यूनुस · 20/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَيَقُولُونَ لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ فَقُلْ إِنَّمَا الْغَيْبُ لِلَّهِ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ ۝٢٠
W yaqooloona law laaa unzila `alaihi aayatum mir Rabbihee faqul innamal ghaibu lillaahi fantaziroo innee ma`akum minal muntazireen
📖 हिंदी अर्थ
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाज़िल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَوْلَا — क्यों नहीं / क्यों नहीं उतारा गया?
  • آيَةٌ — निशानी, चमत्कार, प्रमाण
  • الْغَيْبُ — छिपी हुई बातें, वह ज्ञान जो केवल अल्लाह को है
  • فَانتَظِرُوا — तो इंतज़ार करो
  • مِنَ الْمُنتَظِرِينَ — इंतज़ार करने वालों में से

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत मक्का के काफ़िरों और मुशरिकों के उस रवैये का जवाब देती है, जो वे अल्लाह के रसूल ﷺ के खिलाफ अपनाए हुए थे। वे कहते थे कि मुहम्मद ﷺ पर उनके रब की ओर से कोई चमत्कारी निशानी क्यों नहीं उतारी गई? उनका मतलब था कि जैसे हम चाहते हैं, वैसा कोई भौतिक चमत्कार दिखाया जाए — जैसे पहाड़ से पानी निकलना, जमीन से खजाना निकलना, या आसमान से कोई किताब गिरना। वे ये सब इसलिए कहते थे कि वे सच्चाई को मानना नहीं चाहते थे, बल्कि बहाने बनाना चाहते थे।

अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को हिदायत दी कि आप उन्हें जवाब दें: "ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह को है।" यानी चमत्कारों का उतरना, उनका समय, उनकी किस्म — ये सब कुछ अल्लाह के इख्तियार में है। वह जब चाहे जैसा चाहे करता है। यह आपका काम नहीं है कि आप उनकी मांग पर चमत्कार पेश करें। आपका काम तो केवल पैग़ाम पहुंचाना है। अल्लाह की हिकमत में जो मसलहत होती है, वही वह करता है। अगर वह चाहता तो उनकी मांगी हुई निशानियां भी दिखा सकता था, लेकिन उसने अपनी हिकमत से ऐसा नहीं किया, क्योंकि वे लोग निशानियां देखकर भी ईमान नहीं लाने वाले थे — जैसा कि पिछली उम्मतों का हाल था।

फिर अल्लाह ने फरमाया: "तो तुम इंतज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करने वालों में से हूँ।" यानी जो अंजाम अल्लाह की तरफ से आना है — चाहे वो दुनिया में अज़ाब हो या आख़िरत में — उसका इंतज़ार करो। मैं भी उस वक़्त का इंतज़ार कर रहा हूँ जब अल्लाह सच्चे और झूठे के बीच फैसला करेगा और सच्चाई की मदद करेगा।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हमें अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और उसकी हिकमत पर यक़ीन करना चाहिए। जब हम सच्चाई पर होते हैं, तो हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह के फैसले का इंतज़ार करना चाहिए। अल्लाह कभी अपने सच्चे बंदों को नाकाम नहीं करता। वह हमेशा सच्चाई की मदद करता है, चाहे देर से ही सही। यही सब्र और भरोसा ही मोमिन की पहचान है।

🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — यूनुस

18وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُمْ وَلَا يَنفَعُهُمْ وَيَقُولُونَ هَٰؤُلَاءِ شُفَعَاؤُنَا عِندَ اللَّهِ ۚ قُلْ أَتُنَبِّئُونَ اللَّهَ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِي السَّمَاوَاتِ وَلَا فِي الْأَرْضِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
या लोग ख़ुदा को छोड़ कर ऐसी चीज़ की परसतिश करते है जो न उनको नुकसान ही पहुँचा सकती है न नफा और कहते हैं कि ख़ुदा के यहाँ यही लोग हमारे सिफारिशी होगे (ऐ रसूल) तुम (इनसे) कहो तो क्या तुम ख़ुदा को ऐसी चीज़ की ख़बर देते हो जिसको वह न तो आसमानों में (कहीं) पाता है और न ज़मीन में ये लोग जिस चीज़ को उसका शरीक बनाते है
19وَمَا كَانَ النَّاسُ إِلَّا أُمَّةً وَاحِدَةً فَاخْتَلَفُوا ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيْنَهُمْ فِيمَا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरमियान (कब न कब) कर दिया गया होता
20وَيَقُولُونَ لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۖ فَقُلْ إِنَّمَا الْغَيْبُ لِلَّهِ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाज़िल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ
21وَإِذَا أَذَقْنَا النَّاسَ رَحْمَةً مِّن بَعْدِ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُمْ إِذَا لَهُم مَّكْرٌ فِي آيَاتِنَا ۚ قُلِ اللَّهُ أَسْرَعُ مَكْرًا ۚ إِنَّ رُسُلَنَا يَكْتُبُونَ مَا تَمْكُرُونَ
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) लिखते जाते हैं
22هُوَ الَّذِي يُسَيِّرُكُمْ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا كُنتُمْ فِي الْفُلْكِ وَجَرَيْنَ بِهِم بِرِيحٍ طَيِّبَةٍ وَفَرِحُوا بِهَا جَاءَتْهَا رِيحٌ عَاصِفٌ وَجَاءَهُمُ الْمَوْجُ مِن كُلِّ مَكَانٍ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ أُحِيطَ بِهِمْ ۙ دَعَوُا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ لَئِنْ أَنجَيْتَنَا مِنْ هَٰذِهِ لَنَكُونَنَّ مِنَ الشَّاكِرِينَ
वह वही ख़ुदा है जो तुम्हें ख़ुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगे
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अनुवाद — यूनुस 20

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Tuesday, August 18, 2026

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