यूनुस · 11/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
۞ وَلَوْ يُعَجِّلُ اللَّهُ لِلنَّاسِ الشَّرَّ اسْتِعْجَالَهُم بِالْخَيْرِ لَقُضِيَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ ۖ فَنَذَرُ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ ۝١١
Wa law yu`aijilul laahu linnaasish sharras ti`jaalahum bilkhairi laqudiya ilaihim ajaluhum fanazarul lazeena laa yarjoona liqaaa`anna fee tughyaanihim ya`mahoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर बैठे हैं उसी तरह अगर ख़ुदा उनकी शरारतों की सज़ा में बुराई में जल्दी कर बैठता है तो उनकी मौत उनके पास कब की आ चुकी होती मगर हम तो उन लोगों को जिन्हें (मरने के बाद) हमारी हुज़ूरी का खटका नहीं छोड़ देते हैं कि वह अपनी सरकशी में आप सरग़िरदा रहें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُعَجِّلُ: जल्दी करना, शीघ्र कर देना।
  • الشَّرَّ: बुराई, हानि, वह चीज़ जो इंसान अपने लिए अच्छी न समझे।
  • اسْتِعْجَالَهُم بِالْخَيْرِ: जिस तरह वे भलाई (अच्छी चीज़) के लिए जल्दी माँगते हैं।
  • لَقُضِيَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ: उनकी मृत्यु का समय पूरा कर दिया जाता, यानी वे हलाक कर दिए जाते।
  • لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا: जो हमारे मिलन (आख़िरत) की उम्मीद नहीं रखते, यानी जो हिसाब-किताब और जी उठने पर ईमान नहीं रखते।
  • طُغْيَانِهِمْ: उनकी सरकशी, हद से गुज़र जाना।
  • يَعْمَهُونَ: भटकते हुए, हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी रहमत और हिकमत का एक बड़ा पहलू बयान किया है। जिस तरह लोग भलाई माँगते समय जल्दी करते हैं, अगर अल्लाह उनकी बुराई (शर) की दुआ को भी उसी जल्दी से क़ुबूल कर लेता — यानी जब कोई इंसान ग़ुस्से में आकर अपने आप पर, अपनी औलाद पर या अपने माल पर बुराई की दुआ करता है और अल्लाह उसे तुरंत पूरा कर देता — तो सारे लोग हलाक हो जाते और उनकी मौत का वक़्त आ जाता। मगर अल्लाह अपनी मेहरबानी से ऐसा नहीं करता, बल्कि वह अपने बंदों पर रहम करता है और उन्हें मोहलत देता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जो लोग हमारी मुलाक़ात (क़यामत के दिन) की उम्मीद नहीं रखते, यानी जो आख़िरत, हिसाब और अज़ाब से डरते नहीं, उन्हें हम उनकी सरकशी और ज़्यादती में भटकने के लिए छोड़ देते हैं। वे अपने कु़फ़्र और गुमराही में हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं। यह उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से एक तरह की ढील और इस्तिदराज (आहिस्ता-आहिस्ता पकड़) है, ताकि वे और ज़्यादा गुनाहों में डूबते जाएँ और फिर उन्हें अपने किए की सज़ा मिले।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह तआला बहुत रहम करने वाला है — वह अपने बंदों की बुरी दुआओं को तुरंत क़ुबूल नहीं करता, क्योंकि इंसान अक्सर ग़ुस्से या जज़्बाती हालत में ऐसी चीज़ें माँग बैठता है जो उसके लिए नुक़्सानदेह होती हैं। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हमारी इस कमज़ोरी पर पर्दा डालता है।
  2. इंसान को चाहिए कि वह अपनी दुआओं में भलाई माँगे और बुराई की दुआ से बचे, क्योंकि उसे नहीं मालूम कि उसके लिए क्या बेहतर है। अल्लाह ही जानता है कि बंदे के लिए किस वक़्त क्या मुनासिब है।
  3. आख़िरत पर ईमान और अल्लाह के सामने पेश होने का यक़ीन इंसान को गुनाहों से रोकता है। जिसे यक़ीन नहीं होता, वह अपनी सरकशी में बढ़ता चला जाता है और अंजाम में तबाही उठाता है।
  4. अल्लाह की ढील (मोहलत) किसी के लिए इत्मीनान की चीज़ नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह एक चेतावनी है कि शायद वह हमें और बढ़ने दे रहा है ताकि हमारी पकड़ और सख़्त हो।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी में सब्र और शुक्र के साथ रहें, और अल्लाह से हमेशा भलाई की दुआ करें, क्योंकि वही सबसे बेहतर जानने वाला है।
🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — यूनुस

9إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ يَهْدِيهِمْ رَبُّهُم بِإِيمَانِهِمْ ۖ تَجْرِي مِن تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें उनका परवरदिगार उनके ईमान के सबब से मंज़िल मक़सूद तक पहुँचा देगा कि आराम व आसाइश के बाग़ों में (रहेगें) और उन के नीचे नहरें जारी होगी
10دَعْوَاهُمْ فِيهَا سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَتَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَامٌ ۚ وَآخِرُ دَعْوَاهُمْ أَنِ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
उन बाग़ों में उन लोगों का बस ये कौल होगा ऐ ख़ुदा तू पाक व पाकीज़ा है और उनमें उनकी बाहमी (आपसी) खैरसलाही (मुलाक़ात) सलाम से होगी और उनका आख़िरी क़ौल ये होगा कि सब तारीफ ख़ुदा ही को सज़ावार है जो सारे जहाँन का पालने वाला है
11۞ وَلَوْ يُعَجِّلُ اللَّهُ لِلنَّاسِ الشَّرَّ اسْتِعْجَالَهُم بِالْخَيْرِ لَقُضِيَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ ۖ فَنَذَرُ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
और जिस तरह लोग अपनी भलाई के लिए जल्दी कर बैठे हैं उसी तरह अगर ख़ुदा उनकी शरारतों की सज़ा में बुराई में जल्दी कर बैठता है तो उनकी मौत उनके पास कब की आ चुकी होती मगर हम तो उन लोगों को जिन्हें (मरने के बाद) हमारी हुज़ूरी का खटका नहीं छोड़ देते हैं कि वह अपनी सरकशी में आप सरग़िरदा रहें
12وَإِذَا مَسَّ الْإِنسَانَ الضُّرُّ دَعَانَا لِجَنبِهِ أَوْ قَاعِدًا أَوْ قَائِمًا فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُ ضُرَّهُ مَرَّ كَأَن لَّمْ يَدْعُنَا إِلَىٰ ضُرٍّ مَّسَّهُ ۚ كَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِلْمُسْرِفِينَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और इन्सान को जब कोई नुकसान छू भी गया तो अपने पहलू पर (लेटा हो) या बैठा हो या ख़ड़ा (गरज़ हर हालत में) हम को पुकारता है फिर जब हम उससे उसकी तकलीफ को दूर कर देते है तो ऐसा खिसक जाता है जैसे उसने तकलीफ के (दफा करने के) लिए जो उसको पहुँचती थी हमको पुकारा ही न था जो लोग ज्यादती करते हैं उनकी कारस्तानियाँ यूँ ही उन्हें अच्छी कर दिखाई गई हैं
13وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا الْقُرُونَ مِن قَبْلِكُمْ لَمَّا ظَلَمُوا ۙ وَجَاءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ وَمَا كَانُوا لِيُؤْمِنُوا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِمِينَ
और तुमसे पहली उम्मत वालों को जब उन्होंने शरारत की तो हम ने उन्हें ज़रुर हलाक कर डाला हालॉकि उनके (वक्त क़े) रसूल वाजेए व रौशन मोज़िज़ात लेकर आ चुके थे और वह लोग ईमान (न लाना था) न लाए हम गुनेहगार लोगों की यूँ ही सज़ा किया करते हैं
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अनुवाद — यूनुस 11

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Tuesday, August 18, 2026

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