अल-ग़ाशिया · 15/26
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-ग़ाशिया
وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ ۝١٥
Wa namaariqu masfoofah
📖 हिंदी अर्थ
और गाँव तकिए क़तार की क़तार लगे होंगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَمَارِقُ (नमारिक़ु): तकिये, गद्दे (बहुवचन)।
  • مَصْفُوفَةٌ (मस्फ़ूफ़तुन): एक के बाद एक पंक्तिबद्ध, कतार में लगे हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में जन्नत की उन नेमतों का वर्णन कर रहे हैं जो उन मोमिनों के लिए तैयार की गई हैं जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसकी राह में भलाई के काम किए। यहाँ बताया जा रहा है कि जन्नत में नरम और आरामदायक तकिये होंगे जो बड़ी खूबसूरती से एक के बगल में दूसरा, पंक्तिबद्ध करके रखे गए होंगे। यह तकिये इतने नरम और आलीशान होंगे कि जन्नती उन पर टेक लगाकर आराम करेंगे, और उनकी यह व्यवस्था दिखाती है कि जन्नत में हर चीज़ में तरतीब, सुंदरता और सुकून होगा।

यह आयत हमें बताती है कि जन्नत सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ों का ठिकाना नहीं, बल्कि वहाँ हर तरह का आराम और सुकून मौजूद है। जिस तरह दुनिया में एक मेहमान के लिए सबसे अच्छी जगह और सबसे आरामदायक तकिये का इंतज़ाम किया जाता है, उसी तरह अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए जन्नत में हर चीज़ का बेहतरीन इंतज़ाम किया है।

दावती पहलू:

यह आयत मोमिनों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है कि उनकी मेहनत और इबादत का फल उन्हें जन्नत में ऐसी नेमतों की शक्ल में मिलेगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। जब हम जानते हैं कि हमारे रब ने हमारे लिए ऐसी जगह तैयार की है जहाँ हर चीज़ में सुकून और आराम है, तो हमारा दिल खुशी से भर जाता है और हमें चाहिए कि हम दुनिया की इस छोटी सी ज़िंदगी में अल्लाह की राह में भलाई के काम करें, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से हों जो इन तकियों पर टेक लगाकर हमेशा के लिए आराम करें। यह हमारे लिए सबसे बड़ी कामयाबी है कि हम अपने रब की रज़ा के लिए काम करें और उसकी जन्नत के हक़दार बनें।



📜 आयत 13-17 — सूरा अल-ग़ाशिया

13فِيهَا سُرُرٌ مَّرْفُوعَةٌ
उसमें ऊँचे ऊँचे तख्त बिछे होंगे
14وَأَكْوَابٌ مَّوْضُوعَةٌ
और (उनके किनारे) गिलास रखे होंगे
15وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ
और गाँव तकिए क़तार की क़तार लगे होंगे
16وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ
और नफ़ीस मसनदे बिछी हुई
17أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते कि कैसा अजीब पैदा किया गया है
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अनुवाद — अल-ग़ाशिया 15

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Friday, October 2, 2026

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