अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِن بَعْدُ: पहले के मुहाजिरों और अन्सारों के बाद।
- هَاجَرُوا: अपने वतन और कुफ़्र के घर को छोड़कर इस्लाम के घर की ओर हिजरत की।
- جَاهَدُوا: अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया, ताकि अल्लाह का कलमा बुलंद हो।
- أُولُو الْأَرْحَامِ: रिश्तेदार, क़राबतदार।
- أَوْلَى بِبَعْضٍ: एक दूसरे के अधिक हक़दार हैं।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग पहले के मुहाजिरों और अन्सारों के बाद ईमान लाए, और हिजरत की तथा तुम्हारे साथ मिलकर अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया, तो ऐ मोमिनों! वे भी तुम्हीं में से हैं। उनके लिए वही हक़ हैं जो तुम्हारे लिए हैं, और उन पर वही फ़र्ज़ हैं जो तुम पर हैं। यह अल्लाह का फ़ज़ल है कि उसने बाद में आने वालों को भी पहले वालों के साथ शामिल कर दिया।
फिर अल्लाह तआला ने एक अहम हुक्म बयान किया कि रिश्तेदार (ज़ाती क़राबत वाले) एक दूसरे के अधिक हक़दार हैं — अल्लाह की किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में लिखे हुए हुक्म के अनुसार — मीरास (विरासत) के मामले में। यानी पहले इस्लाम के शुरुआती दौर में मुहाजिरों और अन्सारों के बीच भाईचारे की बुनियाद पर एक दूसरे के वारिस बनने का सिलसिला था, लेकिन यह हुक्म मंसूख़ (रद्द) कर दिया गया और मीरास अब सिर्फ़ रिश्तेदारी और नस्ल की बुनियाद पर है। जो पहले हल्फ़ (मु'आहिदा) या भाईचारे की वजह से वारिस बनते थे, वह अब ख़त्म कर दिया गया।
अल्लाह तआला हर चीज़ से बाख़बर है। वह जानता है कि उसके बंदों के लिए क्या बेहतर है, इसलिए उसने मीरास का क़ानून रिश्तेदारी की बुनियाद पर रखा, जो इंसानी फ़ितरत के अनुकूल और इंसाफ़ पर आधारित है।
फ़ायदे:
- इस्लाम में भाईचारा और बराबरी: यह आयत सिखाती है कि इस्लाम में ईमान, हिजरत और जिहाद की बुनियाद पर लोग एक दूसरे से जुड़ते हैं। चाहे कोई बाद में ईमान लाए, उसे भी वही इज़्ज़त और हक़ हासिल है जो पहले वालों को है। इससे मुसलमानों के दिलों में आपसी मुहब्बत और भाईचारा पैदा होता है।
- रिश्तेदारी का एहतिराम: अल्लाह ने मीरास को रिश्तेदारी से जोड़ा, जिससे पता चलता है कि इस्लाम में ख़ून के रिश्तों की कितनी अहमियत है। यह लोगों को अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छा सुलूक करने और उनके हक़ अदा करने की तरग़ीब देता है।
- अल्लाह की हिकमत पर भरोसा: अल्लाह हर चीज़ से बाख़बर है और वही जानता है कि बंदों के लिए क्या बेहतर है। जब हम यह समझ लें कि अल्लाह के हर हुक्म में हिकमत है, तो हमारा दिल उसके फ़ैसलों पर राज़ी हो जाता है और हमें सुकून मिलता है।
- तरक़्क़ी का रास्ता: यह आयत बताती है कि जो लोग बाद में भी ईमान लाकर हिजरत और जिहाद करें, वे पहले वालों के साथ शामिल हो जाते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है जो देर से ईमान लाए हों — अल्लाह का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला है, बशर्ते वह सच्चे दिल से ईमान लाए और अच्छे काम करे।
📜 आयत 73-75 — अल-अनफाल
अनुवाद — अल-अनफाल 75
सूरा अल-अनफाल आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने (सुलह हुदैबिया के) बाद ईमान क़ुबूल…सूरा आयत 75/75 — अल-अनफाल الأنفال (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनफाल सुनें, अल-अनफाल अनुवाद, अल-अनफाल mp3, अल-अनफाल pdf. आयत 73–75. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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