अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الضحى (अज़-ज़ुहा): दिन का वह समय जब सूर्य पूरी तरह ऊपर चढ़ जाता है और उसका प्रकाश पूरी दुनिया में फैल जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ है "चमकता हुआ प्रकाश" या "दिन का पहला भाग"।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में "ज़ुहा" (दिन के चमकते हुए समय) की क़सम खाई है। यह वह समय है जब सूरज पूरी तरह निकल आता है और उसकी रोशनी पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। इस क़सम के माध्यम से अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को संबोधित कर रहे हैं। यहाँ "ज़ुहा" से मुराद पूरा दिन भी लिया जा सकता है, क्योंकि अगली आयत में इसके मुक़ाबले रात का ज़िक्र आएगा।
अल्लाह तआला ने अपनी मख़लूक़ात (सृष्टि) में से जिस चीज़ पर चाहे क़सम खा सकता है, क्योंकि वह उन सबका मालिक है। लेकिन किसी मख़लूक़ (प्राणी) के लिए जायज़ नहीं कि वह अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम खाए, क्योंकि अल्लाह के सिवा किसी और की क़सम खाना शिर्क है।
इस क़सम का मक़सद यह है कि अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को यक़ीन दिलाना चाहते हैं कि उनका रब उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा और न ही उनसे नाराज़ होगा। यह उस समय की बात है जब वही (प्रकाशना) कुछ दिनों के लिए रुक गई थी, जिससे नबी ﷺ बहुत दुखी और चिंतित थे। अल्लाह तआला ने इस क़सम के ज़रिए उन्हें तसल्ली दी कि यह रुकना उनके त्याग या नाराज़गी की वजह से नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) का हिस्सा है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों से कितना प्यार करता है। जब नबी ﷺ पर वही रुकी, तो अल्लाह ने उन्हें तसल्ली दी और बताया कि वह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। यह हमारे लिए भी एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह अपने प्यारे बंदों को कभी नहीं भूलता। चाहे हम पर मुश्किलें आएं या कुछ समय के लिए अल्लाह की मदद में देर हो, हमें यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह हमेशा हमारे साथ है। यह आयत हमें अल्लाह पर भरोसा और उसकी रहमत से उम्मीद रखने की तालीम देती है। जिस तरह सूरज की रोशनी दिन को रोशन करती है, उसी तरह अल्लाह की रहमत और मदद हर मुसीबत के बाद आती है।
📜 आयत 1-3 — अद-दुहा
अनुवाद — अद-दुहा 1
सूरा अद-दुहा आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़समसूरा आयत 1/11 — अद-दुहा الضحى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अद-दुहा सुनें, अद-दुहा अनुवाद, अद-दुहा mp3, अद-दुहा pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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