Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَحْلِفُونَ بِاللَّهِ: वे अल्लाह की क़समें खाते हैं।
- لَمِنكُمْ: वे तुम्हीं में से हैं (तुम्हारे साथ हैं)।
- يَفْرَقُونَ: वे डरते हैं (भयभीत होते हैं)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये मुनाफ़िक़ (दिखावटी मुसलमान) झूठी क़समें खाकर तुम ईमानवालों से कहते हैं कि "हम तुम्हीं में से हैं और तुम्हारे धर्म पर हैं।" लेकिन वास्तव में वे तुममें से नहीं हैं, क्योंकि उनके दिल कुफ़्र (अविश्वास) से भरे हुए हैं और उन्होंने केवल ज़ुबान से इस्लाम क़बूल किया है। उनका यह दावा झूठ है, और वे केवल इसलिए ऐसा कहते हैं क्योंकि वे डरते हैं—डरते हैं कि कहीं तुम उन्हें मुशरिकों (बहुदेववादियों) की तरह सज़ा न दे दो, या उन्हें क़त्ल और क़ैद का सामना न करना पड़े। इसी डर की वजह से वे अपने असली चेहरे को छिपाकर तुम्हारे सामने इस्लाम का दिखावा करते हैं और तुम्हें खुश करने के लिए झूठी क़समें खाते हैं।
फ़ायदे (सीख):
- मुनाफ़िक़ों की पहचान यह है कि वे झूठी क़समें खाकर अपनी बात को सच साबित करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनके दिल सच्चाई से खाली होते हैं।
- डर और भय इंसान को झूठ बोलने और दिखावा करने पर मजबूर कर देता है, इसलिए मोमिन को चाहिए कि वह सिर्फ अल्लाह से डरे और सच्चाई पर क़ायम रहे।
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे लोगों के बाहरी हालात से धोखा न खाएं, बल्कि उनकी नीयत और अमल को परखें।
- अल्लाह का डर इंसान को सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलाता है, जबकि मख़लूक़ (लोगों) का डर इंसान को मुनाफ़िक़ी और झूठ की तरफ ले जाता है।
- यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपने भाईचारे को मज़बूत करें और मुनाफ़िक़ों के नुक़्सान से बचने के लिए हमेशा चौकन्ने रहें।
📜 आयत 54-58 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 56
सूरा अत-तौबा आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुसलमानों) ये लोग ख़ुदा की क़सम खाएंगे फिर वह…सूरा आयत 56/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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