अल-अनफाल · 30/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
وَإِذْ يَمْكُرُ بِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِيُثْبِتُوكَ أَوْ يَقْتُلُوكَ أَوْ يُخْرِجُوكَ ۚ وَيَمْكُرُونَ وَيَمْكُرُ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ ۝٣٠
Wa iz yamkuru bikal lazeena kafaroo liyusbitooka aw yaqtulooka aw yukhrijook; wa yamkuroona wa yamkurul laahu wallaahu khairul maakireen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब कुफ्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से) निकाल बाहर करे वह तो ये तदबीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़ुदा भी (उनके ख़िलाफ) तदबीरकर रहा था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمْكُرُ: चाल चलना, गुप्त योजना बनाना, धोखा देना।
  • لِيُثْبِتُوكَ: तुम्हें कैद कर लें या किसी स्थान पर रोक दें।
  • أَوْ يُخْرِجُوكَ: तुम्हें अपने वतन (मक्का) से निकाल दें।
  • خَيْرُ الْمَاكِرِينَ: सबसे बेहतरीन चाल चलने वाला (अल्लाह)।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस समय को याद करो जब मक्का के काफिरों ने तुम्हारे खिलाफ साजिश रची थी। यह वह समय था जब अल्लाह ने तुम्हें मदीना हिजरत (प्रवास) का आदेश दिया था। कुरैश के बड़े-बड़े सरदार "दारुन नदवा" (उनकी सभा-स्थली) में इकट्ठा हुए और उन्होंने तीन प्रस्ताव रखे: पहला, तुम्हें कैद कर लिया जाए और एक घर में बंद कर दिया जाए; दूसरा, तुम्हें तलवारों से कत्ल कर दिया जाए; तीसरा, तुम्हें मक्का से निकाल बाहर किया जाए। वे चाहते थे कि किसी भी तरह इस्लाम के दावत को खत्म कर दें और तुम्हारा काम तमाम कर दें।

लेकिन अल्लाह ने उनकी सारी साजिशों को नाकाम कर दिया। वे चालें चल रहे थे, और अल्लाह भी अपनी चाल चल रहा था—यानी उनकी साजिशों का जवाब दे रहा था। अल्लाह ने जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के जरिए तुम्हें उनकी योजना से आगाह किया और तुम्हें मदीना हिजरत करने का हुक्म दिया। उसी रात अल्लाह ने तुम्हें उनके घर से निकाल लिया, जबकि वे तुम्हारे बिस्तर पर सोए हुए अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) को देखकर यह समझे कि तुम अभी भी वहीं हो। इस तरह अल्लाह ने उनकी सारी चालों को उन्हीं पर उलट दिया। अल्लाह सबसे अच्छा चाल चलने वाला है, क्योंकि उसकी चाल न्याय और हिकमत पर आधारित होती है, जबकि काफिरों की चालें झूठ और जुल्म पर।


फायदे (सबक):

  1. अल्लाह पर भरोसा: यह आयत सिखाती है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसकी तरफ से हर साजिश को नाकाम कर देता है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अकेले थे, लेकिन अल्लाह की मदद से दुश्मनों की पूरी ताकत बेकार हो गई।
  2. सब्र और हिकमत: मुसीबत के वक्त घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह की तरफ से आने वाले हल का इंतजार करना चाहिए। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हिजरत के वक्त पूरी हिकमत से काम लिया और अल्लाह ने उन्हें कामयाबी दी।
  3. अल्लाह की चाल सबसे बेहतर: इंसान चाहे कितनी भी बड़ी साजिश रच ले, अल्लाह की योजना उससे कहीं बेहतर और मजबूत होती है। अल्लाह की चाल में इंसान की भलाई होती है, जबकि इंसान की चाल में अक्सर बुराई और तबाही होती है।
  4. दुश्मनों से न डरें: मुसलमान को चाहिए कि वह दुश्मनों की ताकत और साजिशों से न डरे, बल्कि अल्लाह की मदद पर यकीन रखे। यह आयत मुसलमानों को हिम्मत और हौसला देती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफाजत करता है।
  5. इस्लाम की तरफ रहबर: यह किस्सा बताता है कि इस्लाम की तरक्की इंसानी ताकत से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से हुई है। इसलिए मुसलमानों को अल्लाह की राह पर चलते रहना चाहिए, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिशें करें।


📜 आयत 28-32 — अल-अनफाल

28وَاعْلَمُوا أَنَّمَا أَمْوَالُكُمْ وَأَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تَتَّقُوا اللَّهَ يَجْعَل لَّكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
और यक़ीनन ख़ुदा के हॉ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख्श देगा और ख़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम) है
30وَإِذْ يَمْكُرُ بِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِيُثْبِتُوكَ أَوْ يَقْتُلُوكَ أَوْ يُخْرِجُوكَ ۚ وَيَمْكُرُونَ وَيَمْكُرُ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब कुफ्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से) निकाल बाहर करे वह तो ये तदबीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़ुदा भी (उनके ख़िलाफ) तदबीरकर रहा था
31وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا قَالُوا قَدْ سَمِعْنَا لَوْ نَشَاءُ لَقُلْنَا مِثْلَ هَٰذَا ۙ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
और ख़ुदा तो सब तदबीरकरने वालों से बेहतर है और जब उनके सामने हमारी आयते पढ़ी जाती हैं तो बोल उठते हैं कि हमने सुना तो लेकिन अगर हम चाहें तो यक़ीनन ऐसा ही (क़रार) हम भी कह सकते हैं-तो बस अगलों के क़िस्से है
32وَإِذْ قَالُوا اللَّهُمَّ إِن كَانَ هَٰذَا هُوَ الْحَقَّ مِنْ عِندِكَ فَأَمْطِرْ عَلَيْنَا حِجَارَةً مِّنَ السَّمَاءِ أَوِ ائْتِنَا بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब उन काफिरों ने दुआएँ माँगीं थी कि ख़ुदा (वन्द) अगर ये (दीन इस्लाम) हक़ है और तेरे पास से (आया है) तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा या हम पर कोई और दर्दनाक अज़ाब ही नाज़िल फरमा
अल-अनफालकुरान सूची
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30आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 30

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Tuesday, August 18, 2026

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