यूनुस · 28/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ أَنتُمْ وَشُرَكَاؤُكُمْ ۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ ۖ وَقَالَ شُرَكَاؤُهُم مَّا كُنتُمْ إِيَّانَا تَعْبُدُونَ ۝٢٨
Wa yawma nahshuruhum jamee`an summa naqoolu lillazeena ashrakoo makaanakum antum wa shurakaaa`ukum; fazaiyalnaa bainahum wa qaala shurakaaa`uhum maa kuntum iyyaanaa ta`budoon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेंगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शरीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَحْشُرُهُمْ: हम उन्हें इकट्ठा करेंगे (हश्र का दिन)
  • مَكَانَكُمْ: अपनी जगह पर रहो, यहीं ठहरे रहो
  • فَزَيَّلْنَا: हमने अलग कर दिया, फासला डाल दिया
  • شُرَكَاؤُهُمْ: उनके साझीदार (जिन्हें वे पूजते थे)

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब हम सभी प्राणियों को इकट्ठा करेंगे—चाहे वे मोमिन हों या काफिर, सबको हश्र के मैदान में जमा किया जाएगा। फिर हम उन लोगों से कहेंगे जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया था: "तुम और तुम्हारे साझीदार (जिन्हें तुम दुनिया में पूजते थे) अपनी जगह पर ठहरे रहो, यहीं रुके रहो, ताकि तुम देख सको कि तुम्हारे साथ क्या किया जाता है।"

उस समय हम उनके और उनके माबूदों के बीच अलगाव पैदा कर देंगे। दुनिया में जो रिश्ते और संबंध थे, वे सब कट जाएंगे। जिन्हें अल्लाह के सिवा पूजा जाता था—चाहे वे मूर्तियाँ हों, फरिश्ते हों या इंसान—वे सब अपने पूजने वालों से बराअत (बेज़ारी) का इज़हार करेंगे और कहेंगे: "हमारी तरफ देखो, तुम हमारी पूजा नहीं करते थे, बल्कि तुम तो अपनी ख्वाहिशों और शैतान के कहने पर चलते थे। हमने तो तुम्हें कभी यह हुक्म नहीं दिया कि हमारी इबादत करो।"

यानी वे माबूद साफ़ कह देंगे कि हम तुम्हारी इबादत से बिल्कुल बेखबर थे, और तुम्हारा हमें पूजना हमारी मरज़ी से नहीं था। यह कहकर वे अपनी बराअत ज़ाहिर कर देंगे, और मुशरिकों के पास कोई जवाब नहीं होगा।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि क़ियामत का दिन यक़ीनी है, और उस दिन हर इंसान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा। इसलिए हमें दुनिया में ऐसे आमाल करने चाहिए जो उस दिन हमारे काम आएं।
  2. शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म है। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करते हैं, वे उस दिन बड़ी रुसवाई का सामना करेंगे, और उनके माबूद भी उनसे किनारा कर लेंगे।
  3. यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की अहमियत सिखाती है। सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, और उसी से मदद माँगनी चाहिए। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें उस दिन कोई निराशा नहीं होगी।
  4. इस आयत से यह भी सबक मिलता है कि दुनिया के रिश्ते और मोहब्बतें—चाहे वह कितनी भी गहरी क्यों न हों—आख़िरत में टूट जाएंगी। सिर्फ़ अल्लाह से रिश्ता और उसकी रज़ा की तलब ही बाक़ी रहेगी।
  5. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह बड़ा रहीम और आदिल है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसके किए का बदला देगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।
🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — यूनुस

26۞ لِّلَّذِينَ أَحْسَنُوا الْحُسْنَىٰ وَزِيَادَةٌ ۖ وَلَا يَرْهَقُ وُجُوهَهُمْ قَتَرٌ وَلَا ذِلَّةٌ ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जिन लोगों ने दुनिया में भलाई की उनके लिए (आख़िरत में भी) भलाई है (बल्कि) और कुछ बढ़कर और न (गुनेहगारों की तरह) उनके चेहरों पर कालिक लगी हुई होगी और न (उन्हें ज़िल्लत होगी यही लोग जन्नती हैं कि उसमें हमेशा रहा सहा करेंगे
27وَالَّذِينَ كَسَبُوا السَّيِّئَاتِ جَزَاءُ سَيِّئَةٍ بِمِثْلِهَا وَتَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ مَّا لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۖ كَأَنَّمَا أُغْشِيَتْ وُجُوهُهُمْ قِطَعًا مِّنَ اللَّيْلِ مُظْلِمًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने बुरे काम किए हैं तो गुनाह की सज़ा उसके बराबर है और उन पर रुसवाई छाई होगी ख़ुदा (के अज़ाब) से उनका कोई बचाने वाला न होगा (उनके मुह ऐसे काले होंगे) गोया उनके चेहरे यबों यज़ूर (अंधेरी रात) के टुकड़े से ढक दिए गए हैं यही लोग जहन्नुमी हैं कि ये उसमें हमेशा रहेंगे
28وَيَوْمَ نَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ نَقُولُ لِلَّذِينَ أَشْرَكُوا مَكَانَكُمْ أَنتُمْ وَشُرَكَاؤُكُمْ ۚ فَزَيَّلْنَا بَيْنَهُمْ ۖ وَقَالَ شُرَكَاؤُهُم مَّا كُنتُمْ إِيَّانَا تَعْبُدُونَ
(ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को इकट्ठा करेगें-फिर मुशरेकीन से कहेंगें कि तुम और तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीक ज़रा अपनी जगह ठहरो फिर हम वाहम उनमें फूट डाल देगें और उनके शरीक उनसे कहेंगे कि तुम तो हमारी परसतिश करते न थे
29فَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ إِن كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِلِينَ
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी
30هُنَالِكَ تَبْلُو كُلُّ نَفْسٍ مَّا أَسْلَفَتْ ۚ وَرُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्श जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़िया (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीRevelation
28आयत

अनुवाद — यूनुस 28

सूरा यूनुस आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को…

सूरा आयत 28/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए