अल-अनफाल · 28/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
وَاعْلَمُوا أَنَّمَا أَمْوَالُكُمْ وَأَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ ۝٢٨
Wa`lamooo annamaaa amwaalukum wa awlaadukum fitnatunw wa annal laaha `indahooo ajrun azeem
📖 हिंदी अर्थ
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِتْنَةٌ (फ़ित्ना): परीक्षा, आज़माइश, वह चीज़ जो इंसान को गुनाह में डालने का सबब बने।
  • أَجْرٌ عَظِيمٌ (अजरुन अज़ीम): बहुत बड़ा बदला और इनाम।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! यह अच्छी तरह जान लो कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद — जो अल्लाह ने तुम्हें दिए हैं — दरअसल तुम्हारे लिए एक परीक्षा हैं। अल्लाह तआला इनके ज़रिए तुम्हें आज़माता है कि तुम इनमें मशगूल होकर उसकी इबादत और उसके हुक्म से ग़ाफ़िल तो नहीं हो जाते? क्या तुम इन्हें अपना असली सरमाया समझ बैठते हो, या इन्हें सिर्फ़ अल्लाह की अमानत समझकर उसी की राह में खर्च करते हो? यह माल और औलाद कभी तुम्हें आख़िरत के काम से रोक देते हैं, कभी तुम्हें ख़ियानत (बेईमानी) पर उभारते हैं, और कभी तुम्हारे दिल में दुनिया की मुहब्बत पैदा करके तुम्हें अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ ले जाते हैं। इसलिए इन चीज़ों से धोखा न खाओ। और यह भी जान लो कि अल्लाह के पास तुम्हारे लिए बहुत बड़ा अज्र और बेहतरीन बदला मौजूद है — उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं, उसकी रज़ा को माल और औलाद पर तरजीह देते हैं, और उसकी इताअत (आज्ञा) को अपनी ज़िंदगी का निज़ाम बनाते हैं। तो अगर तुम दुनिया की इन चीज़ों की खातिर आख़िरत को खो दोगे, तो यह सबसे बड़ा नुक़सान होगा।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. माल और औलाद अल्लाह की तरफ से एक इम्तिहान हैं, न कि हमारी अपनी कमाई का नतीजा — इसलिए इन पर घमंड नहीं करना चाहिए।
  2. इंसान को चाहिए कि वह माल और औलाद की मुहब्बत को अपने दिल में अल्लाह की मुहब्बत से ऊपर न रखे।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रज़ा और उसका इनाम हर दुनियावी चीज़ से बड़ा और बेहतर है।
  4. जो इंसान अल्लाह की खातिर दुनिया की चीज़ें क़ुर्बान कर देता है, अल्लाह उसे दुनिया में भी भलाई देता है और आख़िरत में भी बड़ा अज्र अता फ़रमाता है।
  5. यह आयत मुसलमान को बेईमानी और ख़ियानत से बचाती है, क्योंकि माल और औलाद की खातिर ख़ियानत करना सबसे बड़ी नाकामी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अल-अनफाल

26وَاذْكُرُوا إِذْ أَنتُمْ قَلِيلٌ مُّسْتَضْعَفُونَ فِي الْأَرْضِ تَخَافُونَ أَن يَتَخَطَّفَكُمُ النَّاسُ فَآوَاكُمْ وَأَيَّدَكُم بِنَصْرِهِ وَرَزَقَكُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
(मुसलमानों वह वक्त याद करो) जब तुम सर ज़मीन (मक्के) में बहुत कम और बिल्कुल बेबस थे उससे सहमे जाते थे कि कहीं लोग तुमको उचक न ले जाए तो ख़ुदा ने तुमको (मदीने में) पनाह दी और ख़ास अपनी मदद से तुम्हारी ताईद की और तुम्हे पाक व पाकीज़ा चीज़े खाने को दी ताकि तुम शुक्र गुज़ारी करो
27يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَخُونُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ وَتَخُونُوا أَمَانَاتِكُمْ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
ऐ ईमानदारों न तो ख़ुदा और रसूल की (अमानत में) ख्यानत करो और न अपनी अमानतों में ख्यानत करो हालॉकि समझते बूझते हो
28وَاعْلَمُوا أَنَّمَا أَمْوَالُكُمْ وَأَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌ وَأَنَّ اللَّهَ عِندَهُ أَجْرٌ عَظِيمٌ
और यक़ीन जानों कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद तुम्हारी आज़माइश (इम्तेहान) की चीज़े हैं कि जो उनकी मोहब्बत में भी ख़ुदा को न भूले और वह दीनदार है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِن تَتَّقُوا اللَّهَ يَجْعَل لَّكُمْ فُرْقَانًا وَيُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۗ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
और यक़ीनन ख़ुदा के हॉ बड़ी मज़दूरी है ऐ ईमानदारों अगर तुम ख़ुदा से डरते रहोगे तो वह तुम्हारे वास्ते इम्तियाज़ पैदा करे देगा और तुम्हारी तरफ से तुम्हारे गुनाह का कफ्फ़ारा क़रार देगा और तुम्हें बख्श देगा और ख़ुदा बड़ा साहब फज़ल (व करम) है
30وَإِذْ يَمْكُرُ بِكَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِيُثْبِتُوكَ أَوْ يَقْتُلُوكَ أَوْ يُخْرِجُوكَ ۚ وَيَمْكُرُونَ وَيَمْكُرُ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब कुफ्फ़ार तुम से फरेब कर रहे थे ताकि तुमको क़ैद कर लें या तुमको मार डाले तुम्हें (घर से) निकाल बाहर करे वह तो ये तदबीर (चालाकी) कर रहे थे और ख़ुदा भी (उनके ख़िलाफ) तदबीरकर रहा था
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अनुवाद — अल-अनफाल 28

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Tuesday, August 18, 2026

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