यूनुस · 27/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَالَّذِينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزَاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَا وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ مَّا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۖ كَأَنَّمَا أُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِّنَ اللَّيْلِ مُظْلِمًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ ۝٢٧
Wallazeena kasabus saiyi aati jazaaa`u saiyi`atim bimislihaa wa tarhaquhum zillah; maa lahum minal laahi min `aasimin ka annamaaa ughshiyat wujoohuhum qita `am minal laili muzlimaa; ulaaa`ika Ashaabun Naari hum feeha khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेशा रहेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ: बुरे कर्म कमाए, यानी पाप और गुनाह अर्जित किए।
  • تَرْهَقُهُمْ: उन्हें ढक लेगा, छा जाएगा।
  • ذِلَّةٌ: अपमान, रुसवाई और पस्ती।
  • عَاصِمٍ: बचाने वाला, रक्षा करने वाला।
  • أُغْشِيَتْ: ढक दी गईं, लपेट दी गईं।
  • قِطَعًا: टुकड़े, हिस्से (यहाँ अंधेरी रात के टुकड़े मुराद हैं)।

तफसीर:

जिन लोगों ने दुनिया में बुरे कर्म कमाए—चाहे वह कुफ्र हो, शिर्क हो या गुनाह के दूसरे रूप—उनकी सज़ा उनके कर्मों के बराबर ही दी जाएगी। यानी जैसा उन्होंने बोया, वैसा ही काटेंगे। अल्लाह उन्हें उनके बुरे कर्मों के अनुपात में ही अज़ाब देगा, न कम, न ज़्यादा। फिर उन पर रुसवाई और अपमान की ऐसी छा जाएगी जो उन्हें पूरी तरह ढक लेगी। उस वक़्त अल्लाह के अज़ाब से बचाने वाला कोई न होगा—न कोई सिफ़ारिशी, न कोई मददगार, न कोई पनाह देने वाला। उनके चेहरे ऐसे स्याह हो जाएँगे जैसे अंधेरी रात के टुकड़े उन पर लपेट दिए गए हों—जहन्नम के धुएँ और कालिख से उनके चेहरे सियाह हो जाएँगे। यही लोग आग के रहने वाले हैं, और वे उसमें हमेशा-हमेशा रहेंगे। उनके लिए कभी रिहाई नहीं होगी, और न ही उनकी सज़ा में कोई कमी की जाएगी।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की सज़ा बिल्कुल इंसाफ़ पर है—जैसा कर्म, वैसा बदला। यह अल्लाह का न्याय है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता।
  2. बुरे कर्मों का नतीजा सिर्फ़ आग नहीं, बल्कि रुसवाई और अपमान भी है। यानी गुनाह की शर्मिंदगी और ज़िल्लत उसका लाज़िमी हिस्सा है।
  3. क़यामत के दिन कोई भी इंसान किसी को अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकेगा। इसलिए आज ही अल्लाह की राह पर चलना और उसकी पनाह लेना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
  4. यह आयत हमें गुनाहों से बचने की तरग़ीब देती है और बताती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी उन लोगों के लिए है जो तौबा करें और नेक कर्म अपनाएँ।
  5. इससे यह भी पता चलता है कि दुनिया में इंसान जो करता है, उसका हिसाब पूरा-पूरा होगा। इसलिए हर काम सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि हर कर्म का नतीजा सामने आना है।
🎧 सुनें

📜 आयत 25-29 — यूनुस

25وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَىٰ دَارِ السَّلَامِ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहश्त) की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है
26۞ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आख़िरत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न (उन्हें ज़िल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे
27وَالَّذِينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزَاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَا وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ مَّا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۖ كَأَنَّمَا أُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِّنَ اللَّيْلِ مُظْلِمًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेशा रहेंगे
28وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ أَنتُمْ وَشُرَكَاؤُكُمْ ۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ ۖ وَقَالَ شُرَكَاؤُهُم مَّا كُنتُمْ إِيَّانَا تَعْبُدُونَ
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेंगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शरीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे
29فَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ إِن كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِلِينَ
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीRevelation
27आयत

अनुवाद — यूनुस 27

सूरा यूनुस आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह…

सूरा आयत 27/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए