अत-तौबा · 118/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
وَعَلَى الثَّلَاثَةِ الَّذِينَ خُلِّفُوا حَتَّىٰ إِذَا ضَاقَتْ عَلَيْهِمُ الْأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ وَضَاقَتْ عَلَيْهِمْ أَنفُسُهُمْ وَظَنُّوا أَن لَّا مَلْجَأَ مِنَ اللَّهِ إِلَّا إِلَيْهِ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ لِيَتُوبُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ ۝١١٨
Wa `alas salaasatil lazeena khullifoo hattaaa izaa daaqat `alaihimul ardu bimaa rahubat wa daaqat `alaihim anfusuhum wa zannnooo al laa malja-a minal laahi illaaa ilaihi summa taaba `alaihim liyatooboo; innal laaha Huwat Tawwaabur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और उन यमीमों पर (भी फज़ल किया) जो (जिहाद से पीछे रह गए थे और उन पर सख्ती की गई) यहाँ तक कि ज़मीन बावजूद उस वसअत (फैलाव) के उन पर तंग हो गई और उनकी जानें (तक) उन पर तंग हो गई और उन लोगों ने समझ लिया कि ख़ुदा के सिवा और कहीं पनाह की जगह नहीं फिर ख़ुदा ने उनको तौबा की तौफीक दी ताकि वह (ख़ुदा की तरफ) रूजू करें बेशक ख़ुदा ही बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خُلِّفُوا: पीछे छोड़ दिए गए, यानी उनकी तौबा का फ़ैसला टाल दिया गया।
  • ضَاقَتْ عَلَيْهِمُ الْأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ: धरती अपनी विशालता के बावजूद उन पर तंग हो गई।
  • وَضَاقَتْ عَلَيْهِمْ أَنفُسُهُمْ: उनके दिल और जान उन पर तंग हो गए, यानी वे खुद से भी बेज़ार हो गए।
  • ظَنُّوا: उन्होंने निश्चित जान लिया।
  • مَلْجَأ: पनाह की जगह, सहारा।
  • تَابَ عَلَيْهِمْ: अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल की और उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने उन तीन सहाबा पर भी अपनी रहमत और मेहरबानी की, जिन्हें तौबा की क़बूलियत के एलान में पीछे रखा गया था। ये तीनों अनसारी सहाबी थे—कअब बिन मालिक, हिलाल बिन उमय्या और मुरारा बिन रबीअ। ये लोग ग़ज़वा-ए-तबूक में रसूलुल्लाह ﷺ के साथ जाने से पीछे रह गए थे, और उनकी तौबा का फ़ैसला पचास दिनों तक टाला गया। इस दौरान रसूलुल्लाह ﷺ ने लोगों को हुक्म दिया कि वे इनसे बात न करें और इन्हें अलग कर दें। इन तीनों पर यह इम्तिहान इतना सख्त हुआ कि धरती अपनी विशालता और चौड़ाई के बावजूद उन पर तंग हो गई—हर तरफ़ से वे घिर गए, और उनके दिल इस कदर बेचैन और पशेमान हुए कि उन्हें अपनी जान से भी तंगी महसूस हुई। उन्होंने यक़ीन कर लिया कि अल्लाह की पकड़ और नाराज़गी से बचने के लिए कोई पनाहगाह नहीं है, सिवाय खुद अल्लाह की तरफ़ रुजू करने के। यही हालत उनके इख़लास और सच्ची तौबा की निशानी बनी। फिर अल्लाह ने उन पर अपनी रहमत की नज़र की, उनके दिलों को तौबा की तौफ़ीक़ दी और उनकी तौबा क़बूल फ़रमाई, ताकि वे अपनी इस तौबा पर क़ायम रहें और हमेशा अल्लाह की तरफ़ रुजू करते रहें। बेशक अल्लाह ही तौबा क़बूल करने वाला और अपने बंदों पर बेहद रहम करने वाला है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत उसके बंदों पर हर हाल में छाई रहती है, चाहे गुनाह कितना ही बड़ा हो, जब तक बंदा सच्चे दिल से तौबा करे।
  2. मुसीबत और तंगी के वक़्त में इंसान का अल्लाह की तरफ़ रुजू करना ही उसकी नजात का ज़रिया बनता है—यही सबसे बड़ी नेमत है।
  3. सच्ची तौबा का तक़ाज़ा है कि इंसान अपने गुनाह पर शर्मिंदा हो, दिल से पशेमान हो और अल्लाह से माफ़ी माँगे; अल्लाह ऐसे बंदों को कभी निराश नहीं करता।
  4. यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह की नाराज़गी से बचने का कोई रास्ता नहीं, सिवाय उसी की तरफ़ लौटने के—यही ईमान की असली हक़ीक़त है।
  5. अल्लाह तआला तौबा करने वालों से मुहब्बत करता है और उन्हें इज़्ज़त और मग़फ़िरत से नवाज़ता है, इसलिए हमें कभी उसकी रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।


