالُكُمْ وَأَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
26आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 26

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Monday, September 28, 2026

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