Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّةً وَاحِدَةً: एक ही उम्मत (समुदाय), अर्थात एक ही धर्म और एक ही मार्ग पर चलने वाले।
- فَاخْتَلَفُوا: फिर उन्होंने आपस में मतभेद किया और अलग-अलग रास्ते अपना लिए।
- كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ: एक बात (फ़ैसला) जो आपके रब की ओर से पहले ही तय हो चुकी है, अर्थात अज़ल से लिखा हुआ फ़ैसला।
- لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ: उनके बीच (इसी दुनिया में) फ़ैसला कर दिया जाता।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मानव इतिहास की शुरुआत की ओर इशारा करती है। सारे इंसान शुरू में एक ही उम्मत थे, यानी सब एक ही धर्म (तौहीद और इस्लाम) पर थे। हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर कुछ समय तक लोग एक ही मार्ग पर चलते रहे। फिर धीरे-धीरे उनमें मतभेद पैदा हुआ — कुछ ने सच्चाई को क़ुबूल किया और कुछ ने उसे ठुकरा दिया। कुछ ईमान पर क़ायम रहे और कुछ कुफ़्र में चले गए। यह इख़्तिलाफ़ (मतभेद) अल्लाह की इजाज़त से उसकी हिक्मत (बुद्धिमत्ता) के तहत हुआ, ताकि सच और झूठ सामने आ सके।
अल्लाह फ़रमाता है: अगर उसकी ओर से पहले से यह बात तय न होती कि उसने लोगों को उनकी ग़लतियों पर फौरन पकड़ने की बजाय एक निश्चित समय तक मोहलत देनी है, और उनके बीच आख़िरत में फ़ैसला करना है, तो इसी दुनिया में उनके बीच फ़ैसला कर दिया जाता — यानी झूठ और बातिल पर चलने वालों को हलाक कर दिया जाता और हक़ (सच्चाई) पर चलने वालों को बचा लिया जाता। लेकिन अल्लाह की मोहलत देने वाली कलिमा (बात) पहले से तय हो चुकी है, इसलिए फ़ैसला क़यामत के दिन के लिए टाल दिया गया है, ताकि लोगों को दुनिया में अमल करने का मौक़ा मिले और उनकी आज़माइश (परीक्षा) पूरी हो।
फ़ायदे (सबक):
- इंसानियत की असली पहचान एकता है: शुरुआत में सब इंसान एक ही धर्म और एक ही मार्ग पर थे। यह बताता है कि इस्लाम ही फ़ितरत (प्राकृतिक स्वभाव) का दीन है, और मतभेद बाद में पैदा हुए।
- अल्लाह की मोहलत उसकी रहमत है: अगर अल्लाह फौरन पकड़ लेता, तो कोई भी तौबा (पश्चाताप) का मौक़ा न पाता। उसकी मोहलत हमें तौबा करने और अपने अमल सुधारने का मौक़ा देती है।
- आज़माइश का मक़सद: यह दुनिया इम्तिहान (परीक्षा) की जगह है। अच्छे और बुरे का फ़र्क़ यहीं सामने आता है, और असली फ़ैसला क़यामत के दिन होगा।
- हक़ पर साबित क़दम रहना: जब मतभेद पैदा हो जाएं, तो मोमिन का फ़र्ज़ है कि वह हक़ (सच्चाई) पर डटा रहे, चाहे अक्सरियत (बहुमत) उसके ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।
- अल्लाह के फ़ैसले पर भरोसा: अल्लाह का हर फ़ैसला हिक्मत पर आधारित है। देर से फ़ैसला होना उसकी मोहलत और रहमत का तक़ाज़ा है, और यह हमें सब्र और भरोसे की तालीम देता है।
📜 आयत 17-21 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 19
सूरा यूनुस आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग…सूरा आयत 19/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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