अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لا تَخُونُوا: ख़ियानत मत करो, धोखा मत दो।
- أَمَانَاتِكُمْ: अपनी अमानतें (वे चीज़ें जो तुम्हें सौंपी गई हैं)।
- وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ: हालाँकि तुम जानते हो (कि ख़ियानत बुरी चीज़ है)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सच्चे दिल से माना और उनके आदेशों पर चलने का वादा किया, अल्लाह और उसके रसूल के साथ ख़ियानत मत करो। इसका अर्थ यह है कि अल्लाह के उन आदेशों को छोड़कर उसके निषेधों (मना की गई चीज़ों) को न अपनाओ, और न ही रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मार्गदर्शन से मुँह मोड़ो।
साथ ही, अपनी अमानतों में भी ख़ियानत न करो। अमानत से मुराद वह सब कुछ है जो अल्लाह ने तुम्हें सौंपा है — चाहे वह दीन (धर्म) के मामले हों, जैसे नमाज़, रोज़ा, ज़कात, या लोगों के आपसी हक़ और माल, या कोई भी वह चीज़ जो तुम्हें सौंपी जाए। यह सब अमानत है और उसे उसके हक़ के अनुसार अदा करना ज़रूरी है।
और यह सब करते हुए तुम जानते हो कि ख़ियानत कितनी बुरी और घृणित चीज़ है। तुम्हें इसकी बुराई का ज्ञान है, फिर भी अगर तुम ऐसा करोगे तो यह और भी गंभीर अपराध होगा। इसलिए जानबूझकर ख़ियानत से बचो।
फ़ायदे (सीख):
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान का तक़ाज़ा सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान लाना नहीं, बल्कि अल्लाह और उसके रसूल के आदेशों का पालन करना है। जो व्यक्ति अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना करता है, वह गोया अल्लाह से ख़ियानत करता है।
- अमानत अदा करना ईमान की निशानी है। चाहे वह अमानत अल्लाह की हो (जैसे इबादतें) या बंदों की (जैसे माल, राज़, या ज़िम्मेदारियाँ), उसे पूरा करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।
- जानते हुए भी गलती करना — यानी इल्म के बावजूद ख़ियानत करना — गुनाह को और भी बड़ा बना देता है। इससे पता चलता है कि अल्लाह के सामने सिर्फ़ अमल ही नहीं, बल्कि नीयत और जागरूकता भी मायने रखती है।
- यह आयत मुसलमानों को अमानतदारी, ईमानदारी और वफ़ादारी की ओर बुलाती है — ये वो गुण हैं जो समाज में भरोसा और मुहब्बत पैदा करते हैं और जिनसे इस्लामी समाज मज़बूत होता है।
- इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह और रसूल के साथ वफ़ादारी का मतलब सिर्फ़ ज़ुबानी इक़रार नहीं, बल्कि हर उस काम से बचना है जो अल्लाह को नापसंद है — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 25-29 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 27
सूरा अल-अनफाल आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों न तो ख़ुदा और रसूल की (अमानत में)…सूरा आयत 27/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








