Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُعَجِّلُ: जल्दी करना, शीघ्र कर देना।
- الشَّرَّ: बुराई, हानि, वह चीज़ जो इंसान अपने लिए अच्छी न समझे।
- اسْتِعْجَالَهُم بِالْخَيْرِ: जिस तरह वे भलाई (अच्छी चीज़) के लिए जल्दी माँगते हैं।
- لَقُضِيَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ: उनकी मृत्यु का समय पूरा कर दिया जाता, यानी वे हलाक कर दिए जाते।
- لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا: जो हमारे मिलन (आख़िरत) की उम्मीद नहीं रखते, यानी जो हिसाब-किताब और जी उठने पर ईमान नहीं रखते।
- طُغْيَانِهِمْ: उनकी सरकशी, हद से गुज़र जाना।
- يَعْمَهُونَ: भटकते हुए, हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी रहमत और हिकमत का एक बड़ा पहलू बयान किया है। जिस तरह लोग भलाई माँगते समय जल्दी करते हैं, अगर अल्लाह उनकी बुराई (शर) की दुआ को भी उसी जल्दी से क़ुबूल कर लेता — यानी जब कोई इंसान ग़ुस्से में आकर अपने आप पर, अपनी औलाद पर या अपने माल पर बुराई की दुआ करता है और अल्लाह उसे तुरंत पूरा कर देता — तो सारे लोग हलाक हो जाते और उनकी मौत का वक़्त आ जाता। मगर अल्लाह अपनी मेहरबानी से ऐसा नहीं करता, बल्कि वह अपने बंदों पर रहम करता है और उन्हें मोहलत देता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जो लोग हमारी मुलाक़ात (क़यामत के दिन) की उम्मीद नहीं रखते, यानी जो आख़िरत, हिसाब और अज़ाब से डरते नहीं, उन्हें हम उनकी सरकशी और ज़्यादती में भटकने के लिए छोड़ देते हैं। वे अपने कु़फ़्र और गुमराही में हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं। यह उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से एक तरह की ढील और इस्तिदराज (आहिस्ता-आहिस्ता पकड़) है, ताकि वे और ज़्यादा गुनाहों में डूबते जाएँ और फिर उन्हें अपने किए की सज़ा मिले।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह तआला बहुत रहम करने वाला है — वह अपने बंदों की बुरी दुआओं को तुरंत क़ुबूल नहीं करता, क्योंकि इंसान अक्सर ग़ुस्से या जज़्बाती हालत में ऐसी चीज़ें माँग बैठता है जो उसके लिए नुक़्सानदेह होती हैं। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हमारी इस कमज़ोरी पर पर्दा डालता है।
- इंसान को चाहिए कि वह अपनी दुआओं में भलाई माँगे और बुराई की दुआ से बचे, क्योंकि उसे नहीं मालूम कि उसके लिए क्या बेहतर है। अल्लाह ही जानता है कि बंदे के लिए किस वक़्त क्या मुनासिब है।
- आख़िरत पर ईमान और अल्लाह के सामने पेश होने का यक़ीन इंसान को गुनाहों से रोकता है। जिसे यक़ीन नहीं होता, वह अपनी सरकशी में बढ़ता चला जाता है और अंजाम में तबाही उठाता है।
- अल्लाह की ढील (मोहलत) किसी के लिए इत्मीनान की चीज़ नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह एक चेतावनी है कि शायद वह हमें और बढ़ने दे रहा है ताकि हमारी पकड़ और सख़्त हो।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी में सब्र और शुक्र के साथ रहें, और अल्लाह से हमेशा भलाई की दुआ करें, क्योंकि वही सबसे बेहतर जानने वाला है।
📜 आयत 9-13 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 11
सूरा यूनुस आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर…सूरा आयत 11/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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