Wa maa kaanan naasu illaaa ummmatanw waahidatan fakh talafoo; wa law laa kalimatun sabaqat mir Rabbika laqudiya bainahum fee maa feehi yakhtalifoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरमियान (कब न कब) कर दिया गया होता
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اور (سب) لوگ (پہلے) ایک ہی اُمت (یعنی ایک ہی ملت پر) تھے۔ پھر جدا جدا ہوگئے۔ اور اگر ایک بات جو تمہارے پروردگار کی طرف سے پہلے ہوچکی ہے نہ ہوتی تو جن باتوں میں وہ اختلاف کرتے ہیں ان میں فیصلہ کر دیا جاتا
أُمَّةً وَاحِدَةً: एक ही उम्मत (समुदाय), अर्थात एक ही धर्म और एक ही मार्ग पर चलने वाले।
فَاخْتَلَفُوا: फिर उन्होंने आपस में मतभेद किया और अलग-अलग रास्ते अपना लिए।
كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ: एक बात (फ़ैसला) जो आपके रब की ओर से पहले ही तय हो चुकी है, अर्थात अज़ल से लिखा हुआ फ़ैसला।
لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ: उनके बीच (इसी दुनिया में) फ़ैसला कर दिया जाता।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मानव इतिहास की शुरुआत की ओर इशारा करती है। सारे इंसान शुरू में एक ही उम्मत थे, यानी सब एक ही धर्म (तौहीद और इस्लाम) पर थे। हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर कुछ समय तक लोग एक ही मार्ग पर चलते रहे। फिर धीरे-धीरे उनमें मतभेद पैदा हुआ — कुछ ने सच्चाई को क़ुबूल किया और कुछ ने उसे ठुकरा दिया। कुछ ईमान पर क़ायम रहे और कुछ कुफ़्र में चले गए। यह इख़्तिलाफ़ (मतभेद) अल्लाह की इजाज़त से उसकी हिक्मत (बुद्धिमत्ता) के तहत हुआ, ताकि सच और झूठ सामने आ सके।
अल्लाह फ़रमाता है: अगर उसकी ओर से पहले से यह बात तय न होती कि उसने लोगों को उनकी ग़लतियों पर फौरन पकड़ने की बजाय एक निश्चित समय तक मोहलत देनी है, और उनके बीच आख़िरत में फ़ैसला करना है, तो इसी दुनिया में उनके बीच फ़ैसला कर दिया जाता — यानी झूठ और बातिल पर चलने वालों को हलाक कर दिया जाता और हक़ (सच्चाई) पर चलने वालों को बचा लिया जाता। लेकिन अल्लाह की मोहलत देने वाली कलिमा (बात) पहले से तय हो चुकी है, इसलिए फ़ैसला क़यामत के दिन के लिए टाल दिया गया है, ताकि लोगों को दुनिया में अमल करने का मौक़ा मिले और उनकी आज़माइश (परीक्षा) पूरी हो।
फ़ायदे (सबक):
इंसानियत की असली पहचान एकता है: शुरुआत में सब इंसान एक ही धर्म और एक ही मार्ग पर थे। यह बताता है कि इस्लाम ही फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) का दीन है, और मतभेद बाद में पैदा हुए।
अल्लाह की मोहलत उसकी रहमत है: अगर अल्लाह फौरन पकड़ लेता, तो कोई भी तौबा (पश्चाताप) का मौक़ा न पाता। उसकी मोहलत हमें तौबा करने और अपने अमल सुधारने का मौक़ा देती है।
आज़माइश का मक़सद: यह दुनिया इम्तिहान (परीक्षा) की जगह है। अच्छे और बुरे का फ़र्क़ यहीं सामने आता है, और असली फ़ैसला क़यामत के दिन होगा।
हक़ पर साबित क़दम रहना: जब मतभेद पैदा हो जाएं, तो मोमिन का फ़र्ज़ है कि वह हक़ (सच्चाई) पर डटा रहे, चाहे अक्सरियत (बहुमत) उसके ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।
अल्लाह के फ़ैसले पर भरोसा: अल्लाह का हर फ़ैसला हिक्मत पर आधारित है। देर से फ़ैसला होना उसकी मोहलत और रहमत का तक़ाज़ा है, और यह हमें सब्र और भरोसे की तालीम देता है।
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरमियान (कब न कब) कर दिया गया होता
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते तो जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतो को झुठलाए उससे बढ़ कर और ज़ालिम कौन होगा इसमें शक़ नहीं कि (ऐसे) गुनाहगार कामयाब नहीं हुआ करते
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिशी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरमियान (कब न कब) कर दिया गया होता
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाज़िल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) लिखते जाते हैं
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