Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَتَرْكَبُنَّ: तुम अवश्य सवार होगे / तुम अवश्य गुज़रोगे।
- طَبَقًا عَن طَبَقٍ: एक अवस्था के बाद दूसरी अवस्था, एक हालत के बाद दूसरी हालत, एक मंज़िल के बाद दूसरी मंज़िल।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने बंदों को एक बहुत बड़ी और अहम हक़ीक़त से आगाह किया है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐ लोगो! तुम अवश्य ही एक के बाद एक कई मंज़िलों और हालात से गुज़रोगे। ये सिलसिला तुम्हारी पैदाइश से शुरू होकर आख़िरत तक जारी रहेगा।
पहले तुम नुत्फ़ा (बूंद) थे, फिर अलक़ा (जमा हुआ खून), फिर मुज़्ग़ा (गोश्त का टुकड़ा), फिर तुम्हें जान दी गई, फिर तुम इस दुनिया में आए, फिर तुम्हें जवानी, बुढ़ापा, बीमारी, तकलीफ़ें और खुशियाँ — सब कुछ झेलना पड़ता है। फिर एक दिन तुम्हें मौत आएगी, फिर क़ब्र का इम्तिहान होगा, फिर हश्र (उठ खड़े होने) का दिन आएगा, फिर हिसाब-किताब होगा, और फिर या तो जन्नत मिलेगी या जहन्नम।
ये सारे मरहले (चरण) अल्लाह तआला की तरफ से मुक़र्रर किए गए हैं। कोई भी इंसान इन हालात से बच नहीं सकता। ये आयत हमें ये सबक़ सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को समझदारी से गुज़ारना चाहिए। जिस तरह हम एक मंज़िल से दूसरी मंज़िल की तरफ बढ़ रहे हैं, उसी तरह हमें अपने रब की तरफ बढ़ते रहना चाहिए।
ये आयत हमारे अंदर आख़िरत का यक़ीन पैदा करती है और हमें बताती है कि ये दुनिया आख़िरी मंज़िल नहीं है। जो इंसान इस हक़ीक़त को समझ लेता है, वो अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढाल लेता है। वो जानता है कि उसे हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब देना है।
ऐ मुसलमान! ये आयत तेरे लिए एक नसीहत है कि तू अपनी ज़िंदगी के हर पल को ग़नीमत समझ। नेकियाँ कर, अल्लाह की इबादत कर, लोगों के साथ भलाई कर, और उस दिन की तैयारी कर जब तू अपने रब के सामने पेश होगा। यक़ीनन अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहम फ़रमाने वाला है। वो चाहता है कि तू जन्नत में जाए, इसलिए उसने तुझे राह दिखाने के लिए किताबें और रसूल भेजे। अब फ़ैसला तेरे हाथ में है — तू अपनी मंज़िल जन्नत बनाएगा या जहन्नम? अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-इनशिक़ाक
अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 19
सूरा अल-इनशिक़ाक आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि तुम लोग ज़रूर एक सख्ती के बाद दूसरी सख्ती…सूरा आयत 19/25 — सूरा अल-इनशिक़ाक الإنشقاق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इनशिक़ाक सुनें, सूरा अल-इनशिक़ाक अनुवाद, सूरा अल-इनशिक़ाक mp3, सूरा अल-इनशिक़ाक pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-इनशिक़ाक
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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