अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَلْجَأً (मल्जअन): ऐसी जगह जहाँ पनाह ली जाए, सुरक्षित स्थान, किला या आश्रय।
- مَغَارَاتٍ (मग़ारात): पहाड़ों की गुफाएँ, जिनमें छिपा जा सके।
- مُدَّخَلًا (मुद्दख़लन): सुरंग या भूमिगत रास्ता, जिसमें घुसकर छिप जाएँ।
- يَجْمَحُونَ (यज्महून): बहुत तेज़ी से भागना, ऐसा भागना जिसे कोई रोक न सके (जैसे घोड़ा अपने सवार को लेकर बेलगाम भागे)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की हालत बयान कर रही है। ये वे लोग हैं जो ईमान का दावा तो करते हैं, लेकिन दिल से इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन हैं। जब जिहाद या सच्चे मुसलमानों के साथ खड़े होने का समय आता है, तो ये भागने की कोशिश करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर इन मुनाफ़िक़ों को कोई ऐसी जगह मिल जाए जहाँ ये पनाह ले सकें — चाहे वह कोई मज़बूत किला हो, या पहाड़ों की कोई गुफा हो, या ज़मीन के अंदर कोई सुरंग हो — तो ये उसी तरफ़ भाग खड़े होंगे, और इतनी तेज़ी से भागेंगे जैसे कोई बेलगाम घोड़ा दौड़ता है। उनका यह भागना इसलिए होगा कि वे सच्चाई का सामना करने और मुसलमानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने से बचना चाहते हैं। उनके दिलों में ईमान की मज़बूती नहीं, बल्कि दुनिया और अपनी जान की हिफ़ाज़त की चिंता है। वे किसी भी हालत में सच्चे मुसलमानों के साथ नहीं रहना चाहते, और अगर उन्हें छिपने या भागने का कोई रास्ता मिल जाए, तो वे उसे अपना नजात (मुक्ति) का ज़रिया समझेंगे।
फ़ायदे (उपदेश):
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल की पक्की यक़ीन और अमल का सबूत है। जिसके दिल में सच्चा ईमान होता है, वह मुश्किल वक़्त में भी सच्चाई के साथ खड़ा रहता है।
- मुनाफ़िक़ी (दिखावा) एक खतरनाक बीमारी है जो इंसान को सच्चाई से भागने पर मजबूर करती है। हमें चाहिए कि अपने दिल को साफ़ रखें और अल्लाह के दीन के साथ सच्चा रिश्ता बनाएँ।
- यह आयत मुसलमानों को यह भी बताती है कि दुश्मनों की चालों से सावधान रहें और उनके हालात को समझें, ताकि उनके धोखे में न आएँ।
- सबसे बड़ी नसीहत यह है कि हम अपनी ज़िंदगी में सच्चाई और बहादुरी को अपनाएँ, और कभी भी सच्चाई से भागने वालों में शामिल न हों। अल्लाह उन्हीं से मुहब्बत करता है जो सच्चे दिल से उसके दीन पर क़ायम रहते हैं।
📜 आयत 55-59 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 57
सूरा अत-तौबा आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि गर कहीं ये लोग पनाह की जगह (क़िले) या…सूरा आयत 57/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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