अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَمْنَعُونَ – वे रोकते हैं / वंचित करते हैं
- الْمَاعُونَ – छोटी-मोटी चीज़ें जो उधार या मदद के तौर पर दी जाती हैं (जैसे बर्तन, कुल्हाड़ी, फावड़ा आदि), और कुछ मुफ़स्सिरों ने इससे ज़कात मुराद ली है
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की और भी बुराई बयान कर रहा है जो रियाकारी और दिखावे के लिए नमाज़ पढ़ते हैं। ये लोग न सिर्फ़ नमाज़ से ग़ाफ़िल रहते हैं, बल्कि उनका हाल यह है कि वे दूसरों की मदद करने से भी कतराते हैं। वे छोटी-छोटी चीज़ें भी किसी को उधार नहीं देते — जैसे बर्तन, कुल्हाड़ी, फावड़ा, रस्सी, या पानी की बाल्टी — हालाँकि इन्हें उधार देने से उनका कोई नुक़सान नहीं होता। यह उनकी कंजूसी और बुज़ुल्लती की इंतिहा है कि जिस चीज़ के देने में कोई कमी नहीं आती, उसे भी रोकते हैं।
कुछ मुफ़स्सिरों ने "माऊन" से मुराद ज़कात और फ़ितरा ली है, क्योंकि यह भी एक ज़रूरी मदद है जो अल्लाह ने मालदारों पर फ़रमान की है। यानी ये लोग अल्लाह का हक़ भी अदा नहीं करते और बंदों का हक़ भी नहीं देते। इस तरह उनकी नमाज़ भी ख़ाली है, और उनका अख़लाक़ भी ख़राब है।
दावती पहलू:
प्यारे इस्लामी भाइयों! यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा मुसलमान वही है जो सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करे और उसके बंदों के काम आए। इस्लाम में नेकी का दामन बहुत वसीअ है — एक मुस्कुराहट, एक छोटी सी मदद, एक प्याला पानी पिलाना, यहाँ तक कि किसी के काम में आना भी सदक़ा है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "तुम में से कोई भी ईमानदार नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए वही पसंद न करे जो अपने लिए पसंद करता है।"
आओ हम इन बुराइयों से बचें और दूसरों की मदद करने में कोई कसर न छोड़ें। याद रखिए, जो लोगों पर रहम नहीं करता, अल्लाह भी उस पर रहम नहीं करता। हमारा दीन हमें सिखाता है कि पड़ोसी का हक़, मुसाफ़िर का हक़, और ज़रूरतमंद का हक़ अदा करना हमारी ज़िम्मेदारी है। अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 5-7 — अल-माऊन
अनुवाद — अल-माऊन 7
सूरा अल-माऊन आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और रोज़मर्रा की मालूली चीज़ें भी आरियत नहीं देतेसूरा आयत 7/7 — अल-माऊन الماعون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माऊन सुनें, अल-माऊन अनुवाद, अल-माऊन mp3, अल-माऊन pdf. आयत 5–7. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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