अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِنِعْمَةِ رَبِّكَ (तेरे रब की नेमत): यानी अल्लाह की वह सारी नेमतें जो उसने तुझ पर इनाम कीं, जैसे नबुव्वत (पैग़म्बरी), हिदायत, इल्म, और दुनिया की दूसरी नेमतें।
- فَحَدِّثْ (तो तू ज़िक्र कर): यानी इन नेमतों का ज़िक्र कर, उन्हें बयान कर और लोगों को बताकर अल्लाह का शुक्र अदा कर।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को ख़िताब करके फ़रमाता है कि जब तेरे रब ने तुझ पर ये बड़ी नेमतें नाज़िल की हैं—नबुव्वत, हिदायत, और दूसरी दुनियावी व आख़िरती भलाइयाँ—तो तू इन नेमतों का ज़िक्र कर, लोगों को बताता रह, और उन्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाता रह। ये ज़िक्र सिर्फ़ शुक्र अदा करने के लिए है, न कि फ़ख़्र (घमंड) या दिखावे के लिए। जब कोई बंदा अल्लाह की नेमतों का ज़िक्र करता है, तो ये उसकी शुक्रगुज़ारी की निशानी है, और अल्लाह ऐसे बंदे की नेमतों में और बरकत देता है।
ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने हमें जो भी नेमतें दी हैं—चाहे वो दीन की हो या दुनिया की—हमें उनका ज़िक्र करना चाहिए, लोगों को बताना चाहिए, और उन नेमतों के ज़रिए लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाना चाहिए। ये शुक्र का सबसे बेहतरीन तरीक़ा है।
और याद रखो, नेमतों का ज़िक्र करने का मतलब ये नहीं कि हम अपनी तारीफ़ करें या लोगों पर फ़ख़्र करें, बल्कि मक़सद ये होना चाहिए कि लोग अल्लाह की नेमतों को पहचानें, उसका शुक्र अदा करें, और उसकी इबादत की तरफ़ राग़िब हों। जब हम अल्लाह की नेमतों का ज़िक्र करते हैं, तो हमारा दिल शुक्र से भर जाता है, और ये शुक्र हमारे ईमान को मज़बूत करता है।
अल्लाह तआला हम सबको अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन नेमतों को सही तरीक़े से ज़िक्र करने की हिम्मत अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 9-11 — अद-दुहा
अनुवाद — अद-दुहा 11
सूरा अद-दुहा आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहनासूरा आयत 11/11 — अद-दुहा الضحى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अद-दुहा सुनें, अद-दुहा अनुवाद, अद-दुहा mp3, अद-दुहा pdf. आयत 9–11. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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