अल-बुरूज · 6/22
अनुवाद उच्चारण — अल-बुरूज
إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌ ۝٦
Iz hum `alaihaa qu`ood
📖 हिंदी अर्थ
जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِذْ – जब (यहाँ भूतकाल की घटना की ओर संकेत है)
  • هُمْ – वे (अत्याचारी क़ौम)
  • عَلَيْهَا – उस (आग से भरे गड्ढे/खंदक) के किनारे
  • قُعُودٌ – बैठे हुए (स्थायी रूप से, लगातार)

तफ़सीर:

यह आयत उन ज़ालिमों के कृत्य का वर्णन कर रही है जिन्होंने ईमानवालों को भयानक यातना देने के लिए आग से भरा गड्ढा (खंदक) तैयार किया था। जब वे उस गड्ढे के किनारे बैठे थे, तो वे केवल दर्शक नहीं थे, बल्कि स्वयं उस अत्याचार के सक्रिय भागीदार थे। वे आराम से कुर्सियों पर बैठकर उस दृश्य का आनंद ले रहे थे, जब निर्दोष मोमिनों को आग में फेंका जा रहा था। उनका बैठना इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने इस ज़ुल्म को अपनी आदत बना लिया था और उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं था, बल्कि वे इसे देखकर खुश हो रहे थे।

यह दृश्य हमें सिखाता है कि अत्याचार केवल वही नहीं करता जो सीधे तौर पर ज़ुल्म करता है, बल्कि वे भी उसके भागीदार हैं जो उस ज़ुल्म को देखते हैं, उसका समर्थन करते हैं, या उस पर खुशी जताते हैं। इस्लाम हमें सिखाता है कि हमें हमेशा सत्य और न्याय के साथ खड़ा होना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। जो लोग ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाते, वे भी उस ज़ुल्म के मायने में शामिल होते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यह भी बताती है कि दुनिया में ज़ालिम कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसका अंजाम अंततः विनाश ही है। अल्लाह तआला ने इन ज़ालिमों का हाल यूँ बयान किया कि वे आग के गड्ढे के किनारे बैठकर मोमिनों को जलाते रहे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें इसका बदला दिया और उन्हें खुद उसी आग में झोंक दिया। यह अल्लाह का न्याय है कि वह किसी ज़ुल्म को अनदेखा नहीं करता।

इससे हमें सबक लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी किसी पर ज़ुल्म न करें, चाहे वह कितना ही कमज़ोर क्यों न हो। और अगर हम किसी ज़ुल्म को देखें, तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाएँ। याद रखें, अल्लाह हर चीज़ को देख रहा है और हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब रख रहा है। जो लोग ईमान पर साबित क़दम रहते हैं और ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है – जन्नत के बाग़, जहाँ कोई दर्द, कोई ग़म और कोई अत्याचार नहीं होगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — अल-बुरूज

4قُتِلَ أَصْحَابُ الْأُخْدُودِ
उसकी (कि कुफ्फ़ार मक्का हलाक हुए) जिस तरह ख़न्दक़ वाले हलाक कर दिए गए
5النَّارِ ذَاتِ الْوَقُودِ
जो ख़न्दक़ें आग की थीं
6إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌ
जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था
7وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِالْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌ
जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे
8وَمَا نَقَمُوا مِنْهُمْ إِلَّا أَن يُؤْمِنُوا بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है
अल-बुरूजकुरान सूची
22आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अल-बुरूज 6

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सूरा आयत 6/22 — अल-बुरूज البروج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बुरूज सुनें, अल-बुरूज अनुवाद, अल-बुरूज mp3, अल-बुरूज pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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