Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ (معاني الكلمات):
- ثُمَّ (फिर): यहाँ यह तरतीब और बढ़ोतरी के लिए है, यानी पहले की बात के बाद यह दूसरी और बड़ी बात।
- لَتَرَوُنَّهَا (तुम उसे अवश्य देखोगे): इसमें "لَ" क़सम (शपथ) के लिए है और "نّ" ताकीद (पुष्टि) के लिए — यानी अत्यधिक दृढ़ता से कहा गया है।
- عَيْنَ الْيَقِينِ (आँखों से प्रत्यक्ष यक़ीन): यानी ऐसा यक़ीन जो आँखों से देखकर हो, न कि केवल सुनकर या सोचकर — बिल्कुल स्पष्ट और संदेह से पाक।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने पिछली आयत में फ़रमाया था कि "तुम जहन्नम को ज़रूर देखोगे" — यानी क़यामत के दिन हर इंसान उस आग को अपनी आँखों से देखेगा। अब इस आयत में उसी बात को दोहराकर और भी ज़्यादा ताकीद के साथ फ़रमाया जा रहा है: "फिर तुम उसे यक़ीन की आँख से अवश्य देखोगे।"
यानी यह सिर्फ़ एक ख़बर या अंदाज़ा नहीं है, बल्कि यह ऐसा दृश्य होगा जो तुम्हारी आँखों के सामने साफ़-साफ़ होगा — जैसे कोई चीज़ तुम्हारे सामने रखी हो और तुम उसे बिल्कुल वाज़ेह तौर पर देख रहे हो। उस वक़्त न तो कोई शक़ बाक़ी रहेगा, न कोई बहाना, न कोई इनकार। हर शख्स अपनी आँखों से उस भयानक आग को देख लेगा।
यहाँ अल्लाह ने "देखने" का ज़िक्र दो बार किया — एक बार पिछली आयत में और एक बार इस आयत में — ताकि लोगों के दिलों में इसका खौफ़ और गहरा हो जाए। क्योंकि जब कोई चीज़ सिर्फ़ सुनी जाती है तो उसका असर कम होता है, लेकिन जब आँखों से देखी जाती है तो उसका असर सौ गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि अल्लाह ने फ़रमाया: "ख़बर सुनना आँखों से देखने के बराबर नहीं होता।"
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें जागरूक करती है कि हम उस दिन की तैयारी करें जब हम अपनी आँखों से जहन्नम को देखेंगे। आज हम दुनिया की दौलत, ऊँचाई और शान-शौकत में इतने मग्न हैं कि हमें अपने रब की याद ही भूल गई है। लेकिन याद रखो — वह दिन ज़रूर आएगा जब हर शख्स अपनी आँखों से उस आग को देखेगा।
क्या हमें उस दिन के लिए कुछ नहीं करना चाहिए? क्या हमारे पास वक़्त नहीं है? आज हमारे पास मौका है — नमाज़ पढ़ने का, रोज़ा रखने का, गरीबों की मदद करने का, अल्लाह से माफ़ी माँगने का। यह दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी है, और आख़िरत की ज़िंदगी हमेशा की है।
अल्लाह हमें उस दिन की फ़िक्र करने की तौफ़ीक़ दे, और हमें जहन्नम की आग से बचाकर जन्नत की राह दिखाए। आमीन।
📜 आयत 5-8 — सूरा अत-तकासुर
अनुवाद — अत-तकासुर 7
सूरा अत-तकासुर आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर तुम लोग यक़ीनी देखना देखोगेसूरा आयत 7/8 — सूरा अत-तकासुर التكاثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तकासुर सुनें, सूरा अत-तकासुर अनुवाद, सूरा अत-तकासुर mp3, सूरा अत-तकासुर pdf. आयत 5–8. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अत-तकासुर
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


