अल-अनफाल · 29/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تَتَّقُوا اللَّهَ يَجْعَل لَّكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ ۝٢٩
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo in tattaqul laaha yaj`al lakum furqaananw wa yukaffir `ankum saiyi aatikum wa yaghfir lakum; wallaahu zul fadlil `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और यक़ीनन ख़ुदा के हॉ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख्श देगा और ख़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम) है

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अनुवाद — Tafsir

कठिन शब्दों के अर्थ:

  • فُرْقَانًا: निर्णय करने की शक्ति, सत्य और असत्य में अंतर करने की क्षमता, या सहायता और विजय।
  • يُكَفِّرْ: मिटा देना, ढक देना (पापों को)।
  • سَيِّئَاتِكُمْ: तुम्हारे बुरे कर्म, पाप।
  • ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ: महान उदारता और कृपा का स्वामी।

आयत की व्याख्या:

हे ईमानवालों! अल्लाह पर सच्चा विश्वास रखने वालों! यदि तुम अल्लाह का भय रखो—अर्थात उसके आदेशों का पालन करो और उसके निषेधों से बचो—तो अल्लाह तुम्हें एक ऐसा निर्णय-शक्ति (फुरकान) प्रदान करेगा जिससे तुम सत्य और असत्य के बीच स्पष्ट अंतर कर सकोगे। यह एक ऐसा प्रकाश और समझ होगी जो तुम्हें भ्रम और संदेह से बचाएगी, और संकट के समय सही निर्णय लेने में मदद करेगी। यही नहीं, वह तुम्हारे पिछले पापों को भी मिटा देगा और उन्हें ढक देगा, ताकि उनकी सज़ा तुम्हें न भुगतनी पड़े। साथ ही, वह तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा और तुम्हें अपनी दया और कृपा से नवाज़ेगा। यह सब अल्लाह की ओर से एक महान उपकार और अनुग्रह है, क्योंकि अल्लाह ही असीम उदारता और महान कृपा का स्वामी है। उसकी देन और उसका इनाम उसके भय रखने वाले बंदों के लिए बहुत बड़ा है, जिसमें स्वर्ग का शाश्वत सुख भी शामिल है।


आयत से लाभ:

  1. तक़वा (अल्लाह का भय) ही सफलता की कुंजी है: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह का भय रखना—अर्थात उसकी आज्ञाओं का पालन और उसकी मनाही से बचना—वह मार्ग है जो व्यक्ति को हर भ्रम से बचाता है और सही निर्णय की शक्ति देता है। जो व्यक्ति अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसे हर मुश्किल से निकलने का रास्ता दिखाता है।
  2. पापों की क्षमा की खुशखबरी: यह आयत मुसलमानों को आशा देती है कि यदि वे ईमान के साथ तक़वा अपनाएँ, तो अल्लाह उनके पिछले पापों को माफ कर देगा और उनकी बुराइयों को अच्छाइयों में बदल देगा। यह अल्लाह की रहमत का बड़ा प्रमाण है।
  3. अल्लाह की असीम उदारता: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की कृपा और उदारता की कोई सीमा नहीं है। वह अपने बंदों को उनकी कमज़ोरियों के बावजूद अपनी दया से नवाज़ता है। यह हमें अल्लाह से प्रेम करना और उसकी ओर रुजू करना सिखाता है।
  4. सत्य और असत्य में अंतर करने की शक्ति: यह आयत बताती है कि तक़वा अपनाने से व्यक्ति को एक विशेष समझ और बुद्धि मिलती है जिससे वह जीवन के हर मामले में सही और गलत में अंतर कर सकता है। यह ईमानवालों के लिए सबसे बड़ा उपहार है।
  5. ईमान और अमल का संबंध: यह आयत सिखाती है कि ईमान केवल दिल में विश्वास का नाम नहीं, बल्कि उसका प्रमाण अच्छे कर्म और अल्लाह की आज्ञाकारिता है। जो ईमान लाए और तक़वा अपनाए, उसी के लिए ये वादे हैं।


📜 आयत 27-31 — अल-अनफाल

27يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَخُونُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ وَتَخُونُوا أَمَانَاتِكُمْ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
ऐ ईमानदारों न तो ख़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख्यानत करो हालॉकि समझते बूझते हो
28وَاعْلَمُوا أَنَّمَا أَمْوَالُكُمْ وَأَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تَتَّقُوا اللَّهَ يَجْعَل لَّكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
और यक़ीनन ख़ुदा के हॉ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख्श देगा और ख़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम) है
30وَإِذْ يَمْكُرُ بِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِيُثْبِتُوكَ أَوْ يَقْتُلُوكَ أَوْ يُخْرِجُوكَ ۚ وَيَمْكُرُونَ وَيَمْكُرُ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब कुफ्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से) निकाल बाहर करे वह तो ये तदबीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़ुदा भी (उनके ख़िलाफ) तदबीरकर रहा था
31وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا قَالُوا قَدْ سَمِعْنَا لَوْ نَشَاءُ لَقُلْنَا مِثْلَ هَٰذَا ۙ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और ख़ुदा तो सब तदबीरकरने वालों से बेहतर है और जब उनके सामने हमारी आयते पढ़ी जाती हैं तो बोल उठते हैं कि हमने सुना तो लेकिन अगर हम चाहें तो यक़ीनन ऐसा ही (क़रार) हम भी कह सकते हैं-तो बस अगलों के क़िस्से है
अल-अनफालकुरान सूची
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29आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 29

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Tuesday, August 18, 2026

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