Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَخْذُ رَبِّكَ: तुम्हारे रब की पकड़, अर्थात् उसकी ओर से दी जाने वाली सज़ा और पकड़।
- الْقُرَى: बस्तियाँ, बसाहटें (यहाँ अर्थ है उन बस्तियों के निवासी)।
- ظَالِمَةٌ: अत्याचारी, जो स्वयं पर अत्याचार कर रही हों (अर्थात् कुफ़्र और पापों के कारण)।
- أَلِيمٌ: दर्दनाक, तकलीफ़ देने वाला।
- شَدِيدٌ: बहुत सख्त, अत्यंत कठोर।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस प्रकार हमने पिछली बस्तियों को उनके ज़ुल्म और कुफ़्र के कारण पकड़ा और उन्हें सज़ा दी, ठीक उसी प्रकार तुम्हारे रब की पकड़ हर उस बस्ती के लिए है जो ज़ुल्म करती है। जब अल्लाह किसी बस्ती को उसके निवासियों के अत्याचार, कुफ़्र, और रसूलों के झुठलाने की वजह से पकड़ता है, तो वह पकड़ बड़ी भयानक, दर्दनाक और सख्त होती है। यह पकड़ केवल पिछली उम्मतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर समय और हर स्थान पर उन लोगों के लिए है जो अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके रसूलों की तकज़ीब (झुठलाने) पर क़ायम रहते हैं। अल्लाह की यह पकड़ ऐसी है जिसे कोई टाल नहीं सकता, और उसकी सज़ा ऐसी है जो बेहद दर्दनाक और कठोर है। यह एक सख्त चेतावनी है कि अल्लाह की सज़ा से बचने का कोई रास्ता नहीं, और उसकी पकड़ से कोई पनाह नहीं मिल सकती।
फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):
- अल्लाह की पकड़ से डरना: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की सज़ा बहुत सख्त और दर्दनाक है, इसलिए हमें उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए और उसके अज़ाब से डरते रहना चाहिए।
- ज़ुल्म से बचाव: ज़ुल्म (अत्याचार) चाहे अल्लाह पर हो (कुफ़्र और शिर्क के रूप में) या इंसानों पर, अल्लाह की पकड़ का कारण बनता है। इसलिए हमें हर प्रकार के ज़ुल्म से दूर रहना चाहिए।
- अल्लाह की सुन्नत (रीति) में कोई बदलाव नहीं: अल्लाह का क़ानून एक समान है — जो उसके हुक्म की उल्लंघना करता है और उसके रसूलों को झुठलाता है, उसे सज़ा मिलती है। यह हमें सचेत करता है कि हम इतिहास से सबक़ लें।
- तौबा की जल्दी: यह आयत हमें प्रेरित करती है कि अल्लाह की पकड़ आने से पहले हम तौबा कर लें, क्योंकि जब अल्लाह की सज़ा आ जाती है, तो कोई बचाव संभव नहीं होता।
- अल्लाह की रहमत की क़द्र: जब हम अल्लाह की सख्त पकड़ के बारे में जानते हैं, तो हमें उसकी रहमत और माफ़ी की नेमत की अहमियत समझ आती है, और हमें उसकी रहमत के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए और उससे माफ़ी माँगते रहना चाहिए।
📜 आयत 100-104 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 102
सूरा हूद आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब…सूरा आयत 102/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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