अत-तौबा · 57/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
لَوْ يَجِدُونَ مَلْجَأً أَوْ مَغَارَاتٍ أَوْ مُدَّخَلًا لَّوَلَّوْا إِلَيْهِ وَهُمْ يَجْمَحُونَ ۝٥٧
Law yajidoona malja`an aw maghaaraatin aw mudda khalal lawallaw ilaihi wa hum yajmahoon
📖 हिंदी अर्थ
कि गर कहीं ये लोग पनाह की जगह (क़िले) या (छिपने के लिए) ग़ार या घुस बैठने की कोई (और) जगह पा जाए तो उसी तरफ रस्सियाँ तोड़ाते हुए भाग जाएँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَلْجَأً (मल्जअन): ऐसी जगह जहाँ पनाह ली जाए, सुरक्षित स्थान, किला या आश्रय।
  • مَغَارَاتٍ (मग़ारात): पहाड़ों की गुफाएँ, जिनमें छिपा जा सके।
  • مُدَّخَلًا (मुद्दख़लन): सुरंग या भूमिगत रास्ता, जिसमें घुसकर छिप जाएँ।
  • يَجْمَحُونَ (यज्महून): बहुत तेज़ी से भागना, ऐसा भागना जिसे कोई रोक न सके (जैसे घोड़ा अपने सवार को लेकर बेलगाम भागे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) की हालत बयान कर रही है। ये वे लोग हैं जो ईमान का दावा तो करते हैं, लेकिन दिल से इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन हैं। जब जिहाद या सच्चे मुसलमानों के साथ खड़े होने का समय आता है, तो ये भागने की कोशिश करते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर इन मुनाफ़िक़ों को कोई ऐसी जगह मिल जाए जहाँ ये पनाह ले सकें — चाहे वह कोई मज़बूत किला हो, या पहाड़ों की कोई गुफा हो, या ज़मीन के अंदर कोई सुरंग हो — तो ये उसी तरफ़ भाग खड़े होंगे, और इतनी तेज़ी से भागेंगे जैसे कोई बेलगाम घोड़ा दौड़ता है। उनका यह भागना इसलिए होगा कि वे सच्चाई का सामना करने और मुसलमानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने से बचना चाहते हैं। उनके दिलों में ईमान की मज़बूती नहीं, बल्कि दुनिया और अपनी जान की हिफ़ाज़त की चिंता है। वे किसी भी हालत में सच्चे मुसलमानों के साथ नहीं रहना चाहते, और अगर उन्हें छिपने या भागने का कोई रास्ता मिल जाए, तो वे उसे अपना नजात (मुक्ति) का ज़रिया समझेंगे।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल की पक्की यक़ीन और अमल का सबूत है। जिसके दिल में सच्चा ईमान होता है, वह मुश्किल वक़्त में भी सच्चाई के साथ खड़ा रहता है।
  2. मुनाफ़िक़ी (दिखावा) एक खतरनाक बीमारी है जो इंसान को सच्चाई से भागने पर मजबूर करती है। हमें चाहिए कि अपने दिल को साफ़ रखें और अल्लाह के दीन के साथ सच्चा रिश्ता बनाएँ।
  3. यह आयत मुसलमानों को यह भी बताती है कि दुश्मनों की चालों से सावधान रहें और उनके हालात को समझें, ताकि उनके धोखे में न आएँ।
  4. सबसे बड़ी नसीहत यह है कि हम अपनी ज़िंदगी में सच्चाई और बहादुरी को अपनाएँ, और कभी भी सच्चाई से भागने वालों में शामिल न हों। अल्लाह उन्हीं से मुहब्बत करता है जो सच्चे दिल से उसके दीन पर क़ायम रहते हैं।
🎧 सुनें

📜 आयत 55-59 — अत-तौबा

55فَلَا تُعْجِبْكَ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُمْ ۚ إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِهَا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَتَزْهَقَ أَنفُسُهُمْ وَهُمْ كَافِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम को न तो उनके माल हैरत में डाले और न उनकी औलाद (क्योंकि) ख़ुदा तो ये चाहता है कि उनको आल व माल की वजह से दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी (ही) में मुबितलाए अज़ाब करे और जब उनकी जानें निकलें तब भी वह काफिर (के काफिर ही) रहें
56وَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ إِنَّهُمْ لَمِنكُمْ وَمَا هُم مِّنكُمْ وَلَٰكِنَّهُمْ قَوْمٌ يَفْرَقُونَ
और (मुसलमानों) ये लोग ख़ुदा की क़सम खाएंगे फिर वह तुममें ही के हैं हालॉकि वह लोग तुममें के नहीं हैं मगर हैं ये लोग बुज़दिल हैं
57لَوْ يَجِدُونَ مَلْجَأً أَوْ مَغَارَاتٍ أَوْ مُدَّخَلًا لَّوَلَّوْا إِلَيْهِ وَهُمْ يَجْمَحُونَ
कि गर कहीं ये लोग पनाह की जगह (क़िले) या (छिपने के लिए) ग़ार या घुस बैठने की कोई (और) जगह पा जाए तो उसी तरफ रस्सियाँ तोड़ाते हुए भाग जाएँ
58وَمِنْهُم مَّن يَلْمِزُكَ فِي الصَّدَقَاتِ فَإِنْ أُعْطُوا مِنْهَا رَضُوا وَإِن لَّمْ يُعْطَوْا مِنْهَا إِذَا هُمْ يَسْخَطُونَ
(ऐ रसूल) उनमें से कुछ तो ऐसे भी हैं जो तुम्हें ख़ैरात (की तक़सीम) में (ख्वाह मा ख्वाह) इल्ज़ाम देते हैं फिर अगर उनमे से कुछ (माक़ूल मिक़दार(हिस्सा)) दे दिया गया तो खुश हो गए और अगर उनकी मर्ज़ी के मुवाफिक़ उसमें से उन्हें कुछ नहीं दिया गया तो बस फौरन ही बिगड़ बैठे
59وَلَوْ أَنَّهُمْ رَضُوا مَا آتَاهُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ وَقَالُوا حَسْبُنَا اللَّهُ سَيُؤْتِينَا اللَّهُ مِن فَضْلِهِ وَرَسُولُهُ إِنَّا إِلَى اللَّهِ رَاغِبُونَ
और जो कुछ ख़ुदा ने और उसके रसूल ने उनको अता फरमाया था अगर ये लोग उस पर राज़ी रहते और कहते कि ख़ुदा हमारे वास्ते काफी है (उस वक्त नहीं तो) अनक़रीब ही खुदा हमें अपने फज़ल व करम से उसका रसूल दे ही देगा हम तो यक़ीनन अल्लाह ही की तरफ लौ लगाए बैठे हैं
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अनुवाद — अत-तौबा 57

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Tuesday, August 18, 2026

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