Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَحْشُرُهُمْ: हम उन्हें इकट्ठा करेंगे (हश्र का दिन)
- مَكَانَكُمْ: अपनी जगह पर रहो, यहीं ठहरे रहो
- فَزَيَّلْنَا: हमने अलग कर दिया, फासला डाल दिया
- شُرَكَاؤُهُمْ: उनके साझीदार (जिन्हें वे पूजते थे)
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब हम सभी प्राणियों को इकट्ठा करेंगे—चाहे वे मोमिन हों या काफिर, सबको हश्र के मैदान में जमा किया जाएगा। फिर हम उन लोगों से कहेंगे जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया था: "तुम और तुम्हारे साझीदार (जिन्हें तुम दुनिया में पूजते थे) अपनी जगह पर ठहरे रहो, यहीं रुके रहो, ताकि तुम देख सको कि तुम्हारे साथ क्या किया जाता है।"
उस समय हम उनके और उनके माबूदों के बीच अलगाव पैदा कर देंगे। दुनिया में जो रिश्ते और संबंध थे, वे सब कट जाएंगे। जिन्हें अल्लाह के सिवा पूजा जाता था—चाहे वे मूर्तियाँ हों, फरिश्ते हों या इंसान—वे सब अपने पूजने वालों से बराअत (बेज़ारी) का इज़हार करेंगे और कहेंगे: "हमारी तरफ देखो, तुम हमारी पूजा नहीं करते थे, बल्कि तुम तो अपनी ख्वाहिशों और शैतान के कहने पर चलते थे। हमने तो तुम्हें कभी यह हुक्म नहीं दिया कि हमारी इबादत करो।"
यानी वे माबूद साफ़ कह देंगे कि हम तुम्हारी इबादत से बिल्कुल बेखबर थे, और तुम्हारा हमें पूजना हमारी मरज़ी से नहीं था। यह कहकर वे अपनी बराअत ज़ाहिर कर देंगे, और मुशरिकों के पास कोई जवाब नहीं होगा।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें सिखाती है कि क़ियामत का दिन यक़ीनी है, और उस दिन हर इंसान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा। इसलिए हमें दुनिया में ऐसे आमाल करने चाहिए जो उस दिन हमारे काम आएं।
- शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म है। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करते हैं, वे उस दिन बड़ी रुसवाई का सामना करेंगे, और उनके माबूद भी उनसे किनारा कर लेंगे।
- यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की अहमियत सिखाती है। सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, और उसी से मदद माँगनी चाहिए। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उन्हें उस दिन कोई निराशा नहीं होगी।
- इस आयत से यह भी सबक मिलता है कि दुनिया के रिश्ते और मोहब्बतें—चाहे वह कितनी भी गहरी क्यों न हों—आख़िरत में टूट जाएंगी। सिर्फ़ अल्लाह से रिश्ता और उसकी रज़ा की तलब ही बाक़ी रहेगी।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह बड़ा रहीम और आदिल है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसके किए का बदला देगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालना चाहिए, ताकि उस दिन हम कामयाब हों।
📜 आयत 26-30 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 28
सूरा यूनुस आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उस दिन से डराओ) जिस दिन सब को…सूरा आयत 28/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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