अल-इनशिक़ाक · 18/25
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इनशिक़ाक
وَالْقَمَرِ إِذَا اتَّسَقَ ۝١٨
Walqamari izat tasaq
📖 हिंदी अर्थ
और चाँद की जब पूरा हो जाए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّسَقَ: अर्थात पूर्ण होना, इकट्ठा होना, और अपनी रोशनी में पूर्णता को पहुँचना। जब चाँद पूर्णिमा की रात में भरा हुआ और गोल हो जाता है, उसे "اتساق" कहते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में चाँद की क़सम खाई है जब वह पूर्ण हो जाता है, यानी जब वह चौदहवीं रात को पूर्णिमा का चाँद बनकर अपनी रोशनी से पूरी दुनिया को रोशन कर देता है। यह वह समय होता है जब चाँद अपनी सबसे बड़ी और सबसे खूबसूरत हालत में होता है। यह क़सम उस महान शक्ति की ओर इशारा करती है जो चाँद को हर महीने अलग-अलग अवस्थाओं से गुज़ारती है — पहले छोटा सा टुकड़ा, फिर धीरे-धीरे बढ़ता हुआ, और आखिर में पूर्ण और भरा हुआ। यह बदलाव और यह नियमितता किसी और की नहीं, बल्कि अल्लाह की कुदरत (शक्ति) का नमूना है।

इस क़सम के बाद अगली आयत में अल्लाह फ़रमाता है कि "तुम लोगों को एक के बाद एक कई अवस्थाओं से गुज़रना है" — यानी जिस तरह चाँद अपनी मंज़िलें तय करता है, उसी तरह इंसान भी अलग-अलग मरहलों से गुज़रता है: नुत्फ़ा (बूंद) से, फिर जमे हुए खून से, फिर गोश्त के टुकड़े से, फिर जान डालने के बाद, फिर मौत, फिर क़ब्र का जीवन, और आखिर में क़यामत के दिन दोबारा उठना। यह सब कुछ अल्लाह की ताक़त से होता है, और यही वह सच्चाई है जिसे हर इंसान को समझना और मानना चाहिए।

दावत और नसीहत (उपदेश):

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जिस तरह चाँद हर महीने अपनी पूर्णता तक पहुँचता है, उसी तरह इंसान को भी अपने ईमान और अच्छे कामों में तरक़्क़ी करनी चाहिए और अपनी रूहानी (आध्यात्मिक) मंज़िलों की तरफ बढ़ना चाहिए। चाँद का पूर्ण होना हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की कुदरत के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं है — वही चाँद को बनाता है, वही उसे पूर्ण करता है, और वही इंसान को मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा। यह क़सम हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी को समझदारी से गुज़ारें, अल्लाह की इबादत करें, और उस दिन के लिए तैयार रहें जब हम अपने कर्मों का हिसाब देंगे। याद रखिए, जिस रब ने चाँद को इतनी खूबसूरती से बनाया और उसे पूर्णता दी, वही रब हमें भी सही रास्ता दिखाने पर पूर्णता और कामयाबी अता कर सकता है।



📜 आयत 16-20 — सूरा अल-इनशिक़ाक

16فَلَا أُقْسِمُ بِالشَّفَقِ
तो मुझे शाम की मुर्ख़ी की क़सम
17وَاللَّيْلِ وَمَا وَسَقَ
और रात की और उन चीज़ों की जिन्हें ये ढाँक लेती है
18وَالْقَمَرِ إِذَا اتَّسَقَ
और चाँद की जब पूरा हो जाए
19لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍ
कि तुम लोग ज़रूर एक सख्ती के बाद दूसरी सख्ती में फँसोगे
20فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
तो उन लोगों को क्या हो गया है कि ईमान नहीं ईमान नहीं लाते
अल-इनशिक़ाककुरान सूची
25आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 18

सूरा अल-इनशिक़ाक आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और चाँद की जब पूरा हो जाए

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Thursday, October 1, 2026

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