Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نُنَجِّيكَ – हम तुम्हें निकालेंगे / उठा देंगे (किसी ऊँची जगह पर)
- بِبَدَنِكَ – तुम्हारे शरीर के साथ (अकेले, बिना किसी साथी के)
- لِمَنْ خَلْفَكَ – तुम्हारे बाद आने वालों के लिए
- آيَةً – निशानी / सबक / शिक्षाप्रद घटना
- لَغَافِلُونَ – बेखबर / ध्यान न देने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
जब फ़िरऔन ने ईमान लाने का दावा किया और कहा कि मैं अब ईमान लाता हूँ, तो अल्लाह ने उसके इस पछतावे को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि यह ईमान मौत के समय और आज़ाब देखकर लाया गया था, जो कभी क़बूल नहीं होता। इसके बाद अल्लाह ने फ़रमाया कि आज हम तुम्हें तुम्हारे शरीर के साथ (समुद्र से) निकालकर एक ऊँची जगह पर डाल देंगे, ताकि जो लोग तुम्हारे डूबने की ख़बर सुनें या तुम्हें देखें, वे जान लें कि तुम सचमुच हलाक हो गए और तुम्हारा दावा झूठा था। यह इसलिए भी था कि तुम्हारा शरीर उन लोगों के लिए एक निशानी और सबक बने जो तुम्हारे बाद आएँगे, ताकि वे समझें कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताक़तवर भी टिक नहीं सकता। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि बहुत से लोग अल्लाह की इन निशानियों और सबक से बेखबर रहते हैं, वे इन पर ग़ौर नहीं करते और न ही इनसे सीख लेते हैं।
फ़ायदे (सबक):
- तौबा का वक़्त मौत से पहले है – यह आयत सिखाती है कि ईमान और तौबा उसी वक़्त क़बूल होता है जब इंसान ज़िंदा हो और उसके पास वक़्त हो। मौत के वक़्त या आज़ाब देखकर की गई तौबा क़बूल नहीं होती। इसलिए हमें हर पल अल्लाह की तरफ़ लौटना चाहिए।
- अल्लाह की क़ुदरत का ज़ाहिर होना – फ़िरऔन जैसे ज़ालिम और ताक़तवर बादशाह को अल्लाह ने इस तरह हलाक किया कि उसकी लाश भी लोगों के लिए सबक बन गई। यह दिखाता है कि अल्लाह की ताक़त के आगे किसी की ताक़त नहीं चलती।
- निशानियों से सीखना चाहिए – अल्लाह ने दुनिया में कई निशानियाँ रखी हैं – इतिहास के सबक, क़ुदरत के नज़ारे, और क़ुरआन की आयतें। हमें इन पर ग़ौर करना चाहिए और इनसे सीख लेनी चाहिए, ताकि हम ग़ाफ़िल (बेखबर) न रहें।
- अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ – अल्लाह ने फ़िरऔन की लाश को महफ़ूज़ रखा ताकि लोग उसे देखकर सबक लें। यह अल्लाह की रहमत है कि वह लोगों को सीधे रास्ते पर लाने के लिए ऐसे निशानियाँ छोड़ता है, लेकिन इंसानों की ग़फ़लत उन्हें इनसे दूर रखती है।
- अक़्लमंदी का तक़ाज़ा – जो लोग अल्लाह की आयतों से ग़ाफ़िल रहते हैं, वे सबसे बड़े नुक़सान में हैं। हमें चाहिए कि हम हर घटना और हर आयत में अल्लाह की तरफ़ इशारा देखें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्म के मुताबिक बनाएँ।
📜 आयत 90-94 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 92
सूरा यूनुस आयत 92 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे…सूरा आयत 92/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 90–94. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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