अत-तारिक़ · 2/17
अनुवाद उच्चारण — अत-तारिक़
وَمَا أَدْرَاكَ مَا الطَّارِقُ ۝٢
Wa maaa adraaka mattaariq
📖 हिंदी अर्थ
और तुमको क्या मालूम रात को आने वाला क्या है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَا أَدْرَاكَ: तुम्हें क्या पता / तुम्हें कैसे मालूम हो सकता है — यह एक अभिव्यक्ति है जो उस चीज़ की महानता और अहमियत को बयान करती है जिसके बारे में बताया जा रहा है।
  • الطَّارِقُ: रात में आने वाला, रात के समय प्रकट होने वाला तारा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने पैग़म्बर ﷺ को ख़िताब करते हुए फ़रमाया: "और तुम्हें क्या मालूम कि वह 'तारिक़' (रात में आने वाला) क्या है?"

यह पूछने का अंदाज़ बताता है कि यह चीज़ इतनी अज़ीम और हैरतअंगेज़ है कि इसकी हक़ीक़त का अंदाज़ा लगाना इंसान की समझ से बाहर है। यह वही नज्म (तारा) है जो रात के अंधेरे में चमकता है और अपनी रोशनी से रास्ता दिखाता है।

इस आयत में अल्लाह तआला ने आसमान की क़सम खाई है और उस चमकते हुए सितारे की क़सम खाई है जो रात को नज़र आता है। यह क़सम इसलिए खाई गई कि उसके बाद जो बात बताई जाने वाली है वह बेहद अहम है — यानी हर इंसान के ऊपर एक निगरान रखने वाला फ़रिश्ता मुक़र्रर है जो उसके हर अमल को लिख रहा है।

यह बात हमारे लिए कितनी बड़ी नसीहत है! हम अकेले नहीं हैं, हमारा रब हमें देख रहा है और उसके फ़रिश्ते हमारे हर काम को दर्ज कर रहे हैं। यह हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी में सब्र और परहेज़गारी अपनानी चाहिए, क्योंकि हमारा हर अमल क़यामत के दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह तआला की क़ुदरत के नज़ारे — जैसे चमकता सितारा — उसकी अज़मत और हिकमत की निशानी हैं। जिस रब ने इन सितारों को पैदा किया और उन्हें रात की ज़ुल्मत में रोशनी बनाया, वही रब हमारे हर छोटे-बड़े अमल का हिसाब लेने वाला है।

तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारें कि हमें अपने रब के सामने शर्मिंदा न होना पड़े, और हम उन लोगों में से हों जो अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनें। यही इस आयत का पैग़ाम है — हर पल याद रखें कि हम पर निगरानी है, और हमारा रब हमसे बेहद करीब है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — अत-तारिक़

1وَالسَّمَاءِ وَالطَّارِقِ
आसमान और रात को आने वाले की क़सम
2وَمَا أَدْرَاكَ مَا الطَّارِقُ
और तुमको क्या मालूम रात को आने वाला क्या है
3النَّجْمُ الثَّاقِبُ
(वह) चमकता हुआ तारा है
4إِن كُلُّ نَفْسٍ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ
(इस बात की क़सम) कि कोई शख़्श ऐसा नहीं जिस पर निगेहबान मुक़र्रर नहीं
अत-तारिक़कुरान सूची
17आयत
मक्कीRevelation
2आयत

अनुवाद — अत-तारिक़ 2

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Tuesday, August 18, 2026

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