यूनुस · 92/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
فَالْيَوْمَ نُنَجِّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنْ خَلْفَكَ آيَةً ۚ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ عَنْ آيَاتِنَا لَغَافِلُونَ ۝٩٢
Falyawma nunajjeeka bibadanika litakoona liman khalfaka Aayah; wa inna kaseeram minan naasi `an aayaatinaa laghaafiloon
📖 हिंदी अर्थ
तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे बदन को (तह नशीन होने से) बचाएँगें ताकि तू अपने बाद वालों के लिए इबरत का (बाइस) हो और इसमें तो शक़ नहीं कि तेरे लोग हमारी निशानियों से यक़ीनन बेख़बर हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُنَجِّيكَ – हम तुम्हें निकालेंगे / उठा देंगे (किसी ऊँची जगह पर)
  • بِبَدَنِكَ – तुम्हारे शरीर के साथ (अकेले, बिना किसी साथी के)
  • لِمَنْ خَلْفَكَ – तुम्हारे बाद आने वालों के लिए
  • آيَةً – निशानी / सबक / शिक्षाप्रद घटना
  • لَغَافِلُونَ – बेखबर / ध्यान न देने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन ने ईमान लाने का दावा किया और कहा कि मैं अब ईमान लाता हूँ, तो अल्लाह ने उसके इस पछतावे को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि यह ईमान मौत के समय और आज़ाब देखकर लाया गया था, जो कभी क़बूल नहीं होता। इसके बाद अल्लाह ने फ़रमाया कि आज हम तुम्हें तुम्हारे शरीर के साथ (समुद्र से) निकालकर एक ऊँची जगह पर डाल देंगे, ताकि जो लोग तुम्हारे डूबने की ख़बर सुनें या तुम्हें देखें, वे जान लें कि तुम सचमुच हलाक हो गए और तुम्हारा दावा झूठा था। यह इसलिए भी था कि तुम्हारा शरीर उन लोगों के लिए एक निशानी और सबक बने जो तुम्हारे बाद आएँगे, ताकि वे समझें कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताक़तवर भी टिक नहीं सकता। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि बहुत से लोग अल्लाह की इन निशानियों और सबक से बेखबर रहते हैं, वे इन पर ग़ौर नहीं करते और न ही इनसे सीख लेते हैं।


फ़ायदे (सबक):

  1. तौबा का वक़्त मौत से पहले है – यह आयत सिखाती है कि ईमान और तौबा उसी वक़्त क़बूल होता है जब इंसान ज़िंदा हो और उसके पास वक़्त हो। मौत के वक़्त या आज़ाब देखकर की गई तौबा क़बूल नहीं होती। इसलिए हमें हर पल अल्लाह की तरफ़ लौटना चाहिए।
  2. अल्लाह की क़ुदरत का ज़ाहिर होना – फ़िरऔन जैसे ज़ालिम और ताक़तवर बादशाह को अल्लाह ने इस तरह हलाक किया कि उसकी लाश भी लोगों के लिए सबक बन गई। यह दिखाता है कि अल्लाह की ताक़त के आगे किसी की ताक़त नहीं चलती।
  3. निशानियों से सीखना चाहिए – अल्लाह ने दुनिया में कई निशानियाँ रखी हैं – इतिहास के सबक, क़ुदरत के नज़ारे, और क़ुरआन की आयतें। हमें इन पर ग़ौर करना चाहिए और इनसे सीख लेनी चाहिए, ताकि हम ग़ाफ़िल (बेखबर) न रहें।
  4. अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ – अल्लाह ने फ़िरऔन की लाश को महफ़ूज़ रखा ताकि लोग उसे देखकर सबक लें। यह अल्लाह की रहमत है कि वह लोगों को सीधे रास्ते पर लाने के लिए ऐसे निशानियाँ छोड़ता है, लेकिन इंसानों की ग़फ़लत उन्हें इनसे दूर रखती है।
  5. अक़्लमंदी का तक़ाज़ा – जो लोग अल्लाह की आयतों से ग़ाफ़िल रहते हैं, वे सबसे बड़े नुक़सान में हैं। हमें चाहिए कि हम हर घटना और हर आयत में अल्लाह की तरफ़ इशारा देखें और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्म के मुताबिक बनाएँ।


📜 आयत 90-94 — सूरा यूनुस

90۞ وَجَاوَزْنَا بِبَنِي إِسْرَائِيلَ الْبَحْرَ فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ وَجُنُودُهُ بَغْيًا وَعَدْوًا ۖ حَتَّىٰ إِذَا أَدْرَكَهُ الْغَرَقُ قَالَ آمَنتُ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا الَّذِي آمَنَتْ بِهِ بَنُو إِسْرَائِيلَ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ
और हमने बनी इसराइल को दरिया के उस पार कर दिया फिर फिरऔन और उसके लश्कर ने सरकशी की और शरारत से उनका पीछा किया-यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा तो कहने लगा कि जिस ख़ुदा पर बनी इसराइल ईमान लाए हैं मै भी उस पर ईमान लाता हूँ उससे सिवा कोई माबूद नहीं और मैं फरमाबरदार बन्दों से हूँ
91آلْآنَ وَقَدْ عَصَيْتَ قَبْلُ وَكُنتَ مِنَ الْمُفْسِدِينَ
अब (मरने) के वक्त र्ऌमान लाता है हालॉकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था
92فَالْيَوْمَ نُنَجِّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنْ خَلْفَكَ آيَةً ۚ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ عَنْ آيَاتِنَا لَغَافِلُونَ
तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे बदन को (तह नशीन होने से) बचाएँगें ताकि तू अपने बाद वालों के लिए इबरत का (बाइस) हो और इसमें तो शक़ नहीं कि तेरे लोग हमारी निशानियों से यक़ीनन बेख़बर हैं
93وَلَقَدْ بَوَّأْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مُبَوَّأَ صِدْقٍ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ فَمَا اخْتَلَفُوا حَتَّىٰ جَاءَهُمُ الْعِلْمُ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और हमने बनी इसराइल को (मालिक शाम में) बहुत अच्छी जगह बसाया और उन्हं अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी तो उन लोगों के पास जब तक इल्म (न) आ चुका उन लोगों ने एख्तेलाफ़ नहीं किया इसमें तो शक़ ही नहीं जिन बातों में ये (दुनिया में) बाहम झगड़े रहे है क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार इसमें फैसला कर देगा
94فَإِن كُنتَ فِي شَكٍّ مِّمَّا أَنزَلْنَا إِلَيْكَ فَاسْأَلِ الَّذِينَ يَقْرَءُونَ الْكِتَابَ مِن قَبْلِكَ ۚ لَقَدْ جَاءَكَ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
पस जो कुरान हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक़ हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक़ करने वालों से होना
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
92आयत

अनुवाद — यूनुस 92

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Thursday, October 1, 2026

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