हूद · 102/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَكَذَٰلِكَ أَخْذُ رَبِّكَ إِذَا أَخَذَ الْقُرَىٰ وَهِيَ ظَالِمَةٌ ۚ إِنَّ أَخْذَهُ أَلِيمٌ شَدِيدٌ ۝١٠٢
Wa kazaalika akhzu Rabbika izaaa akhazal quraa wa hiya zaalimah; inna akhzahooo aleemun shadeed
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब तुम्हारा परवरदिगार अज़ाब में पकड़ता है तो उसकी पकड़ ऐसी ही होती है बेशक पकड़ तो दर्दनाक (और सख्त) होती है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَخْذُ رَبِّكَ: तुम्हारे रब की पकड़, अर्थात् उसकी ओर से दी जाने वाली सज़ा और पकड़।
  • الْقُرَى: बस्तियाँ, बसाहटें (यहाँ अर्थ है उन बस्तियों के निवासी)।
  • ظَالِمَةٌ: अत्याचारी, जो स्वयं पर अत्याचार कर रही हों (अर्थात् कुफ़्र और पापों के कारण)।
  • أَلِيمٌ: दर्दनाक, तकलीफ़ देने वाला।
  • شَدِيدٌ: बहुत सख्त, अत्यंत कठोर।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस प्रकार हमने पिछली बस्तियों को उनके ज़ुल्म और कुफ़्र के कारण पकड़ा और उन्हें सज़ा दी, ठीक उसी प्रकार तुम्हारे रब की पकड़ हर उस बस्ती के लिए है जो ज़ुल्म करती है। जब अल्लाह किसी बस्ती को उसके निवासियों के अत्याचार, कुफ़्र, और रसूलों के झुठलाने की वजह से पकड़ता है, तो वह पकड़ बड़ी भयानक, दर्दनाक और सख्त होती है। यह पकड़ केवल पिछली उम्मतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर समय और हर स्थान पर उन लोगों के लिए है जो अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके रसूलों की तकज़ीब (झुठलाने) पर क़ायम रहते हैं। अल्लाह की यह पकड़ ऐसी है जिसे कोई टाल नहीं सकता, और उसकी सज़ा ऐसी है जो बेहद दर्दनाक और कठोर है। यह एक सख्त चेतावनी है कि अल्लाह की सज़ा से बचने का कोई रास्ता नहीं, और उसकी पकड़ से कोई पनाह नहीं मिल सकती।


फ़ायदे (सबक़ और नसीहतें):

  1. अल्लाह की पकड़ से डरना: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की सज़ा बहुत सख्त और दर्दनाक है, इसलिए हमें उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए और उसके अज़ाब से डरते रहना चाहिए।
  2. ज़ुल्म से बचाव: ज़ुल्म (अत्याचार) चाहे अल्लाह पर हो (कुफ़्र और शिर्क के रूप में) या इंसानों पर, अल्लाह की पकड़ का कारण बनता है। इसलिए हमें हर प्रकार के ज़ुल्म से दूर रहना चाहिए।
  3. अल्लाह की सुन्नत (रीति) में कोई बदलाव नहीं: अल्लाह का क़ानून एक समान है — जो उसके हुक्म की उल्लंघना करता है और उसके रसूलों को झुठलाता है, उसे सज़ा मिलती है। यह हमें सचेत करता है कि हम इतिहास से सबक़ लें।
  4. तौबा की जल्दी: यह आयत हमें प्रेरित करती है कि अल्लाह की पकड़ आने से पहले हम तौबा कर लें, क्योंकि जब अल्लाह की सज़ा आ जाती है, तो कोई बचाव संभव नहीं होता।
  5. अल्लाह की रहमत की क़द्र: जब हम अल्लाह की सख्त पकड़ के बारे में जानते हैं, तो हमें उसकी रहमत और माफ़ी की नेमत की अहमियत समझ आती है, और हमें उसकी रहमत के लिए शुक्रगुज़ार होना चाहिए और उससे माफ़ी माँगते रहना चाहिए।


📜 आयत 100-104 — हूद

100ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْقُرَىٰ نَقُصُّهُ عَلَيْكَ ۖ مِنْهَا قَائِمٌ وَحَصِيدٌ
(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियों के हालात हैं जो हम तुम से बयान करते हैं उनमें से बाज़ तो (उस वक्त तक) क़ायम हैं और बाज़ का तहस नहस हो गया
101وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ ۖ فَمَا أَغْنَتْ عَنْهُمْ آلِهَتُهُمُ الَّتِي يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مِن شَيْءٍ لَّمَّا جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍ
और हमने किसी तरह उन पर ज़ल्म नहीं किया बल्कि उन लोगों ने आप अपने ऊपर (नाफरमानी करके) ज़ुल्म किया फिर जब तुम्हारे परवरदिगार का (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो न उसके वह माबूद ही काम आए जिन्हें ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थें और न उन माबूदों ने हलाक करने के सिवा कुछ फायदा ही पहुँचाया बल्कि उन्हीं की परसतिश की बदौलत अज़ाब आया
102وَكَذَٰلِكَ أَخْذُ رَبِّكَ إِذَا أَخَذَ الْقُرَىٰ وَهِيَ ظَالِمَةٌ ۚ إِنَّ أَخْذَهُ أَلِيمٌ شَدِيدٌ
और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब तुम्हारा परवरदिगार अज़ाब में पकड़ता है तो उसकी पकड़ ऐसी ही होती है बेशक पकड़ तो दर्दनाक (और सख्त) होती है
103إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّمَنْ خَافَ عَذَابَ الْآخِرَةِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّجْمُوعٌ لَّهُ النَّاسُ وَذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّشْهُودٌ
इसमें तो शक़ नहीं कि उस शख़्श के वास्ते जो अज़ाब आख़िरत से डरता है (हमारी कुदरत की) एक निशानी है ये वह रोज़ होगा कि सारे (जहाँन) के लोग जमा किए जाएंगें और यही वह दिन होगा कि (हमारी बारगाह में) सब हाज़िर किए जाएंगें
104وَمَا نُؤَخِّرُهُ إِلَّا لِأَجَلٍ مَّعْدُودٍ
और हम बस एक मुअय्युन मुद्दत तक इसमें देर कर रहे है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
102आयत

अनुवाद — हूद 102

सूरा हूद आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब…

सूरा आयत 102/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए