अल-इनशिक़ाक · 17/25
अनुवाद उच्चारण — अल-इनशिक़ाक
وَاللَّيْلِ وَمَا وَسَقَ ۝١٧
Wallaili wa maa wasaq
📖 हिंदी अर्थ
और रात की और उन चीज़ों की जिन्हें ये ढाँक लेती है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَمَا وَسَقَ: "वसक़" का अर्थ है इकट्ठा करना और समेटना। अर्थात् रात जो कुछ भी अपने अंदर समेट लेती है, उसे अपनी ओर खींच लेती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में रात की क़सम खाई है, और उस चीज़ की क़सम जो रात अपने अंदर समेट लेती है। जब रात आती है, तो दिन में फैली हुई हर चीज़ — चाहे वह जानवर हों, चिड़ियाँ हों, कीड़े-मकोड़े हों या इंसान — सब अपने-अपने ठिकानों और बिलों की ओर लौट जाते हैं। रात उन सबको अपनी गोद में समेट लेती है, उन्हें ढक लेती है और उन्हें सुकून और पनाह देती है।

यह क़सम इसलिए खाई गई है ताकि उसके बाद जो बात कही जाए वह सुनने वालों के दिलों में अच्छी तरह बैठ जाए। अल्लाह तआला ने रात की क़सम खाकर यह बताना चाहा कि जिस तरह रात हर चीज़ को समेट लेती है और उसे अपने अंदर छिपा लेती है, उसी तरह अल्लाह तआला हर चीज़ को अपने क़ब्ज़े में रखता है और उसकी ताक़त से कोई चीज़ बाहर नहीं।

यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह है कि क़सम सिर्फ़ अल्लाह ही खा सकता है, और अल्लाह ने अपनी मख़लूक़ (सृष्टि) की क़सम खाई है ताकि इंसान उसकी निशानियों पर ग़ौर करे। लेकिन इंसान के लिए अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम खाना जायज़ नहीं, क्योंकि यह शिर्क की तरफ ले जाने वाला काम है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला की बनाई हुई हर चीज़ में उसकी कुदरत की निशानियाँ हैं। रात का आना, उसका अंधेरा, उसमें सबका अपने ठिकानों की ओर लौटना — यह सब अल्लाह की इबादत और उसकी तारीफ़ की गवाही देता है। जब हम रात को देखते हैं कि कैसे सब कुछ सुकून की नींद सो जाता है, तो हमें याद करना चाहिए कि असली सुकून और पनाह तो अल्लाह ही के पास है। जो इंसान अल्लाह की याद में अपना दिल लगाएगा, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में सुकून अता करेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-इनशिक़ाक

15بَلَىٰ إِنَّ رَبَّهُ كَانَ بِهِ بَصِيرًا
हाँ उसका परवरदिगार यक़ीनी उसको देख भाल कर रहा है
16فَلَا أُقْسِمُ بِالشَّفَقِ
तो मुझे शाम की मुर्ख़ी की क़सम
17وَاللَّيْلِ وَمَا وَسَقَ
और रात की और उन चीज़ों की जिन्हें ये ढाँक लेती है
18وَالْقَمَرِ إِذَا اتَّسَقَ
और चाँद की जब पूरा हो जाए
19لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍ
कि तुम लोग ज़रूर एक सख्ती के बाद दूसरी सख्ती में फँसोगे
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अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 17

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Tuesday, August 18, 2026

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