हूद · 15/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
مَن كَانَ يُرِيدُ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَالَهُمْ فِيهَا وَهُمْ فِيهَا لَا يُبْخَسُونَ ۝١٥
Man kaana yureedul hayaatad dunyaa zeenatahaa nuwaffi ilaihim a`maa lahum feehaa wa hum feehaa laa yubkhasoon
📖 हिंदी अर्थ
नेकी करने वालों में से जो शख़्श दुनिया की ज़िन्दगी और उसके रिज़क़ का तालिब हो तो हम उन्हें उनकी कारगुज़ारियों का बदला दुनिया ही में पूरा पूरा भर देते हैं और ये लोग दुनिया में घाटे में नहीं रहेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُرِيدُ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا: जो अपने कर्मों से केवल दुनिया और उसकी सजावट (धन, मान-सम्मान, सुख-सुविधाएँ) चाहता है।
  • نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَالَهُمْ: हम उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला दे देंगे।
  • لَا يُبْخَسُونَ: उन्हें किसी चीज़ में कमी नहीं दी जाएगी, न ही उनका हक़ मारा जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो अपने अच्छे कर्म (जैसे नमाज़, रोज़ा, दान, भलाई) करते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य केवल दुनिया की चीज़ें हासिल करना होता है — जैसे धन कमाना, नाम कमाना, स्वास्थ्य और सुख-सुविधाएँ पाना, या लोगों की प्रशंसा पाना। वे आख़िरत (परलोक) के बदले या अल्लाह की रज़ा के लिए कर्म नहीं करते।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि ऐसे लोगों को हम उनके कर्मों का बदला इसी दुनिया में पूरा-पूरा दे देते हैं — उन्हें स्वास्थ्य, सुरक्षा, रिज़्क़ में खुशहाली, और मनचाही चीज़ें प्राप्त होती हैं। उनके कर्मों में कोई कमी नहीं की जाती, उनका हक़ पूरा दिया जाता है। लेकिन आख़िरत में उनका कोई हिस्सा नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने अपने कर्म केवल दुनिया के लिए किए थे, अल्लाह के लिए नहीं।

यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो दिखावे के लिए या केवल दुनियावी फ़ायदे के लिए अच्छे काम करते हैं। उनका इनाम उन्हें इसी दुनिया में मिल जाएगा, और आख़िरत में उनके पास कोई अच्छाई नहीं बचेगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. नीयत की पवित्रता बहुत ज़रूरी है — कर्म केवल अल्लाह की रज़ा के लिए होने चाहिए, न कि दुनिया के लिए।
  2. जो लोग दुनिया के लिए कर्म करते हैं, वे दुनिया में तो सुख पा सकते हैं, लेकिन आख़िरत में उनका कुछ नहीं बचता। यह एक बड़ी घाटे की बात है।
  3. अल्लाह न्यायपूर्ण है — वह किसी का हक़ नहीं मारता, लेकिन उसकी रज़ा के बिना किया गया कर्म आख़िरत में बेकार है।
  4. मुसलमान को चाहिए कि वह अपने हर अच्छे काम में नीयत को सुधारे — केवल अल्लाह की खुशी और आख़िरत की सफलता को सामने रखे, ताकि उसका कर्म दुनिया और आख़िरत दोनों में काम आए।


📜 आयत 13-17 — हूद

13أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِعَشْرِ سُوَرٍ مِّثْلِهِ مُفْتَرَيَاتٍ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तुम्हें उनका ख्याल न करना चाहिए और ख़ुदा हर चीज़ का ज़िम्मेदार है क्या ये लोग कहते हैं कि उस शख़्श (तुम) ने इस (क़ुरान) को अपनी तरफ से गढ़ लिया है तो तुम (उनसे साफ साफ) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो (ज्यादा नहीं) ऐसे दस सूरे अपनी तरफ से गढ़ के ले आओं
14فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا لَكُمْ فَاعْلَمُوا أَنَّمَا أُنزِلَ بِعِلْمِ اللَّهِ وَأَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ
और ख़ुदा के सिवा जिस जिस के तुम्हे बुलाते बन पड़े मदद के वास्ते बुला लो उस पर अगर वह तुम्हारी न सुने तो समझ ले कि (ये क़ुरान) सिर्फ ख़ुदा के इल्म से नाज़िल किया गया है और ये कि ख़ुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो क्या तुम अब भी इस्लाम लाओगे (या नहीं)
15مَن كَانَ يُرِيدُ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَالَهُمْ فِيهَا وَهُمْ فِيهَا لَا يُبْخَسُونَ
नेकी करने वालों में से जो शख़्श दुनिया की ज़िन्दगी और उसके रिज़क़ का तालिब हो तो हम उन्हें उनकी कारगुज़ारियों का बदला दुनिया ही में पूरा पूरा भर देते हैं और ये लोग दुनिया में घाटे में नहीं रहेगें
16أُولَٰئِكَ الَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِي الْآخِرَةِ إِلَّا النَّارُ ۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا فِيهَا وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
मगर (हाँ) ये वह लोग हैं जिनके लिए आख़िरत में (जहन्नुम की) आग के सिवा कुछ नहीं और जो कुछ दुनिया में उन लोगों ने किया धरा था सब अकारत (बर्बाद) हो गया और जो कुछ ये लोग करते थे सब मिटियामेट हो गया
17أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّهِ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌ مِّنْهُ وَمِن قَبْلِهِ كِتَابُ مُوسَىٰ إِمَامًا وَرَحْمَةً ۚ أُولَٰئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِهِ مِنَ الْأَحْزَابِ فَالنَّارُ مَوْعِدُهُ ۚ فَلَا تَكُ فِي مِرْيَةٍ مِّنْهُ ۚ إِنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
तो क्या जो शख़्श अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हो और उसके पीछे ही पीछे उनका एक गवाह हो और उसके क़बल मूसा की किताब (तौरैत) जो (लोगों के लिए) पेशवा और रहमत थी (उसकी तसदीक़ करती हो वह बेहतर है या कोई दूसरा) यही लोग सच्चे ईमान लाने वाले और तमाम फिरक़ों में से जो शख़्श भी उसका इन्कार करे तो उसका ठिकाना बस आतिश (जहन्नुम) है तो फिर तुम कहीं उसकी तरफ से शक़ में न पड़े रहना, बेशक ये क़ुरान तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से बरहक़ है मगर बहुतेरे लोग ईमान नही लाते
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सूरा हूद आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : नेकी करने वालों में से जो शख़्श दुनिया की ज़िन्दगी…

सूरा आयत 15/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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