अल-ग़ाशिया · 16/26
अनुवाद उच्चारण — अल-ग़ाशिया
وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ ۝١٦
Wa zaraabiyyu mabsoosah
📖 हिंदी अर्थ
और नफ़ीस मसनदे बिछी हुई
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • زَرَابِيُّ (ज़राबी): बिछाए जाने वाले शानदार और नर्म फर्श, बुने हुए कालीन और बिछौने।
  • مَبْثُوثَةٌ (मब्सूसा): फैलाई हुई, बिखेरी हुई, हर जगह बिछाई गई।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान आशीर्वाद का वर्णन कर रही है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए जन्नत में तैयार किया है। जन्नत के उस सुंदर और ऊँचे बाग़ में, जहाँ हर तरफ़ खुशहाली और सुकून है, वहाँ शानदार कालीन और नर्म बिछौने हर जगह बिछे होंगे। ये फर्श इतने नर्म और खूबसूरत होंगे कि उन पर बैठना और लेटना अपने आप में एक अज़ीम नेमत होगी। ये बिछौने इस तरह फैलाए जाएँगे कि हर तरफ़ दिखेंगे, और जन्नत की सैर करने वाले मोमिनीन जहाँ भी जाएँगे, उन्हें आराम के लिए तैयार मिलेंगे।

यह वही जन्नत है जिसका वादा अल्लाह ने अपने उन बंदों से किया है जिन्होंने दुनिया में अपने अमल को अच्छा किया, अल्लाह की इबादत की और उसकी राह में भलाई के काम किए। जन्नत की ये नेमतें सिर्फ़ दिखावे के लिए नहीं होंगी, बल्कि हर चीज़ में सच्चा सुख और आराम होगा। जिस तरह दुनिया में एक राजा अपने महल में बेशकीमती फर्श बिछाता है, उससे कहीं बढ़कर अल्लाह ने अपने मेहमानों के लिए तैयारी की है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें उस अजीम इनाम की याद दिलाती है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए रखा है। जब हम जानते हैं कि जन्नत में हर चीज़ का इंतज़ाम बेहतरीन तरीके से किया गया है, यहाँ तक कि बिछौनों और कालीनों का भी, तो हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की राह में लगाएँ। यह एक प्यार भरा संदेश है कि अल्लाह अपने बंदों से इतना मुहब्बत करता है कि उनके आराम और सुकून का पूरा ख़याल रखा है। आओ हम अपने अमल को सुधारें, अल्लाह की इबादत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, और उस जन्नत के हक़दार बनें जहाँ हर तरफ़ खुशहाली, सुकून और रहमत का सामान बिछा होगा। यही सच्ची कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अल-ग़ाशिया

14وَأَكْوَابٌ مَّوْضُوعَةٌ
और (उनके किनारे) गिलास रखे होंगे
15وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ
और गाँव तकिए क़तार की क़तार लगे होंगे
16وَزَرَابِيُّ مَبْثُوثَةٌ
और नफ़ीस मसनदे बिछी हुई
17أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى الْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ
तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते कि कैसा अजीब पैदा किया गया है
18وَإِلَى السَّمَاءِ كَيْفَ رُفِعَتْ
और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है
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अनुवाद — अल-ग़ाशिया 16

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Tuesday, August 18, 2026

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