अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آووا: शरण दी, आश्रय दिया (अन-सार ने मुहाजिरों को)।
- نَصَرُوا: सहायता की, मदद की (धन, जान और समर्थन से)।
- حَقًّا: सच्चा, पूर्ण, वास्तविक (ईमान जो खालिस और सच्चा हो)।
- رِزْقٌ كَرِيمٌ: सम्मानित और उदार आजीविका, जो जन्नत का भोजन है, जिसमें कोई तकलीफ़ या एहसान नहीं होता।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों का वर्णन करती है जो अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर ईमान लाए, और ईमान के तकाज़े को पूरा करते हुए अपने घर-बार और वतन को छोड़कर हिजरत की — ताकि वे अपने दीन की इबादत आज़ादी से कर सकें और अल्लाह के दीन को बुलंद कर सकें। उन्होंने अल्लाह की राह में जिहाद किया, यानी अपनी जान, माल और वक़्त को अल्लाह के रास्ते में खर्च किया। साथ ही, उन लोगों (अन-सार) का ज़िक्र है जिन्होंने इन मुहाजिरों को अपने घरों में पनाह दी, उन्हें अपने माल में से हिस्सा दिया, और हर मोर्चे पर उनकी मदद की — चाहे वह माली हो या जानी।
अल्लाह फ़रमाता है कि यही लोग सच्चे और पूर्ण ईमान वाले हैं। उनका ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी दावा नहीं, बल्कि उन्होंने अपने अमल से उसे साबित किया — हिजरत, जिहाद, ईसार (दूसरों को अपने ऊपर तरजीह देना) और नुसरत (मदद) के ज़रिए। उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से दो चीज़ें हैं: मग़फिरत — यानी उनके सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे, और करीम रिज़्क़ — यानी जन्नत की वह नेमतें जो बेहद सम्मानित, पाक और लाज़वार हैं, जिनमें कोई कमी, कोई तकलीफ़ या कोई एहसान नहीं होगा। यह रिज़्क़ उन्हें हमेशा के लिए मिलेगा और कभी ख़त्म नहीं होगा।
फ़ायदे (सबक़):
- ईमान का सच्चा दावा अमल से साबित होता है — सिर्फ़ ज़ुबान से "मैं मुसलमान हूँ" कहना काफ़ी नहीं, बल्कि अल्लाह की राह में कुर्बानी (हिजरत, जिहाद, मदद) ही ईमान को हक़ीक़ी बनाती है।
- भाईचारे और ईसार की तालीम — अन-सार ने मुहाजिरों को अपने घरों में जगह दी और अपने माल में से हिस्सा दिया। यह इस्लाम का वह सुनहरी नमूना है जो हमें सिखाता है कि दूसरों की मदद करना, उन्हें पनाह देना और उनके लिए कुर्बानी देना ईमान का हिस्सा है।
- अल्लाह का वादा — जो लोग अल्लाह की राह में अपना घर-बार छोड़ते हैं और दूसरों की मदद करते हैं, अल्लाह उन्हें दो चीज़ें देता है: गुनाहों से पाकी (मग़फिरत) और बेहतरीन इनाम (जन्नत) — यह वादा क़ुरआन में साफ़ है, इसलिए हमें अपने अमल में इन सिफ़ात को अपनाना चाहिए।
- जन्नत की रिज़्क़ की अज़मत — दुनिया की रिज़्क़ में मेहनत, तकलीफ़ और एहसान होता है, लेकिन जन्नत की रिज़्क़ "करीम" है — यानी बेहद सम्मानित, ख़ालिस और हमेशा रहने वाली। यह हमें दुनिया की चीज़ों से बेरग़बती और आख़िरत की तरफ़ रग़बत पैदा करती है।
- मुहाजिर और अन-सार की फ़ज़ीलत — यह आयत हमें सिखाती है कि इस उम्मत के पहले लोगों ने अपने ईमान को अमल से साबित किया, और हमें उनके नक़्शे-क़दम पर चलना चाहिए — अपने वतन, माल और आराम को अल्लाह की राह में कुर्बान करने का जज़्बा रखना चाहिए।
📜 आयत 72-75 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 74
सूरा अल-अनफाल आयत 74 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और हिजरत की…सूरा आयत 74/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 72–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








