Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الضُّرّ (अल-ज़ुर्र): कष्ट, विपत्ति, बीमारी या कोई भी कठिनाई।
- لِجَنبِهِ (लि-जन्बिही): करवट के बल लेटा हुआ।
- مَرَّ (मर्रा): आगे बढ़ गया, अपनी पिछली स्थिति पर लौट गया।
- كَأَن لَّمْ يَدْعُنَا (कअन लम यद'उना): ऐसे चला गया जैसे उसने हमें पुकारा ही नहीं था।
- الْمُسْرِفِينَ (अल-मुसरिफ़ीन): हद से गुज़रने वाले, सीमा का उल्लंघन करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब किसी इंसान पर कोई मुसीबत आती है—चाहे वह बीमारी हो, तंगदस्ती हो या कोई और कठिनाई—तो वह अपनी हालत में अल्लाह को पुकारने लगता है। वह करवट के बल लेटा हो, बैठा हो या खड़ा हो, हर अवस्था में वह अल्लाह से दुआ करता है और उससे राहत माँगता है। वह अपनी कमज़ोरी और लाचारी का इज़हार करते हुए अल्लाह की तरफ़ रुजू करता है।
लेकिन जब अल्लाह उसकी दुआ सुन लेता है और उस पर से वह मुसीबत हटा देता है, तो वह इंसान अपनी पिछली हालत पर लौट जाता है। वह ऐसे चल देता है जैसे उसने कभी अल्लाह को पुकारा ही नहीं था, और जैसे उसे कोई तकलीफ़ हुई ही नहीं। वह उस एहसान को भूल जाता है जो अल्लाह ने उस पर किया, और न ही वह अल्लाह का शुक्र अदा करता है। वह अपनी उसी पुरानी ज़िंदगी में लग जाता है जो उससे पहले थी।
यही हाल उन लोगों का है जो अल्लाह की नाफ़रमानी में हद से गुज़र जाते हैं। उनके लिए उनके बुरे काम खूबसूरत बना दिए गए हैं, इसलिए वे अपनी ग़लतियों पर अड़े रहते हैं। उन्हें अपना यह रवैया अच्छा लगता है—मुसीबत में अल्लाह को पुकारना और राहत मिलने पर उसे भूल जाना, शुक्र न करना और अपनी पुरानी हालत पर लौट जाना। यह उनके लिए सजाया हुआ काम बन गया है, इसलिए वे इसी पर चलते रहते हैं।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह हर हाल में पुकारने वाला है: यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत के वक़्त इंसान चाहे किसी भी हालत में हो—लेटा हो, बैठा हो या खड़ा—उसे अल्लाह से दुआ करनी चाहिए। अल्लाह हर हाल में सुनता है और उसकी रहमत हर वक़्त मौजूद है।
- शुक्र अदा करने की तालीम: जब अल्लाह हमारी मुसीबत हटाता है, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसे कभी नहीं भूलना चाहिए। शुक्र अदा करने से अल्लाह और नेमतें बढ़ाता है, जबकि नाशुक्री इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है।
- ग़फ़लत से बचाव: यह आयत हमें उस इंसान की तरह बनने से बचाती है जो मुसीबत में अल्लाह को याद करता है और राहत मिलते ही उसे भूल जाता है। हमें हर हाल में अल्लाह को याद रखना चाहिए—खुशी में भी और ग़म में भी।
- बुरे कामों की सजावट का ख़तरा: जब इंसान लगातार बुरे काम करता है, तो वे काम उसे अच्छे लगने लगते हैं और वह अपनी ग़लतियों को सही समझने लगता है। यह एक बड़ा ख़तरा है, इसलिए हमें अपने अमल की लगातार जाँच करते रहना चाहिए और अल्लाह से हिदायत की दुआ करते रहना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत करीब है। जब इंसान सच्चे दिल से अल्लाह को पुकारता है, तो अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर सुनता है और उसकी मुसीबत दूर करता है। यह हमें अल्लाह पर भरोसा रखने और उससे उम्मीद न छोड़ने की तालीम देती है।
📜 आयत 10-14 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 12
सूरा यूनुस आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इन्सान को जब कोई नुकसान छू भी गया तो…सूरा आयत 12/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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