अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمْكُرُ: चाल चलना, गुप्त योजना बनाना, धोखा देना।
- لِيُثْبِتُوكَ: तुम्हें कैद कर लें या किसी स्थान पर रोक दें।
- أَوْ يُخْرِجُوكَ: तुम्हें अपने वतन (मक्का) से निकाल दें।
- خَيْرُ الْمَاكِرِينَ: सबसे बेहतरीन चाल चलने वाला (अल्लाह)।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब मक्का के काफिरों ने तुम्हारे खिलाफ साजिश रची थी। यह वह समय था जब अल्लाह ने तुम्हें मदीना हिजरत (प्रवास) का आदेश दिया था। कुरैश के बड़े-बड़े सरदार "दारुन नदवा" (उनकी सभा-स्थली) में इकट्ठा हुए और उन्होंने तीन प्रस्ताव रखे: पहला, तुम्हें कैद कर लिया जाए और एक घर में बंद कर दिया जाए; दूसरा, तुम्हें तलवारों से कत्ल कर दिया जाए; तीसरा, तुम्हें मक्का से निकाल बाहर किया जाए। वे चाहते थे कि किसी भी तरह इस्लाम के दावत को खत्म कर दें और तुम्हारा काम तमाम कर दें।
लेकिन अल्लाह ने उनकी सारी साजिशों को नाकाम कर दिया। वे चालें चल रहे थे, और अल्लाह भी अपनी चाल चल रहा था—यानी उनकी साजिशों का जवाब दे रहा था। अल्लाह ने जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के जरिए तुम्हें उनकी योजना से आगाह किया और तुम्हें मदीना हिजरत करने का हुक्म दिया। उसी रात अल्लाह ने तुम्हें उनके घर से निकाल लिया, जबकि वे तुम्हारे बिस्तर पर सोए हुए अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) को देखकर यह समझे कि तुम अभी भी वहीं हो। इस तरह अल्लाह ने उनकी सारी चालों को उन्हीं पर उलट दिया। अल्लाह सबसे अच्छा चाल चलने वाला है, क्योंकि उसकी चाल न्याय और हिकमत पर आधारित होती है, जबकि काफिरों की चालें झूठ और जुल्म पर।
फायदे (सबक):
- अल्लाह पर भरोसा: यह आयत सिखाती है कि जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसकी तरफ से हर साजिश को नाकाम कर देता है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अकेले थे, लेकिन अल्लाह की मदद से दुश्मनों की पूरी ताकत बेकार हो गई।
- सब्र और हिकमत: मुसीबत के वक्त घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह की तरफ से आने वाले हल का इंतजार करना चाहिए। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हिजरत के वक्त पूरी हिकमत से काम लिया और अल्लाह ने उन्हें कामयाबी दी।
- अल्लाह की चाल सबसे बेहतर: इंसान चाहे कितनी भी बड़ी साजिश रच ले, अल्लाह की योजना उससे कहीं बेहतर और मजबूत होती है। अल्लाह की चाल में इंसान की भलाई होती है, जबकि इंसान की चाल में अक्सर बुराई और तबाही होती है।
- दुश्मनों से न डरें: मुसलमान को चाहिए कि वह दुश्मनों की ताकत और साजिशों से न डरे, बल्कि अल्लाह की मदद पर यकीन रखे। यह आयत मुसलमानों को हिम्मत और हौसला देती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफाजत करता है।
- इस्लाम की तरफ रहबर: यह किस्सा बताता है कि इस्लाम की तरक्की इंसानी ताकत से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से हुई है। इसलिए मुसलमानों को अल्लाह की राह पर चलते रहना चाहिए, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिशें करें।
📜 आयत 28-32 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 30
सूरा अल-अनफाल आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब कुफ्फ़ार तुम…सूरा आयत 30/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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