यूनुस · 18/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُمْ وَلَا يَنفَعُهُمْ وَيَقُولُونَ هَٰؤُلَاءِ شُفَعَاؤُنَا عِندَ اللَّهِ ۚ قُلْ أَتُنَبِّئُونَ اللَّهَ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ ۝١٨
Wa ya`budoona min doonil laahi maa laa yadurruhum wa laa yanfa`uhum wa yaqooloona haaa`ulaaa`i shufa`aaa `unaa `indal laah; qul atunabbi `oonal laaha bima laa ya`lamu fis samaawaati wa laa fil ard; subhaanahoo wa Ta`aalaa `ammaa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिशी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • शुफ़आउना (شُفَعَاؤُنَا): हमारे सिफ़ारिशी, हमारे मध्यस्थ।
  • तुनब्बिऊन (أَتُنَبِّئُونَ): क्या तुम ख़बर देते हो, क्या तुम बताते हो।
  • सुब्हानहु (سُبْحَانَهُ): वह पाक है, हर कमी और दोष से मुक्त है।
  • ता'आला (تَعَالَى): वह बुलंद और उच्च है।

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो अल्लाह को छोड़कर ऐसी चीज़ों की इबादत करते हैं जो न उन्हें नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही फ़ायदा। ये मूर्तियाँ, पत्थर या कोई भी मख़लूक़ हैं जो न सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न किसी की मदद कर सकती हैं। फिर भी ये लोग कहते हैं: "ये हमारे सिफ़ारिशी हैं अल्लाह के पास, ये हमारे लिए सिफ़ारिश करेंगे।" यानी वे इन्हें अल्लाह और अपने बीच वसीला बनाते हैं, ताकि ये उनकी मदद करें।

अल्लाह तआला इनसे कहता है: "क्या तुम अल्लाह को उस चीज़ की ख़बर देते हो जो वह नहीं जानता? क्या तुम अल्लाह को बताते हो कि उसका कोई शरीक है, जबकि अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन में किसी को अपना शरीक या सिफ़ारिशी नहीं बनाया?" यह एक बहुत बड़ी तनबीह (चेतावनी) है — अल्लाह तो सब कुछ जानता है, उसके इल्म से कोई चीज़ पिन्हाँ नहीं है। अगर सच में कोई सिफ़ारिशी होता, तो अल्लाह उसे ज़रूर जानता। इसलिए यह दावा बिल्कुल झूठ और बेबुनियाद है।

फिर अल्लाह अपनी पाकी बयान करता है: "वह पाक है और बुलंद है उस शिर्क से जो ये लोग करते हैं।" यानी अल्लाह हर उस चीज़ से पाक है जो ये मुशरिकीन उसके साथ शरीक ठहराते हैं। वह इन बातों से बिल्कुल बराअत रखता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सिफ़ारिश और वसीला सिर्फ़ अल्लाह की इजाज़त से ही काम आता है, और वह भी उन्हीं लोगों के लिए जिनसे अल्लाह राज़ी हो। अल्लाह ने हमें सीधा रास्ता दिखाया है — उसी से सीधे माँगो, उसी से मदद माँगो, क्योंकि वही सुनने वाला, जानने वाला और क़ुदरत रखने वाला है। कोई भी मख़लूक़ — चाहे वह नबी हो, फ़रिश्ता हो या वली — बिना अल्लाह की इजाज़त के किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकता। इसलिए अपनी ज़रूरतें सीधे अल्लाह से माँगो, और उसकी इबादत को खालिस करो। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे उसी की तरफ रुजू करें, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है।



📜 आयत 16-20 — यूनुस

16قُل لَّوْ شَاءَ اللَّهُ مَا تَلَوْتُهُ عَلَيْكُمْ وَلَا أَدْرَاكُم بِهِ ۖ فَقَدْ لَبِثْتُ فِيكُمْ عُمُرًا مِّن قَبْلِهِ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा चाहता तो मै न तुम्हारे सामने इसको पढ़ता और न वह तुम्हें इससे आगाह करता क्योंकि मै तो (आख़िर) तुमने इससे पहले मुद्दतों रह चुका हूँ (और कभी 'वही' का नाम भी न लिया)
17فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۚ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الْمُجْرِمُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते तो जो शख़्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतो को झुठलाए उससे बढ़ कर और ज़ालिम कौन होगा इसमें शक़ नहीं कि (ऐसे) गुनाहगार कामयाब नहीं हुआ करते
18وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُمْ وَلَا يَنفَعُهُمْ وَيَقُولُونَ هَٰؤُلَاءِ شُفَعَاؤُنَا عِندَ اللَّهِ ۚ قُلْ أَتُنَبِّئُونَ اللَّهَ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिशी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है
19وَمَا كَانَ النَّاسُ إِلَّا أُمَّةً وَاحِدَةً فَاخْتَلَفُوا ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ فِيمَا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरमियान (कब न कब) कर दिया गया होता
20وَيَقُولُونَ لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ فَقُلْ إِنَّمَا الْغَيْبُ لِلَّهِ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाज़िल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ
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अनुवाद — यूनुस 18

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सूरा आयत 18/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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