अल-अनफाल · 27/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَخُونُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ وَتَخُونُوا أَمَانَاتِكُمْ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ ۝٢٧
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa takhoonal laaha war Rasoola wa takhoonooo amaanaatikum wa antum ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों न तो ख़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख्यानत करो हालॉकि समझते बूझते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لا تَخُونُوا: ख़ियानत मत करो, धोखा मत दो।
  • أَمَانَاتِكُمْ: अपनी अमानतें (वे चीज़ें जो तुम्हें सौंपी गई हैं)।
  • وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ: हालाँकि तुम जानते हो (कि ख़ियानत बुरी चीज़ है)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सच्चे दिल से माना और उनके आदेशों पर चलने का वादा किया, अल्लाह और उसके रसूल के साथ ख़ियानत मत करो। इसका अर्थ यह है कि अल्लाह के उन आदेशों को छोड़कर उसके निषेधों (मना की गई चीज़ों) को न अपनाओ, और न ही रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मार्गदर्शन से मुँह मोड़ो।

साथ ही, अपनी अमानतों में भी ख़ियानत न करो। अमानत से मुराद वह सब कुछ है जो अल्लाह ने तुम्हें सौंपा है — चाहे वह दीन (धर्म) के मामले हों, जैसे नमाज़, रोज़ा, ज़कात, या लोगों के आपसी हक़ और माल, या कोई भी वह चीज़ जो तुम्हें सौंपी जाए। यह सब अमानत है और उसे उसके हक़ के अनुसार अदा करना ज़रूरी है।

और यह सब करते हुए तुम जानते हो कि ख़ियानत कितनी बुरी और घृणित चीज़ है। तुम्हें इसकी बुराई का ज्ञान है, फिर भी अगर तुम ऐसा करोगे तो यह और भी गंभीर अपराध होगा। इसलिए जानबूझकर ख़ियानत से बचो।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का तक़ाज़ा सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान लाना नहीं, बल्कि अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों का पालन करना है। जो व्यक्ति अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना करता है, वह गोया अल्लाह से ख़ियानत करता है।
  2. अमानत अदा करना ईमान की निशानी है। चाहे वह अमानत अल्लाह की हो (जैसे इबादतें) या बंदों की (जैसे माल, राज़, या ज़िम्मेदारियाँ), उसे पूरा करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।
  3. जानते हुए भी गलती करना — यानी इल्म के बावजूद ख़ियानत करना — गुनाह को और भी बड़ा बना देता है। इससे पता चलता है कि अल्लाह के सामने सिर्फ़ अमल ही नहीं, बल्कि नीयत और जागरूकता भी मायने रखती है।
  4. यह आयत मुसलमानों को अमानतदारी, ईमानदारी और वफ़ादारी की ओर बुलाती है — ये वो गुण हैं जो समाज में भरोसा और मुहब्बत पैदा करते हैं और जिनसे इस्लामी समाज मज़बूत होता है।
  5. इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह और रसूल के साथ वफ़ादारी का मतलब सिर्फ़ ज़ुबानी इक़रार नहीं, बल्कि हर उस काम से बचना है जो अल्लाह को नापसंद है — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।


📜 आयत 25-29 — सूरा अल-अनफाल

25وَاتَّقُوا فِتْنَةً لَّا تُصِيبَنَّ الَّذِينَ ظَلَمُوا مِنكُمْ خَاصَّةً ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
और उस फितने से डरते रहो जो ख़ास उन्हीं लोगों पर नही पड़ेगा जिन्होने तुम में से ज़ुल्म किया (बल्कि तुम सबके सब उसमें पड़ जाओगे) और यक़ीन मानों कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
26وَاذْكُرُوا إِذْ أَنتُمْ قَلِيلٌ مُّسْتَضْعَفُونَ فِي الْأَرْضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ النَّاسُ فَآوَاكُمْ وَأَيَّدَكُم بِنَصْرِهِ وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो
27يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَخُونُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ وَتَخُونُوا أَمَانَاتِكُمْ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
ऐ ईमानदारों न तो ख़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख्यानत करो हालॉकि समझते बूझते हो
28وَاعْلَمُوا أَنَّمَا أَمْوَالُكُمْ وَأَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تَتَّقُوا اللَّهَ يَجْعَل لَّكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
और यक़ीनन ख़ुदा के हॉ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख्श देगा और ख़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम) है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 27

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Monday, September 28, 2026

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