अल-बुरूज · 7/22
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बुरूज
وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِالْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌ ۝٧
Wa hum `alaa maa yaf`aloona bilmu `mineena shuhood
📖 हिंदी अर्थ
जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شُهُودٌ (शुहूद): उपस्थित होना, देखना, गवाह होना। यहाँ अर्थ है कि वे लोग उस अत्याचार के समय वहाँ मौजूद थे और उसे देख रहे थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन ज़ालिमों के क्रूरतम कृत्य का वर्णन करती है जिन्होंने अल्लाह के नेक बंदों पर अत्याचार की हदें पार कर दीं। ये लोग केवल आदेश देने वाले नहीं थे, बल्कि स्वयं उस जगह पर उपस्थित रहकर मोमिनीन की यातना का दृश्य देखते थे। वे उस खाई (अख़दूद) के किनारे बैठे हुए थे, जिसमें आग जलाई गई थी, और वे स्वयं उस दृश्य को देखकर आनंद ले रहे थे। उनका उपस्थित होना और देखना उनके अपराध को और भी गंभीर बना देता है, क्योंकि वे न केवल अत्याचार के आदेश दे रहे थे, बल्कि उसे अपनी आँखों से देखकर उसका आनंद भी ले रहे थे।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि अत्याचार करना बुरा है, लेकिन अत्याचार को देखकर खुश होना और उसका समर्थन करना भी उतना ही बड़ा पाप है। ये लोग उस समय वहाँ मौजूद थे जब मोमिनीन को आग में डाला जा रहा था, और वे इस दृश्य को देखकर अपने किए पर संतुष्ट थे। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि अल्लाह तआला उनके हर काम को देख रहा है, और वह उनके इस अत्याचार का हिसाब लेगा।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी पर अत्याचार नहीं करना चाहिए, और न ही किसी अत्याचार का समर्थन करना चाहिए। यदि हम किसी बुराई को देखकर चुप रहते हैं या उसका समर्थन करते हैं, तो हम भी उस पाप में भागीदार होते हैं। अल्लाह तआला हर चीज़ को देख रहा है, और वह हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब लेगा।

प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखें कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की मदद करता है, चाहे वे कितने ही कमज़ोर क्यों न हों। ज़ालिम चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसका अंजाम बुरा ही होता है। हमें हमेशा सच्चाई और नेकी के साथ रहना चाहिए, और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। वही सबसे बड़ा मददगार है, और वही हमारी हर मुश्किल में हमारा साथ देता है।



📜 आयत 5-9 — सूरा अल-बुरूज

5النَّارِ ذَاتِ الْوَقُودِ
जो ख़न्दक़ें आग की थीं
6إِذْ هُمْ عَلَيْهَا قُعُودٌ
जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था
7وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِالْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌ
जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे
8وَمَا نَقَمُوا مِنْهُمْ إِلَّا أَن يُؤْمِنُوا بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है
9الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है
अल-बुरूजकुरान सूची
22आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-बुरूज 7

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Tuesday, September 29, 2026

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