Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِذْ – जब (यहाँ भूतकाल की घटना की ओर संकेत है)
- هُمْ – वे (अत्याचारी क़ौम)
- عَلَيْهَا – उस (आग से भरे गड्ढे/खंदक) के किनारे
- قُعُودٌ – बैठे हुए (स्थायी रूप से, लगातार)
तफ़सीर:
यह आयत उन ज़ालिमों के कृत्य का वर्णन कर रही है जिन्होंने ईमानवालों को भयानक यातना देने के लिए आग से भरा गड्ढा (खंदक) तैयार किया था। जब वे उस गड्ढे के किनारे बैठे थे, तो वे केवल दर्शक नहीं थे, बल्कि स्वयं उस अत्याचार के सक्रिय भागीदार थे। वे आराम से कुर्सियों पर बैठकर उस दृश्य का आनंद ले रहे थे, जब निर्दोष मोमिनों को आग में फेंका जा रहा था। उनका बैठना इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने इस ज़ुल्म को अपनी आदत बना लिया था और उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं था, बल्कि वे इसे देखकर खुश हो रहे थे।
यह दृश्य हमें सिखाता है कि अत्याचार केवल वही नहीं करता जो सीधे तौर पर ज़ुल्म करता है, बल्कि वे भी उसके भागीदार हैं जो उस ज़ुल्म को देखते हैं, उसका समर्थन करते हैं, या उस पर खुशी जताते हैं। इस्लाम हमें सिखाता है कि हमें हमेशा सत्य और न्याय के साथ खड़ा होना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। जो लोग ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाते, वे भी उस ज़ुल्म के मायने में शामिल होते हैं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यह भी बताती है कि दुनिया में ज़ालिम कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसका अंजाम अंततः विनाश ही है। अल्लाह तआला ने इन ज़ालिमों का हाल यूँ बयान किया कि वे आग के गड्ढे के किनारे बैठकर मोमिनों को जलाते रहे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें इसका बदला दिया और उन्हें खुद उसी आग में झोंक दिया। यह अल्लाह का न्याय है कि वह किसी ज़ुल्म को अनदेखा नहीं करता।
इससे हमें सबक लेना चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में कभी किसी पर ज़ुल्म न करें, चाहे वह कितना ही कमज़ोर क्यों न हो। और अगर हम किसी ज़ुल्म को देखें, तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाएँ। याद रखें, अल्लाह हर चीज़ को देख रहा है और हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब रख रहा है। जो लोग ईमान पर साबित क़दम रहते हैं और ज़ुल्म के खिलाफ खड़े होते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बेहतरीन इनाम है – जन्नत के बाग़, जहाँ कोई दर्द, कोई ग़म और कोई अत्याचार नहीं होगा।
📜 आयत 4-8 — सूरा अल-बुरूज
अनुवाद — अल-बुरूज 6
सूरा अल-बुरूज आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा थासूरा आयत 6/22 — सूरा अल-बुरूज البروج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बुरूज सुनें, सूरा अल-बुरूज अनुवाद, सूरा अल-बुरूज mp3, सूरा अल-बुरूज pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-बुरूज
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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