📜 आयत 116-120 — अत-तौबा

116إِنَّ اللَّهَ لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۚ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
इसमें तो शक़ ही नहीं कि सारे आसमान व ज़मीन की हुकूमत ख़ुदा ही के लिए ख़ास है वही (जिसे चाहे) जिलाता है और (जिसे चाहे) मारता है और तुम लोगों का ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त है न मददगार
117لَّقَد تَّابَ اللَّهُ عَلَى النَّبِيِّ وَالْمُهَاجِرِينَ وَالْأَنصَارِ الَّذِينَ اتَّبَعُوهُ فِي سَاعَةِ الْعُسْرَةِ مِن بَعْدِ مَا كَادَ يَزِيغُ قُلُوبُ فَرِيقٍ مِّنْهُمْ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّهُ بِهِمْ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
अलबत्ता ख़ुदा ने नबी और उन मुहाजिरीन अन्सार पर बड़ा फज़ल किया जिन्होंने तंगदस्ती के वक्त रसूल का साथ दिया और वह भी उसके बाद कि क़रीब था कि उनमे ंसे कुछ लोगों के दिल जगमगा जाएँ फिर ख़ुदा ने उन पर (भी) फज़ल किया इसमें शक़ नहीं कि वह उन लोगों पर पड़ा तरस खाने वाला मेहरबान है
118وَعَلَى الثَّلَاثَةِ الَّذِينَ خُلِّفُوا حَتَّىٰ إِذَا ضَاقَتْ عَلَيْهِمُ الْأَرْضُ بِمَا رَحُبَتْ وَضَاقَتْ عَلَيْهِمْ أَنفُسُهُمْ وَظَنُّوا أَن لَّا مَلْجَأَ مِنَ اللَّهِ إِلَّا إِلَيْهِ ثُمَّ تَابَ عَلَيْهِمْ لِيَتُوبُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
और उन यमीमों पर (भी फज़ल किया) जो (जिहाद से पीछे रह गए थे और उन पर सख्ती की गई) यहाँ तक कि ज़मीन बावजूद उस वसअत (फैलाव) के उन पर तंग हो गई और उनकी जानें (तक) उन पर तंग हो गई और उन लोगों ने समझ लिया कि ख़ुदा के सिवा और कहीं पनाह की जगह नहीं फिर ख़ुदा ने उनको तौबा की तौफीक दी ताकि वह (ख़ुदा की तरफ) रूजू करें बेशक ख़ुदा ही बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान है
119يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَكُونُوا مَعَ الصَّادِقِينَ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और सच्चों के साथ हो जाओ
120مَا كَانَ لِأَهْلِ الْمَدِينَةِ وَمَنْ حَوْلَهُم مِّنَ الْأَعْرَابِ أَن يَتَخَلَّفُوا عَن رَّسُولِ اللَّهِ وَلَا يَرْغَبُوا بِأَنفُسِهِمْ عَن نَّفْسِهِ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ لَا يُصِيبُهُمْ ظَمَأٌ وَلَا نَصَبٌ وَلَا مَخْمَصَةٌ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَلَا يَطَئُونَ مَوْطِئًا يَغِيظُ الْكُفَّارَ وَلَا يَنَالُونَ مِنْ عَدُوٍّ نَّيْلًا إِلَّا كُتِبَ لَهُم بِهِ عَمَلٌ صَالِحٌ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ الْمُحْسِنِينَ
मदीने के रहने वालों और उनके गिर्दोनवॉ (आस पास) देहातियों को ये जायज़ न था कि रसूल ख़ुदा का साथ छोड़ दें और न ये (जायज़ था) कि रसूल की जान से बेपरवा होकर अपनी जानों के बचाने की फ्रिक करें ये हुक्म उसी सबब से था कि उन (जिहाद करने वालों) को ख़ुदा की रूह में जो तकलीफ़ प्यास की या मेहनत या भूख की शिद्दत की पहुँचती है या ऐसी राह चलते हैं जो कुफ्फ़ार के ग़ैज़ (ग़ज़ब का बाइस हो या किसी दुश्मन से कुछ ये लोग हासिल करते हैं तो बस उसके ऐवज़ में (उनके नामए अमल में) एक नेक काम लिख दिया जाएगा बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों का अज्र (व सवाब) बरबाद नहीं करता है
अत-तौबाकुरान सूची
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अनुवाद — अत-तौबा 118

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Tuesday, August 18, 2026

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