हूद · 103/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّمَنْ خَافَ عَذَابَ الْآخِرَةِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّجْمُوعٌ لَّهُ النَّاسُ وَذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّشْهُودٌ ۝١٠٣
Inna fee zaalika la aayatal liman khaafa `azaabal Aakhirah; zaalika Yawmum majmoo`ul lahun naasu wa zaalika Yawmum mashhood
📖 हिंदी अर्थ
इसमें तो शक़ नहीं कि उस शख़्श के वास्ते जो अज़ाब आख़िरत से डरता है (हमारी कुदरत की) एक निशानी है ये वह रोज़ होगा कि सारे (जहाँन) के लोग जमा किए जाएंगें और यही वह दिन होगा कि (हमारी बारगाह में) सब हाज़िर किए जाएंगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَآيَةً – निशानी, सबक, सीख
  • خَافَ – डरे, भयभीत हो
  • مَّجْمُوعٌ لَّهُ النَّاسُ – जिस दिन के लिए सभी लोगों को इकट्ठा किया जाएगा
  • مَّشْهُودٌ – उपस्थित किया जाने वाला, जिसे सभी देखेंगे

तफसीर (व्याख्या):

निश्चय ही उन बस्तियों के निवासियों को पकड़ने और उन पर आज़ाब उतारने में, जो अत्याचारी थे, उस व्यक्ति के लिए बड़ी निशानी और सबक है जो आख़िरत के अज़ाब से डरता है। यह डर उसे सचेत करता है कि वह उन बस्तियों के अंजाम से सीख ले और अपने कर्मों को सुधारे। वह दिन (क़ियामत का दिन) वह दिन है जिसके लिए सभी लोगों को इकट्ठा किया जाएगा — अगले और पिछले, सभी को एक साथ हाज़िर किया जाएगा। और वह दिन ऐसा दिन है जिसे सभी मख़लूक़ात देखेंगी और उसकी भयावहता को अपनी आँखों से महसूस करेंगी। यह दिन इतना महान और भयानक होगा कि हर कोई उसे देखकर हैरान रह जाएगा, और कोई भी उस दिन की सच्चाई से इनकार नहीं कर सकेगा।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि इतिहास के पन्नों में अल्लाह का क़ानून (सुन्नतुल्लाह) काम करता है — जो क़ौमें ज़ुल्म करती हैं, वे अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकतीं। यह हमारे लिए चेतावनी है कि हम ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी से बचें।
  2. आख़िरत का डर इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है। यह डर मोमिन के लिए एक तरक़्क़ी का ज़रिया है, क्योंकि यह उसे अल्लाह की इबादत और नेकी की राह पर चलाता है।
  3. क़ियामत का दिन एक ऐसा दिन है जिसमें सभी इंसान — चाहे वे किसी भी ज़माने के हों — इकट्ठा किए जाएँगे। यह हमें याद दिलाता है कि हमारे सारे कर्म लिखे जा रहे हैं और एक दिन हमें उनका हिसाब देना होगा। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
  4. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत के साथ-साथ उसका अज़ाब भी हक़ है, और जो लोग उस अज़ाब से डरते हैं, वही असल में समझदार हैं। यह डर उन्हें दुनिया की बेहूदा चीज़ों से दूर रखता है और आख़िरत की तैयारी में लगा देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 101-105 — हूद

101وَمَا ظَلَمْنَاهُمْ وَلَٰكِن ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ ۖ فَمَا أَغْنَتْ عَنْهُمْ آلِهَتُهُمُ الَّتِي يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مِن شَيْءٍ لَّمَّا جَاءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍ
और हमने किसी तरह उन पर ज़ल्म नहीं किया बल्कि उन लोगों ने आप अपने ऊपर (नाफरमानी करके) ज़ुल्म किया फिर जब तुम्हारे परवरदिगार का (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो न उसके वह माबूद ही काम आए जिन्हें ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थें और न उन माबूदों ने हलाक करने के सिवा कुछ फायदा ही पहुँचाया बल्कि उन्हीं की परसतिश की बदौलत अज़ाब आया
102وَكَذَٰلِكَ أَخْذُ رَبِّكَ إِذَا أَخَذَ الْقُرَىٰ وَهِيَ ظَالِمَةٌ ۚ إِنَّ أَخْذَهُ أَلِيمٌ شَدِيدٌ
और (ऐ रसूल) बस्तियों के लोगों की सरकशी से जब तुम्हारा परवरदिगार अज़ाब में पकड़ता है तो उसकी पकड़ ऐसी ही होती है बेशक पकड़ तो दर्दनाक (और सख्त) होती है
103إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّمَنْ خَافَ عَذَابَ الْآخِرَةِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّجْمُوعٌ لَّهُ النَّاسُ وَذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّشْهُودٌ
इसमें तो शक़ नहीं कि उस शख़्श के वास्ते जो अज़ाब आख़िरत से डरता है (हमारी कुदरत की) एक निशानी है ये वह रोज़ होगा कि सारे (जहाँन) के लोग जमा किए जाएंगें और यही वह दिन होगा कि (हमारी बारगाह में) सब हाज़िर किए जाएंगें
104وَمَا نُؤَخِّرُهُ إِلَّا لِأَجَلٍ مَّعْدُودٍ
और हम बस एक मुअय्युन मुद्दत तक इसमें देर कर रहे है
105يَوْمَ يَأْتِ لَا تَكَلَّمُ نَفْسٌ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ فَمِنْهُمْ شَقِيٌّ وَسَعِيدٌ
जिस दिन वह आ पहुँचेगा तो बग़ैर हुक्मे ख़ुदा कोई शख़्श बात भी तो नहीं कर सकेगा फिर कुछ लोग उनमे से बदबख्त होगें और कुछ लोग नेक बख्त
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अनुवाद — हूद 103

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Tuesday, August 18, 2026

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