यूनुस · 43/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَمِنْهُم مَّن يَنظُرُ إِلَيْكَ ۚ أَفَأَنتَ تَهْدِي الْعُمْيَ وَلَوْ كَانُوا لَا يُبْصِرُونَ ۝٤٣
Wa minhum mai yanzuru ilaik; afa anta tahdil `umya wa law kaanoo laa yubsiroon
📖 हिंदी अर्थ
तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो तुम्हारी तरफ (टकटकी बाँधे) देखते हैं तो (क्या वह ईमान लाएँगें हरगिज़ नहीं) अगरचे उन्हें कुछ न सूझता हो तो तुम अन्धे को राहे रास्त दिखा दोगे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَنظُرُ إِلَيْكَ: तुम्हारी ओर देखता है (आँखों से)।
  • الْعُمْيَ: अंधों को (यहाँ आशय है: दिल के अंधे, जो सत्य को देखने की समझ नहीं रखते)।
  • لَا يُبْصِرُونَ: वे देखते नहीं हैं (अर्थात् उनकी आँखें खुली होते हुए भी वे सत्य को नहीं पहचानते)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए बताते हैं कि कुछ काफ़िर ऐसे भी हैं जो आपकी ओर देखते हैं, आपके चेहरे पर नबुव्वत के नूर को, आपकी सच्ची दलीलों और मो'जिज़ों को अपनी आँखों से देखते हैं, लेकिन उनकी आँखें केवल जिस्म की आँखें हैं, दिल की आँखें बंद हैं। वे आपके पास आकर आपको देखते हैं, आपकी बातें सुनते हैं, आपके चमत्कार देखते हैं, फिर भी उनके दिलों पर अंधापन छाया हुआ है, वे ईमान की रोशनी को महसूस नहीं कर पाते।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: "क्या आप अंधों को राह दिखा सकते हैं, भले ही वे देखते न हों?" यानी जिस तरह आप किसी जिस्मानी अंधे को आँखें नहीं दे सकते, उसी तरह आप दिल के अंधों को हिदायत नहीं दे सकते। हिदायत देना केवल अल्लाह के हाथ में है। आपका काम केवल पहुँचाना है, और आपने अपना काम बखूबी अंजाम दिया।

इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि इंसान का असली अंधापन आँखों का अंधापन नहीं, बल्कि दिल का अंधापन है। कितने लोग आँखों से देखते हुए भी सत्य से अंधे रहते हैं, और कितने लोग आँखों से न देखते हुए भी दिल की रोशनी से सत्य को पहचान लेते हैं। अल्लाह तआला ने इंसान को अक्ल और समझ दी है, ताकि वह सत्य को पहचाने और अपने रब की इबादत करे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी आँखों को सिर्फ़ दुनिया की चीज़ें देखने के लिए नहीं, बल्कि अल्लाह की निशानियों को देखने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। कुरआन और सुन्नत की रोशनी में हम अपने दिल की आँखें खोलें, तो हर चीज़ में अल्लाह की कुदरत के निशान दिखाई देंगे। अल्लाह तआला ने हमें सुनने, देखने और समझने की ताकत दी है — यह सब उसकी बड़ी नेमत है। हमें चाहिए कि इन नेमतों का शुक्र अदा करें और उन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल करें। जो लोग सत्य को देखकर भी अनदेखा करते हैं, वे दिल के अंधे हैं — और ऐसे लोगों के लिए अल्लाह की हिदायत के दरवाज़े बंद हो जाते हैं। हमें दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह हमारे दिलों की आँखें खोले और हमें सच्चे रास्ते पर चलाए।



📜 आयत 41-45 — यूनुस

41وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّي عَمَلِي وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ ۖ أَنتُم بَرِيئُونَ مِمَّا أَعْمَلُ وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम ज़िम्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
42وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُونَ إِلَيْكَ ۚ أَفَأَنتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ وَلَوْ كَانُوا لَا يَعْقِلُونَ
और उनमें से बाज़ ऐसे हैं कि तुम्हारी ज़बानों की तरफ कान लगाए रहते हैं तो (क्या) वह तुम्हारी सुन लेगें हरगिज़ नहीं अगरचे वह कुछ समझ भी न सकते हो
43وَمِنْهُم مَّن يَنظُرُ إِلَيْكَ ۚ أَفَأَنتَ تَهْدِي الْعُمْيَ وَلَوْ كَانُوا لَا يُبْصِرُونَ
तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो तुम्हारी तरफ (टकटकी बाँधे) देखते हैं तो (क्या वह ईमान लाएँगें हरगिज़ नहीं) अगरचे उन्हें कुछ न सूझता हो तो तुम अन्धे को राहे रास्त दिखा दोगे
44إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ النَّاسَ شَيْئًا وَلَٰكِنَّ النَّاسَ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
ख़ुदा तो हरगिज़ लोगों पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं करता मगर लोग खुद अपने ऊपर (अपनी करतूत से) जुल्म किया करते है
45وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ كَأَن لَّمْ يَلْبَثُوا إِلَّا سَاعَةً مِّنَ النَّهَارِ يَتَعَارَفُونَ بَيْنَهُمْ ۚ قَدْ خَسِرَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِلِقَاءِ اللَّهِ وَمَا كَانُوا مُهْتَدِينَ
और जिस दिन ख़ुदा इन लोगों को (अपनी बारगाह में) जमा करेगा तो गोया ये लोग (समझेगें कि दुनिया में) बस घड़ी दिन भर ठहरे और आपस में एक दूसरे को पहचानेंगे जिन लोगों ने ख़ुदा की बारगाह में हाज़िर होने को झुठलाया वह ज़रुर घाटे में हैं और हिदायत याफता न थे
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीRevelation
43आयत

अनुवाद — यूनुस 43

सूरा यूनुस आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़…

सूरा आयत 43/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए