अल-बुरूज · 19/22
अनुवाद उच्चारण — अल-बुरूज
بَلِ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي تَكْذِيبٍ ۝١٩
Balil lazeena kafaroo fee takzeeb
📖 हिंदी अर्थ
मगर कुफ्फ़ार तो झुठलाने ही (की फ़िक्र) में हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

بَلِ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي تَكْذِيبٍ

शब्दों के अर्थ:

  • بَلِ: यहाँ पर इसका अर्थ है "बल्कि" या "नहीं, बल्कि" — यह पिछली बात से हटकर नई बात की ओर ध्यान दिलाने के लिए आया है।
  • تَكْذِيبٍ: झुठलाना, अस्वीकार करना, सच को न मानना।

विस्तृत व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि हे नबी! क्या तुम्हें उन गिरोहों की खबर नहीं पहुँची जिन्होंने अपने पैग़म्बरों को झुठलाया? फ़िरऔन और समूद की क़ौम — उन पर क्या आफ़तें आईं, कैसे वे तबाह किए गए? ये सब क़िस्से इसलिए बयान किए गए ताकि लोग सबक़ लें। मगर अफ़सोस! इन काफ़िरों ने इन नसीहतों से कोई सबक़ नहीं सीखा।

अल्लाह फ़रमाता है: "बल्कि जो लोग काफ़िर हैं वे झुठलाने में ही लगे हुए हैं।" यानी उनका इनकार और झुठलाना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह उनके पुराने तरीक़े का हिस्सा है। जिस तरह पहले की क़ौमों ने अपने नबियों को झुठलाया, ठीक उसी तरह ये लोग भी अपने नबी ﷺ को झुठला रहे हैं। उनके सामने सच्चाई के सबूत आ चुके हैं, मगर वे अपनी हवस और अहंकार की वजह से सच को क़बूल नहीं करते।

यह आयत हमें बताती है कि काफ़िरों का यह हाल हमेशा से रहा है — वे सच को देखकर भी उसे नहीं मानते, क्योंकि उनके दिलों पर अहंकार और अंधेपन की परतें चढ़ी होती हैं। वे कहते हैं कि यह क़ुरआन शायरी है, जादू है, मगर यह उनकी अपनी ग़लतफ़हमी है। असल में यह क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, जो लौह-ए-महफ़ूज़ में सुरक्षित है, जिसमें कोई बदलाव नहीं आ सकता।

दावत का पहलू:

प्यारे भाइयों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस रास्ते पर हैं? क्या हम सच को क़बूल करने वाले हैं या झुठलाने वालों में से हैं? अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन दिया है, और रसूल ﷺ का सच्चा रास्ता दिखाया है। यह बड़ी नेमत है। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें, क़ुरआन पर ईमान लाएँ और उस पर अमल करें। जो लोग सच को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है — अल्लाह उन्हें अच्छी तरह जानता है और उनके कर्मों का हिसाब लेने वाला है। मगर जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं — यही सबसे बड़ी कामयाबी है।

आओ हम सब उन लोगों में से बनें जो सच को क़बूल करें, क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाएँ, और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अल-बुरूज

17هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ الْجُنُودِ
क्या तुम्हारे पास लशकरों की ख़बर पहुँची है
18فِرْعَوْنَ وَثَمُودَ
(यानि) फिरऔन व समूद की (ज़रूर पहुँची है)
19بَلِ الَّذِينَ كَفَرُوا فِي تَكْذِيبٍ
मगर कुफ्फ़ार तो झुठलाने ही (की फ़िक्र) में हैं
20وَاللَّهُ مِن وَرَائِهِم مُّحِيطٌ
और ख़ुदा उनको पीछे से घेरे हुए है (ये झुठलाने के क़ाबिल नहीं)
21بَلْ هُوَ قُرْآنٌ مَّجِيدٌ
बल्कि ये तो क़ुरान मजीद है
अल-बुरूजकुरान सूची
22आयत
मक्कीRevelation
19आयत

अनुवाद — अल-बुरूज 19

सूरा अल-बुरूज आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर कुफ्फ़ार तो झुठलाने ही (की फ़िक्र) में हैं

सूरा आयत 19/22 — अल-बुरूज البروج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बुरूज सुनें, अल-बुरूज अनुवाद, अल-बुरूज mp3, अल-बुरूज pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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